कोरोना वायरस महामारी की वजह से टोक्यो ओलंपिक भले ही 1 साल के लिए टल गया हो, लेकिन दुनियाभर के एथलीटों ने ओलंपिक मेडल का सपना देखना नहीं छोड़ा है। यही कारण है कि भारत समेत सभी देशों के एथलीट लॉकडाउन के बावजूद सीमित संसाधनों में ओलंपिक की तैयारियों में पूरे जी-जान से जुटे हैं।

वैसे तो ओलंपिक में मेडल जीतने का सपना हर एथलीट देखता है, लेकिन खेलों के महाकुंभ में मेडल को चूमने की हसरत बेहद ही कम खिलाड़ियों की पूरी हो पाती है। इस बात का अंदाजा भारत के 2016 रियो ओलंपिक के प्रदर्शन से साफ तौर पर लगाया जा सकता है, जिसमें 117 भारतीय एथलीटों में से सिर्फ 2 महिला एथलीट- पीवी सिंधू और साक्षी मलिक ही मेडल जीतने में कामयाब हो पाई थी।

रियो ओलंपिक के निराशाजनक प्रदर्शन को अब 4 साल से भी ज्यादा का समय बीत चुका है और इस दौरान कई शानदार खिलाड़ियों ने विश्व स्तर पर भारत का नाम दुनिया में रोशन किया है। इनमें से कुछ खिलाड़ी तो ऐसे हैं, जिन्होंने बेहद ही कम समय में अपने प्रदर्शन से न केवल एशियन गेम्स और वर्ल्ड चैंपियनशिप जैसे टूर्नामेंट में मेडल जीते बल्कि अपना नाम रिकॉर्ड बुक में भी दर्ज कराया।

ऐसे में उम्मीद जताई जा रही है कि ये भारतीय एथलीट टोक्यो में होने वाले ओलपिंक गेम्स में भारत के नाम का डंका बजाने में जरूर कामयाब होंगे। तो आइए जानते हैं ऐसे ही कुछ भारतीय एथलीटों के बारे में, जिन्हें टोक्यो ओलंपिक में मेडल का प्रबल दावेदार माना जा रहा है।

बजरंग पूनिया

मौजूदा समय में भारतीय रेसलिंग का सबसे बड़ा नाम हैं बजरंग पूनिया, जो अपने गुरू और ओलंपिक ब्रोंज मेडलिस्ट योगेश्वर दत्त के नक्शेकदम पर चल रहे हैं। 65 क्रिलो ग्राम वर्ग में कुश्ती लड़ने वाले बजरंग पूनिया भारत के इकलौते ऐसे पहलवान हैं, जिन्होंने वर्ल्ड रेसलिंग चैंपियनशिप में तीन मेडल अपने नाम किए हैं। मेडल का ये सिलसिला साल 2013 में हंगरी की राजधानी बुडापेस्ट से शुरू हुआ था, जिसमें उन्होंने ब्रांज मेडल अपने नाम किया था। इसके बाद उन्होंने साल 2018 में भी ब्रांज जीता, लेकिन अगले साल वह वर्ल्ड चैंपियनशिप में मेडल का रंग बदलने में कामयाब रहे। 2019 में नूर-सुल्तान में हुई वर्ल्ड चैंपियनशिप में बजरंग ने सिल्वर मेडल पर कब्जा जमाया। यही नहीं, बजरंग ने 2014 एशियन गेम्स में सिल्वर तो 2018 एशियन गेम्स में गोल्ड मेडल अपने नाम किया। बीते 5-6 सालों में बजरंग लगातार शानदार प्रदर्शन करते आ रहे हैं और यही वजह है कि इस समय वह 65 क्रिलो ग्राम वर्ग की वर्ल्ड रैंकिंग में वह दूसरे नंबर पर हैं। ऐसे में भारत के इस दिग्गज पहलवान को टोक्यो ओलंपिक का सबसे प्रबल दावेदार कहा जा सकता है।

पीवी सिंधू

2014 रियो ओलंपिक में बैडमिंटन महिला एकल का फाइनल मुकाबला चल रहा था और भारत की पीवी सिंधू के लिए करोड़ो लोग दुआएं कर रहे थे, लेकिन अपनी पूरी ताकत लगाने के बावजूद सिंधू गोल्ड मेडल का मुकाबला नहीं जीत सकी और उन्हें सिल्वर मेडल से ही संतोष करना पड़ा। एक तरफ जहां कुछ लोग सिंधू के सिल्वर जीतने पर खुशी मना रहे थे। वहीं, दूसरी तरफ कुछ लोग ऐसे भी थे जो कह रहे थे कि सिंधू फाइनल फोबिया से ग्रस्त हैं, लेकिन वो समय भी आया जब सिंधू ने आलोचकों को अपने खेल से करारा जवाब दिया और 2019 वर्ल्ड चैंपियनशिप में गोल्ड मेडल जीतकर इतिहास रच दिया। बैडमिंटन में भारत की शीर्ष महिला एकल खिलाड़ी पीवी सिंधू मौजूदा समय में रैंकिंग में 7वें पायदान पर हैं। हालांकि, वर्ल्ड चैंपियन बनने के बाद से उनका प्रदर्शन कुछ खास नहीं रहा है, लेकिन फैंस को उम्मीद है कि टोक्यो ओलंपिक में वह इस बार मेडल का रंग बदलने में जरूर कामयाब होंगी।

नीरज चोपड़ा

बैडमिंटन और कुश्ती के इतर भाला फेंक में भी भारत के ओलंपिक मेडल जीतने की बहुत ज्यादा संभावनाएं हैं, जिसके लिए जैवलिन थ्रोअर नीरज चोपड़ा रात-दिन मेहनत कर रहे हैं। नीरज ने इसी साल दक्षिण अफ्रीका में 87.86 मीटर भाला फेंक कर ओलंपिक के लिए क्वॉलीफाई किया था। नीरज की काबिलियत का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि साल 2016 में उन्होंने आईएएएफ वर्ल्ड अंडर-20 एथलेटिक्स चैम्पियनशिप में वर्ल्ड रिकॉर्ड बनाते हुए गोल्ड मेडल अपने नाम किया था। यही नहीं, नीरज 2018 एशियन गेम्स में भी बहुत ही आराम से गोल्ड मेडल पर कब्जा जमाने में सफल रहे। ओलंपिक मेडल के सपने को पूरा करने के लिए नीरज विदेश में बेहतरीन कोचिंग स्टॉफ की निगरानी में ट्रेनिंग कर रहे हैं और अगर टोक्यो ओलंपिक में वह मेडल जीतने में कामयाब होते हैं तो किसी को हैरानी नहीं होगी। 

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