आरोपों के बीच भारत की ईमानदार जीत
टी20 वर्ल्ड कप में भारत के सेमीफाइनल पहुंचने पर लगे पक्षपात के आरोप तथ्यों से परे दिखते हैं. टीम ने लगातार यात्रा, अलग-अलग वेन्यू और कड़े मुकाबलों के बीच जगह बनाई. सुपर 8 में आखिरी मैच तक संघर्ष बताता है कि कोई विशेष लाभ नहीं मिला. भारत-पाक मैच, सीडिंग और वेन्यू तय होने जैसे फैसले पहले भी होते रहे हैं. यह जीत केवल प्रदर्शन, धैर्य और टीमवर्क का नतीजा है.
दिल्ली: तो भारत टी 20 वर्ल्डकप के सेमीफाइनल में आ गया। जो इस वर्ल्डकप के बहाने भारत की आलोचना में कोई कमी नही छोड़ रहे थे, उन्हें एक और पॉइंट मिल गया। क्या सच में किसी बाहरी मदद से भारत सेमीफाइनल में पहुंचा?
अभी तक, मुख्य मेजबान होने के बावजूद भारत ने इस टी20 वर्ल्ड कप से जुड़े आईसीसी के किसी भी फैसले का ऐसा कोई फायदा नहीं उठाया जिस से ये कह दें कि भारत, को अन्य दूसरी टीम की तुलना में ‘फायदा’ मिला। टीम सेमीफाइनल की रेस में सुपर 8 के पहले मैच से जूझती रही, किसी एक स्टेडियम में टिक कर नहीं खेले और अकेली ऐसी टीम है जिसके खिलाड़ी सुपर 8 ख़त्म होने तक 10 हजार किमी से भी ज्यादा के सफर की थकान झेल चुके हैं।
तब भी, इस टी20 वर्ल्ड कप को लेकर, ‘ईमानदारी न दिखाने’ और भारत को फायदा पहुंचाने के आरोप लग रहे हैं। कितने सच हैं ये आरोप? सबसे बड़ा आरोप, सुपर 8 में पहले से तय टीम सीडिंग का है। ऐसा आरोप लगाने वाले ये क्यों भूल जाते हैं कि ये ऐसा पहला वर्ल्ड कप नहीं जिसमें दूसरे राउंड के लिए पहले से सीडिंग तय थी। तो भारत पर आरोप क्यों?
दूसरा आरोप ड्रॉ फिक्स करने का है ताकि भारत-पाकिस्तान मैच जरूर हो। सच ये है कि ऐसा ब्रॉडकास्टर की मांग पर है न कि भारत की मांग पर। साथ में इस ‘बड़े’ मैच की बदौलत आईसीसी को जो ‘बड़ी’ कमाई होती है, उसमें न सिर्फ ऐसे आरोप लगाने वालों के देश के क्रिकेट बोर्ड को भी हिस्सा मिलता है, उन एसोशिएट देशों के क्रिकेट बोर्ड को भी पैसा मिलता है, जिसे सब क्रिकेट को दुनिया के हर देश में पहुंचाना कहते हैं।
एक नया आरोप ये है कि आखिरी ग्रुप मैच एक साथ न खेले। ये मैच साथ न होने से टीम क्वालीफाई करने की जरूरत के हिसाब से क्रिकेट खेलती है। संयोग से भारत ने सुपर 8 में आख़िरी मैच खेला जिससे इस आरोप को और हवा मिल गई। आरोप है कि भारत का सेमी फाइनल वेन्यू पहले से तय है। ये भी ऐसा फैसला नहीं है जो इसी टी20 वर्ल्ड कप में देखने को मिला है। तो जिस ‘स्पोर्टिंग इंटीग्रिटी’ की बात करते हुए जो वर्ल्ड कप में इसकी पूरी तरह से कमी का मुद्दा उछाल रहे हैं, वास्तव में उन्होंने अपना होमवर्क ठीक तरह नहीं किया। इसलिए बेबुनियाद पॉलिटिकल और टूर्नामेंट में फायदे के लिए प्लेइंग कंडीशंस में बदलाव के आरोप लगाना कतई सही नहीं।
फीफा 1982 फुटबॉल वर्ल्ड कप की एक मिसाल इस मामले में बड़ी मजेदार है। तब वेस्ट जर्मनी और ऑस्ट्रिया दोनों जानते थे कि जर्मनी की 1-0 की जीत से ये दोनों टीम फायदे में रहेंगी और आगे बढ़ जाएंगी जबकि अल्जीरिया बाहर हो जाएगा। ठीक वही हुआ और वेस्ट जर्मनी के शुरुआती गोल के बाद, दोनों टीम ने गोल करने की कोशिश करने का नाटक भी नहीं किया। तब भी शोर नहीं हुआ पर इस टी20 वर्ल्ड कप में जबकि कुछ हो नहीं रहा तो शोर हो रहा है।
खैर, भारत को वर्ल्ड कप जिताना है की मुहिम रंग लाई और आखिरकार भारत ने सुपर 8 में अपने आख़िरी मैच में वेस्टइंडीज को हरा सेमीफाइनल के लिए क्वालीफाई कर लिया। अगर भारत को ‘फायदा’ पहुंचाने की कोशिश हो रही होती तो न तो टीम इंडिया और न ही देश के करोड़ों क्रिकेट प्रेमी इतना तनाव झेलते। क्या सुपर 8 में भारत ने आखिरी ग्रुप मैच वेस्टइंडीज को कमजोर मानकर खेला? ये जीत भारत को अपनी बेहतर क्रिकेट की बदौलत मिली। एक बार फिर से ये साबित हुआ कि कब कौन हीरो बनेगा कोई नहीं जानता।
दूसरी टीमें, पाकिस्तान को छोड़कर, ये नहीं जानती थीं कि उनके लिए सेमी-फ़ाइनल वेन्यू क्या होगा जबकि भारत को 5 मार्च को मुंबई में सेमीफाइनल में खेलना तय था (बशर्ते उस मैच में एक टीम पाकिस्तान न होती)। ऐसा भी पहली बार नहीं हुआ। 2024 टी20 वर्ल्ड कप में, भारत का अपना सेमीफाइनल गुयाना में और त्रिनिदाद में वेस्टइंडीज का खेलना तय था। तब भारत मेजबान नहीं था।
इस बात पर कोई शोर नहीं कि भारत ने हर मैच अलग-अलग वेन्यू पर खेला, जबकि दक्षिण अफ़्रीका ने अपने ज्यादातर मैच अहमदाबाद में ही खेले। कोई भी दक्षिण अफ्रीका को फायदा पहुंचाने का आरोप नहीं लगा रहा। पाकिस्तान ने अपने सभी मैच श्रीलंका में खेले और तय था कि अपना सेमीफाइनल भी वहीं खेलेंगे। तब भी शोर भारत के विरोध में है।
खैर ऐसा शोर तो होता रहेगा। टीम इंडिया अपनी वर्ल्ड कप जीने की मंजिल के और करीब है। अब सिर्फ दो मैच और जीतने हैं। पूरे देश की सपोर्ट टीम इंडिया के साथ। मुंबई अगली मंज़िल है और जीत का यही टेंपो जारी रखना है।
फन फैक्ट:
- श्रीलंका टीम ने पाकिस्तान को टूर्नामेंट से बाहर का रास्ता दिखाकर अपने देश की इकॉनमी का बड़ा नुकसान किया। वहां सेमीफाइनल और क्या पता फ़ाइनल भी होते तो श्रीलंका बोर्ड को बहुत बड़ा फायदा होता।
- एक खास बात ये कि सेमीफाइनल में पहुंची चारों टीम अलग अलग महाद्वीप से हैं।
