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भारतीय क्रिकेट की नई चयन समिति को कौन-कौन सी बड़ी चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है?

भारतीय (Indian) क्रिकेट को बहुत जल्द ही नई चयन समिति मिलने वाली है. हाल ही में ऑस्ट्रेलिया (Australia) में संपन्न हुए आईसीसी टी20 विश्व कप (ICC T20 World Cup 2022) में भारतीय टीम को सेमीफाइनल में इंग्लैंड (England) के खिलाफ बुरी तरह से हार झेलनी पड़ी थी. अंग्रेजों ने भारत को 10 विकेट से पराजित करते हुए फाइनल में एंट्री कर ली, जिसके बाद भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (BCCI) ने चेतन शर्मा के नेतृत्व वाली पूरी चयन समिति को बर्खास्त कर दिया.

भारत को पिछले 13 महीनों में दो टी20 विश्व कप और इसी प्रारूप के एशिया कप में निराशा हाथ लगी है. इस दौरान टीम चयन की ज़िम्मेदारी चेतन शर्मा एंड कंपनी के हाथों में थी. बीते 2 साल में पांच बड़े फ्लॉप शो पर अगर नज़र डालें तो, वर्ल्ड टेस्ट चैंपियनशिप – हार, टी20 वर्ल्ड कप 2021- हार, साउथ अफ्रीका के खिलाफ टेस्ट और वनडे सीरीज में हार, एशिया कप- हार, टी20 वर्ल्ड कप 2022 में फिर हार. हालिया मेजर टूर्नामेंट में टीम के सेमीफाइनल से बाहर होने के बाद कई खिलाड़ियों के आउट ऑफ फॉर्म होने के बावजूद उनका टीम में चयन होने को लेकर सवाल भी उठे. स्टार स्पिनर युजवेंद्र चहल का टीम में चयन होने के बावजूद उन्हें टीम में शामिल नहीं किया गया. यहां तक कि भारतीय टीम के सबसे सफल टी20 आई स्पिनर को पिछले साल संयुक्त अरब अमीरात में खेले गए टी20 विश्व कप में भी चयनित नहीं किया गया. उनकी जगह वरुण चक्रवर्ती को मौका दिया गया, जो फ्लॉप साबित हुए और आज वे कहां हैं? सच यह है कि वरुण पिछले काफी समय से टी20 टीम से बाहर चल रहे हैं. ऐसे ही कई और मामले हैं.

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बता दें कि BCCI की चयन समिति में पांच सदस्य होते हैं, जो अधिकतम पांच साल तक पद पर रह सकते हैं. हालिया कमेटी में चार सदस्य थे, अध्यक्ष चेतन शर्मा के अलावा देबाशीष मोहंती, सुनील जोशी और हरविदर सिंह. इन लोगों को चयन समिति में आए लगभग 2 साल ही हुए थे, लेकिन बड़ी सीरीज/टूर्नामेंट में मिली हार के बाद भारतीय बोर्ड ने चारों को बर्खास्त कर दिया और नई कमेटी के गठन के लिए आवेदन निकाल दिए.

अब सवाल यह उठता है कि भारतीय क्रिकेट की नई चयन समिति को कौन-कौन सी चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है. आइये जानते हैं-

सेलेक्शन कमिटी में निडरता, पारदर्शिता और जवाब देने की होनी चाहिए वीरता

चयन समिति में ऐसे लोग होने चाहियें, जो निडर हों और फैसले लेते समय किसी बड़े खिलाड़ी या अधिकारी के दबाव में न आएं. यह भी ज़रूरी है कि टीम सेलेक्शन के बाद चयन समिति के लोग प्रेस कॉन्फ्रेंस में शामिल हों, जहां टीम से जुड़े मद्दों पर उनसे सवाल किए जाएं और, जिसमें किसी तरह का विवाद न हो. हर खिलाड़ी को खुद का रोल पता हो कि टीम में उसकी क्या भूमिका है. सबसे बड़ी चीज एक ऐसी टीम, जो आईसीसी के मेजर टूर्नामेंट जिता सके. अगर चेतन शर्मा के नेतृत्व वाली चयन समिति के काम करने के तरीके को देखें, तो उनके कार्यकाल के दौरान फैसले लेने की एक अजीब सी घबराहट और पारदर्शिता की कमी दिखाई दी. कई अहम फैसले और दौरे सिर्फ ट्विटर पर घोषित कर दिए गए, जिसके बाद न कोई प्रेस कॉन्फ्रेंस हुई और न कोई सवाल जवाब किए गए. विराट कोहली, जैसे दिग्गज खिलाड़ी की एकदिवसीय अंतर्राष्ट्रीय कप्तानी शर्मनाक अंदाज़ में छीन ली गई और उनके फैसले पर अमल नहीं किया गया.

आगामी विश्व कप के लिए मजबूत टीम का निर्माण

आने वाले दो सालों में टीम इंडिया दो विश्व कप खेलेगी. पहला, आईसीसी वनडे विश्व कप, जिसका आयोजन अगले साल भारत में होगा और दूसरा, टी20 वर्ल्ड कप, जो 2024 में वेस्टइंडीज और अमेरिका में खेला जाएगा. इसके मद्देनजर, नई चयन समिति को एक मजबूत टीम का निर्माण करना होगा और यह तय करना होगा कि कौन से प्लेयर की जगह कहां ठीक बैठती है. यह भी सच है कि भारतीय टीम साल 2013 के बाद से एक भी बार आईसीसी के टाइटल पर कब्ज़ा नहीं जमा पाई है. इस दौरान नीली जर्सी वाली टीम ने दिग्गज विकेटकीपर बल्लेबाज महेंद्र सिंह धोनी की कप्तानी में इंग्लैंड में आयोजित हुई चैंपियंस ट्रॉफी पर कब्ज़ा जमाया था और उसके बाद से टीम इंडिया आईसीसी के मेजर टूर्नामेंट्स में निर्णायक/नॉकआउट मुकाबले हारती आ रही है. ऐसे में नई सेलेक्शन कमिटी को खिलाड़ियों को परखना होगा और आगामी टूर्नामेंट्स के लिए सही खिलाड़ियों का चयन करना होगा, जिससे भारतीय टीम आईसीसी टूर्नामेंट के टाइटल के जीत के सूखे को समाप्त कर सके.

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क्या हर फ़ॉर्मेट में देखने को मिलेगा अलग कप्तान?

अगर चेतन शर्मा की अगुवाई वाली भारतीय चयन समिति की बात करें, तो उनके टीम सेलेक्शन में कई बार कंफ्यूजन नज़र आई. यदि टी20 विश्व कप में मिली हार से थोड़ा पहले जाकर देखें, तो याद आएगा कि सेलेक्शन कमिटी बेंच स्ट्रेंथ के नाम पर एक साल में लगभग 28 से भी ज्यादा खिलाड़ी आजमा चुकी थी. मगर, जब टी20 वर्ल्ड कप से ठीक पहले कुछ वरिष्ठ खिलाड़ी चोटिल हुए, तो उनके विकल्प तलाशने में पसीने छूट गए. यह भी याद हो कि स्टार विकेटकीपर बल्लेबाज दिनेश कार्तिक ने पिछले कुछ महीने पहले एक बयान दिया था कि भारत की बेंच स्ट्रेंथ इतनी मजबूत है कि हम एक साथ तीन अंतर्राष्ट्रीय टीमें खिला सकते हैं, लेकिन टी20 विश्व कप में आपके सारे प्रयोगों की पोल खुल गई. इतना ही नहीं, बेंच स्ट्रेंथ खिलाड़ियों तक सीमित रहती, तो फिर भी ठीक रहता. यहां तो कप्तानों की बेंच तैयार होने लग गई. चयन कमेटी ने एक साल में लगभग 8 कप्तान आजमाए, लेकिन फिर भी आज सच यह है कि टीम के पास कोई सॉलिड कप्तानी विकल्प नहीं है. ऐसे में नई चयन समिति के सामने एक बड़ी चुनौती यह होगी कि वे हर फ़ॉर्मेट में अलग-अलग कप्तानों को आजमाएं और एक खिलाड़ी को नियमित कप्तान नियुक्त करें, जिससे आगामी विश्व कप और बड़े टूर्नामेंट/सीरीज की तैयारियों में कोई कमी न रह पाए.

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Q. भारतीय टीम ने आखिरी आईसीसी टाइटल कब जीता था?

A. 2013 में

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