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Birthday Special: सौरव गांगुली के बारे में 7 अनसुनी बातें

भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (BCCI) के अध्यक्ष सौरव गांगुली (Sourav Ganguly) आज अपना 50वां जन्मदिन मना रहे हैं. उनका जन्म 8 जुलाई, 1972 को बंगाल के कोलकाता में हुआ था. उन्हें कई नामों से संबोधित किया जाता है, जैसे दादा, प्रिंस ऑफ कोलकाता, महाराज, बंगाल टाइगर, द वॉरियर प्रिंस, द गॉड ऑफ ऑफ साइड. गांगुली ने साल 1992 में ब्रिसबेन के मैदान पर वेस्टइंडीज के खिलाफ अपना अंतर्राष्ट्रीय डेब्यू किया था. उन्होंने कई सालों तक टीम इंडिया की कप्तानी भी की है.

आज हम गांगुली के ख़ास दिन के मौके पर उनके बारे में 5 बातें जानेंगे, जिनके बारे में आपने शायद ही सुना होगा. आइये डालते हैं एक नज़र-

-सौरव गांगुली के माता-पिता ने उन्हें ‘महाराज’ उपनाम दिया था, जिसका अर्थ है ‘राजकुमार’. बाद में जेफ्री बॉयकॉट ने उन्हें प्यार से ‘द प्रिंस ऑफ कोलकाता’ कहा और तब से वह इसी नाम से मशहूर हैं.

-उनके पिता चंडीदास गांगुली एक प्रिंट व्यवसाय चलाते थे, जो उस समय एशिया में तीसरा सबसे बड़ा था.

-हालांकि, सौरव गांगुली अपने दाहिने हाथ से लिखते हैं. वे गेंदबाजी भी इसी हाथ से करते हैं और लगभग सब काम वे राईट हैंड से करते हैं, लेकिन सौरव ने बाएं हाथ से बल्लेबाजी करना सीखा ताकि वे अपने बड़े भाई स्नेहाशीष के खेल उपकरण का इस्तेमाल कर सकें.

-गांगुली बचपन से ही फुटबॉल के बहुत बड़े प्रशंसक रहे हैं, लेकिन उनके भाई, जो पहले से ही एक स्थापित क्रिकेटर थे, उन्होंने गांगुली को क्रिकेट अकादमी में दाखिला लेने के लिए कहा.

-गांगुली ने बंगाल रणजी ट्रॉफी टीम में अपने भाई स्नेहाशीष की जगह ली थी.

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-अपने पूरे करियर में, गांगुली का टेस्ट औसत कभी भी 40 से नीचे नहीं गिरा. उनका टेस्ट औसत 42.17 का है.

-1997 में वे अपने बचपन की दोस्त डोना रॉय के साथ घर छोड़कर चले गए थे, क्योंकि दोनों के परिवार सहमत नहीं थे. हालांकि, बाद में परिवारों में सुलह हो गई और दोनों का विवाह समारोह 21 फरवरी 1997 को हुआ.

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