International Cricket Council (ICC)
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मुख्य बिंदु:

आईसीसी टूर्नामेंट में कई बार टीमें सुरक्षा या राजनीतिक कारणों से मैचों में हिस्सा नहीं लेतीं. बांग्लादेश का टी20 वर्ल्ड कप में भारत नहीं आना नया उदाहरण है. इससे पहले भारत, ऑस्ट्रेलिया, वेस्टइंडीज और जिम्बाब्वे जैसी टीमें भी टूर्नामेंट में खेलने से इनकार कर चुकी हैं, जिससे विवाद और बदलाव सामने आए.

दिल्ली: अब तो तय हो चुका है कि बांग्लादेश टीम जल्दी ही शुरु हो रहे टी20 वर्ल्ड कप में हिस्सा लेने भारत नहीं आ रही. वैसे ये कोई पहला मौका नहीं जब कोई टीम किसी तय सीरीज/टूर्नामेंट में हिस्सा नहीं ले रही. यहां तक कि आईसीसी टूर्नामेंट, जिनमें हिस्सा लेने का मौका किसी तरह से क्वालीफाई करने के बाद ही मिलता है, में भी खेलने से इनकार की मिसाल हैं. बहरहाल बांग्लादेश का इनकार और इससे बना विवाद सबसे ख़राब मिसाल है.

आईसीसी टूर्नामेंट में खेलने से इनकार के 5 किस्से

2025 चैंपियंस ट्रॉफी में खेलने से भारत का इनकार:

सबसे नया किस्सा है ये पर पहले से मालूम था कि पाकिस्तान में 2008 से न खेल रही, भारत की टीम इस टूर्नामेंट में खेलने पाकिस्तान नहीं जाएगी. भारत की तरफ से वजह बताई सरकार से मंज़ूरी न मिलना. रास्ता ये निकाला कि तय हुआ कि दोनों टीम तीन साल तक आईसीसी टूर्नामेंट में, हाइब्रिड मॉडल के अंतर्गत, एक-दूसरे के देश में न खेलकर अपने मैच न्यूट्रल ग्राउंड में खेलेंगे. भारत की टीम दुबई गई अपने मैच खेलने. इसीलिए 2026 टी20 वर्ल्ड कप के प्रोग्राम में भी पाकिस्तान को सभी मैच श्रीलंका में खेलने हैं.

    1996 वनडे वर्ल्ड कप में ऑस्ट्रेलिया और वेस्टइंडीज का कोलंबो में खेलने से इनकार:

    श्रीलंका तब भारत और पाकिस्तान के साथ संयुक्त मेजबान था पर प्रोग्राम ऐसा बना कि ऑस्ट्रेलिया और वेस्टइंडीज को एक-एक मैच कोलंबो में खेलना था. तब श्रीलंका में गृह युद्ध जैसे हालात थे और जब टूर्नामेंट से दो हफ्ते पहले वहां बम विस्फोट हुए तो इन दोनों टीम ने सुरक्षा पर चिंता के मुद्दे पर खेलने से इनकार कर दिया. प्रोग्राम में कोई बदलाव न हुआ, दोनों टीम ने मैच के पॉइंट गंवाए, जिसका फायदा श्रीलंका को मिला. मजे की बात ये कि श्रीलंका-ऑस्ट्रेलिया फाइनल हुआ पर लाहौर में.

    2016 अंडर 19 वर्ल्ड कप का ऑस्ट्रेलिया का बॉयकॉट:

    इसके आसार भी कई महीने पहले ही नजर आ गए थे. 2015 में, ऑस्ट्रेलिया की टीम मेजबान देश में सुरक्षा पर चिंता के चलते, तय सीरीज खेलने, बांग्लादेश न गई. तब संयोग से कुछ ही महीने बाद बांग्लादेश में अंडर-19 वर्ल्ड कप था. ऑस्ट्रेलिया ने कहा कि हालात वही है इसलिए उनका फैसला भी वही है. तब अपने लिए कोई अलग से मैचों का ट्रांसफर न मांगा (जैसा इस बार बांग्लादेश ने किया) और खेलने न आए. उनकी जगह आयरलैंड की टीम टूर्नामेंट में खेली.

    2003 वर्ल्ड कप में भी दो बॉयकॉट:

    लगभग वही हुआ जो 1996 में ऑस्ट्रेलिया और वेस्टइंडीज ने किया था. इस बार भी विरोध में वर्ल्ड कप के दो मैच न खेले गए. संयुक्त मेजबान जिम्बाब्वे में रॉबर्ट मुगाबे के शासन के तरीके के विरोध में इंग्लैंड ने हरारे में जिम्बाब्वे के विरुद्ध और नेरोबी (केन्या) में कुछ दिन पहले के बम धमाके से डर, न्यूजीलैंड ने केन्या से वहां मैच खेलने से इनकार कर दिया. वैसे इस बार इन दोनों टीम ने कहा था कि इनके मैच का वेन्यू बदल दो पर आईसीसी ने मना कर दिया. जिम्बाब्वे और केन्या को अपने-अपने मैच का वॉकओवर मिल गया. पॉइंट्स गंवाने का इंग्लैंड को बड़ा नुकसान हुआ जबकि केन्या फायदा उठा सेमी फ़ाइनल खेल गए.

    2009 टी20 वर्ल्ड कप में हिसाब बराबर हुआ पर अलग तरीके से:

    2003 का हिसाब बराबर करने का मौका था ज़िम्बाब्वे के पास क्योंकि टूर्नामेंट इंग्लैंड में था. उधर इंग्लैंड से खबर ये थी कि वे तो जिम्बाब्वे के खिलाड़ियों को टूर्नामेंट के लिए इंग्लैंड आने का वीजा ही नहीं देंगे. इस मामले ने आईसीसी को मुश्किल में डाल दिया. इस मुद्दे पर इंग्लैंड से टूर्नामेंट हटाने की नौबत आ गई थी. आखिर में समझौता हुआ और विश्व क्रिकेट को संकट से निकालने के लिए ज़िम्बाब्वे ने खुद ही टूर्नामेंट से नाम वापस ले लिया. बहरहाल, बिना खेले उन्हें, खेलने पर मिलने वाला पूरा पैसा मिला. उन की जगह स्कॉटलैंड की टीम खेली.