ये शॉट आधुनिक क्रिकेट की देन कहा जा सकता है, इसीलिए क्रिकेट कोचिंग की किताबों में इसका जिक्र नहीं मिलता। बल्लेबाज़ अपरकट शॉट तब खेलता है, जब गेंद को अतिरिक्त बाउंस के साथ ऑफ स्टंप के बाहर पिच किया जाता है। इसे थर्ड मैन की ओर खेलते हैं। ये शॉट शुद्ध आधुनिक क्रिकेट की देन है।

आजकल नए बल्लेबाज़ इस शॉट को खेलना पसंद कर रहे हैं पर ध्यान रहे यह जोखिम भरा शॉट है और अगर गलत तरीके से खेलते हैं तो कीपर या स्लिप खिलाड़ी कैच ले सकता है। तेज उछाल वाले ट्रैक पर टी 20 जैसी शॉर्ट ओवर क्रिकेट में अपरकट शॉट ज्यादा देखा जा सकता है। सचिन तेंदुलकर यानि कि मास्टर ब्लास्टर का ये सिग्नेचर शॉट था, वह इसे बहुत ही परफेक्ट खेलते थे। अन्य खिलाड़ी उनसे प्रेरित हैं और उनकी वीडियो जरूर देखते हैं, इसे खेलने से पहले।

अपरकट शॉट खेलते कैसे हैं?

अपरकट थर्ड मैन की ओर खेला जाने वाला शॉट है, जो आमतौर पर तब हिट किया जाता है, जब गेंद अतिरिक्त बाउंस के साथ ऑफ स्टंप के बाहर पिच करे। यह एक खतरनाक शॉट है, क्योंकि गेंद अगर बैट के बाहरी किनारे को छू ले तो कीपर/स्लिप पर कैच जाएगा। अपर कट की दूसरी परिभाषा ये है कि ये ऑफ-स्टंप के बाहर के बाउंसर का काउंटर है।

बल्लेबाज की स्थिति : आमतौर पर थोड़ा नीचे जाते हैं और डिलीवरी के करीब आने का इंतज़ार करते हैं।

बैट : उस समय, बैट को बिलकुल सामने से आगे लाते हैं और गेंद के हिसाब से ऊपर लाकर, स्लिप कॉर्डन के ऊपर चौके या छक्के के लिए सही दिशा दे देते हैं। ये वह शॉट है, जिसमें बल्लेबाज़ गेंद की तेजी का पूरा फायदा उठाता है।

अपर कट शॉट खेलने के माहिर बल्लेबाज़

सचिन तेंदुलकर के अलावा वीरेंद्र सहवाग ने भी अपने करियर में शार्ट गेंद का मुकाबला करने के लिए इस शॉट का प्रभावी ढंग से इस्तेमाल किया। आजकल शिखर धवन इसे खूब खेलते हैं। बहरहाल, इस शॉट की सारी चर्चा सचिन तेंदुलकर पर आ सिमटती है, जिन्होंने इसे टेस्ट क्रिकेट सहित तीनों तरह की क्रिकेट में खूब खेला।

सचिन तेंदुलकर ने अपने 24 साल के शानदार करियर में अपने ख़ज़ाने में कई नए स्ट्रोक जोड़े और उन्हीं में से एक है अपरकट। 2003 वर्ल्ड कप में शोएब अख्तर के विरुद्ध उनके प्रतिष्ठित अपरकट शॉट को आज तक याद किया जाता है। यहां तक कि इस शॉट की शुरूआत का श्रेय भी उन्हें दिया जाता है। सचिन तेंदुलकर ने ‘अपर कट’ शॉट को ऑफ स्टंप के बाहर शॉर्ट-पिच गेंदों पर जवाबी हमला करने के लिए खेलना शुरू किया।

जहां कई भारतीय बल्लेबाज शॉर्ट-पिच गेंदों का सामना करने से जरूरत से ज्यादा सावधान हो रहे थे, सचिन तेंदुलकर ने शोर्ट गेंदों का इस्तेमाल अपने फायदे के लिए किया और उन पर जवाबी हमला किया, ख़ास तौर पर विदेशी मैचों में।

वह 2002 का साल था और भारत दक्षिण अफ्रीका के विरुद्ध ब्लोमफोंटेन में एक टेस्ट मैच खेल रहा था, वहां पहली बार उन्होंने इस शॉट को लगाने के बारे में सोचा। दक्षिण अफ्रीका के तेज गेंदबाज मखाया एंटिनी शॉर्ट पिच गेंदबाजी करते थे और सचिन तेंदुलकर के साथ भी ऐसा ही कर रहे थे। दक्षिण अफ्रीका की पिचें आमतौर पर अच्छा बाउंस देती हैं और, जब खिलाड़ी बाउंस के टॉप पर पहुंचने की कोशिश करते हैं, तब आक्रामक शॉट मारने की कोशिश में कैच पकड़े जाने का जोखिम होता है। यही वजह है कि उन्हें लगा कि अपर कट, जैसा शॉट उनके लिए फायदेमंद होगा, क्योंकि टेस्ट मैचों में थर्ड मैन पर आम तौर पर कोई फील्डर नहीं होता है।

तेंदुलकर ने कई तेज गेंदबाजों को इस शॉट से परेशान किया। वे कहते हैं कि उन्होंने इस स्ट्रोक की कभी ख़ास प्रैक्टिस नहीं की, लेकिन बल्लेबाजी करते समय अपनी इंस्टिंक्ट पर भरोसा किया। दक्षिण अफ्रीका में एक बार अपर कट का उपयोग करने के बाद वे रुके नहीं और अलग अलग गेंदबाजों के खिलाफ अलग अलग पिच पर इस शॉट को खेलने की कोशिश की। यह ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड की पिचों पर खेलने के लिए उनके पसंदीदा शॉट्स में से एक था।

Leave a comment