पिछले कुछ महीनों में सिराज ने भारत के लिए अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट में शानदार प्रदर्शन करते हुए सबको प्रभावित किया है।

लॉर्ड्स में भारत की जीत के आर्किटेक्ट में से एक आज पूरी क्रिकेट की दुनिया हैरान है कि भारत को ऐसा गेंदबाज़ कहां से और कैसे मिला?

शुरू से हिम्मती

टेनिस-बॉल क्रिकेट से सिराज ने शुरूआत की। 11 साल की उम्र में नियमित खेलना शुरू किया और हैदराबाद में टेनिस-बॉल लीग के स्टार बने। परिवार मामूली से साधनों वाला, पिता ऑटो रिक्शा चालक। चार का परिवार, छोटा सा घर, लेकिन पिता ने ठान लिया था कि बेटे को अपने क्रिकेट टैलेंट निखारने का हर मौका मिलना चाहिए, जो बेटे ने मांगा वह जुटाया। 2015 में, जब चारमीनार क्रिकेट क्लब में शामिल हुए, तब असली गेंद से गेंदबाजी करना शुरू किया। कुछ ही महीनों के अंदर हैदराबाद अंडर- 23 टीम में थे और फिर फर्स्ट क्लास क्रिकेट में खेल रहे थे।

शुरूआत से माहिर

2016-17 में, सिराज ने रणजी ट्रॉफी में 43 विकेट लिए और खुद को लाल गेंद वाली क्रिकेट में भारत के सबसे होनहार तेज गेंदबाजों में से एक के रूप में पेश कर दिया। आईपीएल फ्रेंचाइजी भी सिराज के लिए बोली युद्ध में लग गए, जो तब तक नहीं रुका जब तक सनराइजर्स हैदराबाद ने 2.6 करोड़ रुपए का भुगतान नहीं किया। रकम सुनकर सिराज सुन्न हो गए थे। पिता को काम करना बंद करने के लिए कह दिया। पिछले साल जब तक ऑस्ट्रेलिया पहुंचे, तब तक लिमिटेड ओवर क्रिकेट के चार मैच खेले थे, मामूली सी सफलता के साथ। टेस्ट सीरीज के लिए तेज गेंदबाजी की लिस्ट में नंबर 5/6 थे।

टर्निंग पॉइंट

ऑस्ट्रेलिया में क्वारंटीन के दौरान, सिराज को पता चला कि उनके पिता बीमारी से लड़ाई हार गए हैं। टीम मैनेजमेंट ने उनके भारत लौटने का पूरा इंतज़ाम करा दिया पर ये तय था कि लौटकर 14 दिन के एक और क्वारंटीन के बाद खेलना मुश्किल हो जाएगा। सिराज की मां ने उन्हें ऑस्ट्रेलिया में ही रुके रहने के लिए कहा, अपने पिता के सपने को पूरा करो। तब सोचा भी नहीं था कि ये फैसला टेस्ट डेब्यू में मददगार बनेगा। चोटिल खिलाड़ियों की लिस्ट लंबी होने लगी और सिराज ने मेलबर्न में बॉक्सिंग डे पर टेस्ट क्रिकेट खेलना शुरू किया। पहला टेस्ट विकेट मार्नस लाबुशेन का और इसके बाद पीछे मुड़कर नहीं देखा।

एकदम वेटरन बन गए

मैच में 5 विकेट, भारत की टेस्ट में जीत और सिराज एकदम अनुभवी बन गए। सिडनी में अपने दूसरे टेस्ट से पहले, भारत के राष्ट्रगान के दौरान रोते हुए देखा गया, उन पिता को याद किया जो अपने बेटे को एक टेस्ट मैच खेलते देखना चाहते थे। अपने तीसरे टेस्ट तक तो वे भारत के अटैक के ‘चीफ’ बन गए थे। सिराज ने ब्रिस्बेन में दूसरी पारी में अपना पहला 5 विकेट का प्रदर्शन किया। भारत को स्टार मिल गया।

भारत के स्टार गेंदबाज़

ये मानने वालों की कमी नहीं कि सिराज को WTC फाइनल में न खिलाना ऐसा फैसला था, जो भारत को बड़ा भारी पड़ा। कोई बात नहीं, सिराज की गेंदबाजी ने यादगार जीत दिला दी लॉर्ड्स में। सिराज ने अपने 5 टेस्ट में 24 विकेट लिए हैं, इनमें से 19 मेलबर्न क्रिकेट ग्राउंड, गाबा और लॉर्ड्स में जीत वाले टेस्ट में आए। ये गिनती ही उन्हें स्टार बना देती है।

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