MS Dhoni Rohit Sharma Test
MS Dhoni Rohit Sharma Test

इन दिग्गजों को कभी नहीं मिला BCCI का बड़ा अवॉर्ड

BCCI हर साल इंटरनेशनल क्रिकेटर ऑफ द ईयर को पॉली उमरीगर अवॉर्ड देता है. इसकी शुरुआत 2007 में हुई थी और पहले विजेता सचिन तेंदुलकर बने थे. हैरानी की बात यह है कि एमएस धोनी, रोहित शर्मा, सौरव गांगुली, अनिल कुंबले और युवराज सिंह जैसे बड़े भारतीय दिग्गज अपने करियर में यह सम्मान नहीं जीत सके. उनके शानदार दौर में अन्य खिलाड़ियों के बेहतर प्रदर्शन ने यह अवॉर्ड उनसे छीन लिया.

दिल्ली: BCCI के सालाना अवार्ड की लिस्ट में हर सीजन के लिए ‘पॉली उमरीगर अवॉर्ड’ दिया जाता है ‘इंटरनेशनल क्रिकेटर ऑफ द ईयर’ को,  इंटरनेशनल क्रिकेट में उनके शानदार प्रदर्शन के लिए। ऐसे में ये अंदाजा तो लगाया जा सकता है कि टीम इंडिया के हर बड़े दिग्गज को किसी न किसी सीजन के लिए ये अवार्ड मिला होगा। इस अवॉर्ड की शुरुआत साल 2007 में हुई थी और सचिन तेंदुलकर इसके पहले विजेता थे। आपको ये जानकार हैरानी होगी कि कई बड़े खिलाड़ी ऐसे रह गए जिन्हें उनके इंटरनेशनल क्रिकेट जीवन के दौरान ये अवार्ड कभी मिला ही नहीं। 

ऐसा नहीं कि ये दिग्गज इस अवार्ड के लिए BCCI को पॉलिसी में फिट नहीं हुए। हुआ ये कि उनके बेहतर सालों में कोई और बाजी मार गया। BCCI ने ऐसी कोई पॉलिसी नहीं बनाई है कि एक खिलाड़ी को ये अवार्ड एक बार ही मिलेगा। विराट कोहली 5 बार ये अवार्ड ले गए तो किसी और का पत्ता तो कटा ही। जिन्हें ये अवार्ड न मिला वे अन्य सरकारी सम्मान तो पाते रहे लेकिन BCCI की चयन पॉलिसी में फिट न हुए। देखिए ये टॉप 5 नाम:

1. एमएस धोनी :

नाम पढ़कर ही विश्वास नहीं होगा। वे तो बल्लेबाज के साथ-साथ कप्तान के तौर पर भी इस अवार्ड के हकदार गिने जा सकते हैं। असल में हुआ ये कि भारत के इस सबसे कामयाब कप्तान में से एक का सबसे बेहतर दौर 2007 से 2011 को गिनेंगे और इन सालों में वे तुलना में सचिन तेंदुलकर और वीरेंद्र सहवाग से रिकॉर्ड में पीछे रह गए। ये दोनों गए, तब भी अवार्ड नहीं मिला क्योंकि विराट कोहली ढेरों रन बनाते रहे और विराट ने 2014-15 से 2017-18 तक लगातार 4 सीजन में ये अवार्ड जीता। इसीलिए आखिर में BCCI ने 2017 में BCCI का स्पेशल अवार्ड दिया धोनी को और सम्मानित किया। 

2. रोहित शर्मा : 

हिटमैन रोहित शर्मा ने तीन वनडे इंटरनेशनल 200 बनाए, एक वर्ल्ड कप (2019) में 5 शतक का रिकॉर्ड बनाया और भारत का ICC ट्रॉफी न जीतने का सूखा भी उन्हीं की कप्तानी में खत्म हुआ तब भी उन्हें BCCI ने कभी इंटरनेशनल क्रिकेटर ऑफ द ईयर का अवार्ड न दिया। रोहित के सबसे शानदार सीजन में कोई और टेस्ट में उनसे बेहतर प्रदर्शन से बाजी मार गया। यहां तक कि विराट क्या, अश्विन और बुमराह भी ये अवार्ड ले गए।

 3. सौरव गांगुली :

भारत के सबसे ज्यादा तारीफ पाने वाले कप्तान में से एक, सौरव गांगुली टेस्ट में अच्छे बल्लेबाज भी थे पर ये अवार्ड उन्हें न मिला। इसके लिए संभवतः एक बड़ी वजह ये भी कह सकते हैं कि जब सौरव अपने करियर के आख़िरी दौर में थे तब 2007 में इन अवॉर्ड्स की शुरुआत हुई। उनकी शानदार कप्तानी का दौर 2000 से 2005 तक का गिनते हैं। इसलिए चर्चा में होने के बावजूद सौरव गांगुली पीछे रह गए। सबसे पहले साल तेंदुलकर और दूसरे साल सहवाग ये अवार्ड ले गए। 

4. अनिल कुंबले :

जो सौरव गांगुली के साथ हुआ, लगभग वही भारत के लिए सबसे ज्यादा विकेट लेने वाले इस गेंदबाज़ (619 टेस्ट विकेट) के साथ हुआ। अवार्ड पहली बार 2006-07 सीजन के प्रदर्शन के लिए मिले और कुंबले 2008 में रिटायर हो गए थे। पहले दो साल क्रमशः सचिन तेंदुलकर और वीरेंद्र सहवाग ये अवार्ड ले गए। 

5. युवराज सिंह:

वे तो अवार्ड के सालों में भी खूब चमके पर उनके साथ दिक्कत ये रही कि वे टेस्ट की तुलना में वाइट बॉल क्रिकेट में ज्यादा चमके। 2007 टी20 वर्ल्ड कप और 2011 वनडे वर्ल्ड कप के वे हीरो रहे पर टेस्ट में ज्यादा नाम कमाने वाले BCCI का प्लेयर ऑफ़ द ईयर का अवार्ड लेते रहे। पहले दो सीजन के बाद, जिन अगले 4 सीजन में युवराज को ये अवार्ड मिल सकता था तो 2008-09 में गौतम गंभीर, 2009-10 में सचिन तेंदुलकर, 2010-11 में राहुल द्रविड़ और 2011-12 में विराट कोहली को ये अवार्ड मिला। 

अगर इसी चर्चा का दायरा और बढ़ाकर महिला क्रिकेट को भी देखें तो पिछले कई साल से भारत की कामयाब कप्तान और टॉप बल्लेबाज में से एक हरमनप्रीत कौर भी इसी तरह से अभाग्यशाली रही हैं। उनके करियर के शुरु के सालों में मिथाली राज का महिला क्रिकेट के अवार्ड पर दबदबा रहा। जब BCCI ने 2016–17 से इंटरनेशनल 

महिला क्रिकेटर का अवार्ड देना शुरु किया तो पहले सीजन में हरमनप्रीत विजेता थीं। उसके बाद इस अवार्ड पर स्मृति मंधाना का ऐसा दबदबा बना कि हरमनप्रीत तुलना में पीछे रह गईं। 2017–18, 2020–21, 2021–2022, 2023–24 और 2024–25 में स्मृति मंधाना, 2018–19 में पूनम यादव, 2019–20 और 2022–23 में दीप्ति शर्मा को ये अवार्ड मिला। फिर भी हरमन को ये तसल्ली तो होगी कि उन्हें एक बार ये अवार्ड मिला है जबकि धोनी, रोहित शर्मा और युवराज जैसे बड़े नाम लिस्ट में न आ पाए।