rishabh pant
'वे अपनी टीम को खराब कर रहे हैं' भारत की बदलाव नीती पर पाकिस्तान के पूर्व कप्तान का बयान

इन दिनों, स्टार विकेटकीपर बल्लेबाज ऋषभ पंत की आलोचना और ट्रोलिंग एक बड़ा फेवरेट टॉपिक बन गया है। चूंकि वह बैट से जूझ रहे हैं, इसलिए उनकी क्रिकेट में बस कमियां ही कमियां नजर आ रही हैं। ऐसा नहीं है कि खराब खेलने पर ऋषभ पंत की आलोचना नहीं होनी चाहिए पर वे, जैसा खेलते हुए टीम में आए और उसी से भविष्य के स्टार की पहचान बनाई, उसे क्यों भूल जाते हैं?

यहां तक कि कम उम्र में ही टीम इंडिया के कप्तान भी बना दिए गए आखिरकार कोई न कोई बात तो होगी उनकी क्रिकेट में। दक्षिण अफ्रीका ने पिछले दिनों भारत में, जो पांच मैचों की टी20 इंटरनेशनल श्रृंखला खेली उसमें भारत के स्टैंड इन कप्तान वे ही थे। इस बार, जब नए रोल में भी रन नहीं बनाए तो बवाल हो रहा है। ये भी सच है कि खराब फार्म का दौर लंबा हो गया है।

टेस्ट क्रिकेट में सनसनीखेज खेले पर टी20 में उसी को दोहराने में नाकामयाब। इस सीजन में आईपीएल में भी रन नहीं बनाए, दिल्ली कैपिटल्स को भी अपने कप्तान की साधारण फॉर्म का नुकसान हुआ। उसके बाद 5 मैचों की टी20 सीरीज में भी वही हुआ, जब चौथे टी20 मैच में ऋषभ 13 गेंदों में 17 रन बनाकर आउट हुए तो ज्यादा शोर मचा। श्रृंखला के पिछले 3 टी20 में 295 और 6 रन बनाए थे। दूसरी तरफ, इसी मैच में दिनेश कार्तिक ने धमाकेदार 50 बना दिए और आवेश खान के साथ मिलकर भारत को जीत दिलाई।

खास बात ये कि हाल में, बार-बार, बाहर जाती गेंद का पीछा करते हुए आउट हो रहे हैं और जानकारों को कोई सुधार नजर नहीं आ रहा। सुनील गावस्कर को उनका शॉट सेलेक्शन गलत लगता है। अपनी कमेंट्री में कहा, “वे 2022 में 10 बार, ऑफ-स्टंप के बाहर आउट हुए हैं। इन गेंद को न खेलते, तो भी काम चलता।” हालत ये है कि इस साल के टी20 वर्ल्ड कप की टीम में उनके लिए जगह पक्की नहीं मान रहे।

ये सब हो रहा है रन न बनाने से। रिकॉर्ड देखें तो अभी भी उनका स्ट्राइक रेट 123+ है। कब ऐसा लगा कि वे हर मैच में रन बनाने वाले बल्लेबाज हैं? पिछले ऑस्ट्रेलिया टूर में उनकी टेस्ट जीतने वाली परियां तो सब गिनते हैं पर ये नहीं देखते कि सीरीज शुरू होने पर उन्हें टेस्ट टीम से, इसलिए निकाला था कि प्रदर्शन में स्थिरता नहीं थी। टेस्ट, वन डे या टी 20 सभी में उनका करियर ग्राफ यही दिखाता है कि वे हर पारी में, या यूं कहिए कि जिम्मेदारी के साथ रन बनाने वाले बल्लेबाज नहीं हैं। तब भी जिस दिन रंग में तो सीधे मैच विनर।

कह रहे हैं कि टीम के पास पहले से ही दिनेश कार्तिक और ईशान किशन प्लेइंग इलेवन में विकेटकीपर के तौर पर हैं और संजू सैमसन इंतजार कर रहे हैं। केएल राहुल तो होंगे ही। ऐसे में ऋषभ को कुछ ख़ास करना होगा टीम में जगह के लिए। रन न बनाओ और खेलते रहो ये सिलसिला ज्यादा नहीं चलने वाला। ऐसा सोचने वालों को देखना होगा कि यह पहली बार नहीं है जब ऋषभ के शॉट सेलेक्शन की आलोचना हो रही है। तब भी वे भारत की उम्मीद बने। उन्हें अगर वीरेंद्र सहवाग का ‘मॉडर्न अवतार’ कह दें तो गलत नहीं होगा सहवाग ने भी कब टीम या विकेट की चिंता की। सौरव गांगुली कप्तान थे तो उन्होंने कहा था, “इस आदत में भी सहवाग मैच विनर है। यही बात ऋषभ पंत के लिए सही है। जरूरी है उनका मनोबल गिराने की बजाए उन्हें ‘वापसी’ के लिए उत्साहित करें।”

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