यूसुफ पठान सभी तरह के क्रिकेट से रिटायर हो गए हैं। 2007 और 2012 के बीच 57 वन डे और 22 टी20 अंतर्राष्ट्रीय खेले, जिन 2007 टी20 वर्ल्ड कप के साथ-साथ 2011 वन डे वर्ल्ड कप जीत ने भारत में सफ़ेद गेंद वाले क्रिकेट के आधुनिक युग की शुरूआत की. वे इन दोनों में भारत के चैंपियन बनने का हिस्सा थे। कोई टेस्ट नहीं खेले।  

लिस्ट ए क्रिकेट में, इस दाएं हाथ के क्रिकेटर के 199 मैचों में 4797 रन और 124 विकेट, 22 टी20 आई में 146.58 स्ट्राइक रेट से 236 रन और 13 विकेट तथा 57 वन डे में 113.60 स्ट्राइक रेट से 810 रन और 33 विकेट। दिसंबर 2010 में न्यूजीलैंड के खिलाफ वन डे में जीत में 96 गेंदों में 123* रन उनके करियर के सबसे शानदार प्रदर्शन में से एक है।  

इसी तरह आईपीएल में कोलकाता नाइट राइडर्स (चैंपियन 2012, 2014) और राजस्थान रॉयल्स (चैंपियन 2008) की कामयाबी का ख़ास हिस्सा थे। आईपीएल में 174 मैच और तीन आईपीएल टाइटल जीतने वाले पहले क्रिकेटर बने थे। मुंबई इंडियंस के विरुद्ध 2010 सीजन में यूसुफ पठान का 37 गेंद में शतक अभी भी टूर्नामेंट के इतिहास में दूसरा और भारतीय क्रिकेटर का सबसे तेज शतक है। आखिरी बार 2019 में सनराइजर्स हैदराबाद के लिए खेले थे।  

ये सब बता देता है कि जिन सालों में, ख़ास तौर पर टी20 क्रिकेट को लोकप्रियता के लिए ख़ास तरह के क्रिकेटरों की जरूरत थी, तो ऐसे में यूसुफ उस भूमिका में फिट थे। फिर भी आज टी20 आई या आईपीएल के सर्वकालीन टॉप क्रिकेटरों की लिस्ट बनाएं तो उसमें उनका नाम फिट करने में बड़ी मुश्किल आएगी। यहां तक कि आईपीएल 2020 सीजन के लिए जब सनराइजर्स हैदराबाद ने उन्हें रिलीज कर दिया था तो नीलामी में और किसी टीम ने नहीं खरीदा।
 
वे आगे रोड सेफ्टी वर्ल्ड सीरीज में खेलें या श्रीलंका में प्रीमियर लीग में पर सच ये है कि आज टी20 क्रिकेट में, जिन खूबियों वाले क्रिकेटर की जरूरत है वे उसमें पूरी तरह फिट थे. टॉप क्रिकेट फॉर्म में उनकी, जो कद्र आज होती, पहले नहीं हुई। डेक्कन चार्जर्स के खिलाफ आईपीएल के पहले सीज़न में 21 गेंद पर सबसे तेज़ 50 और फाइनल में शानदार ऑलराउंड प्रदर्शन (3-22 एवं 39 गेंद में 56) राजस्थान रॉयल्स की कामयाबी का हिस्सा थे, जब भी ग्राउंड पर कदम रखा तो लगा कुछ ख़ास होगा – सलीम दुर्रानी वाले प्रभाव जैसा। आज टीम इंडिया को अपनी सफेद गेंद लाइन अप में ऐसे ही क्रिकेटर की जरूरत है।

2007 में टी20 वर्ल्ड कप फाइनल में यूसुफ ने पहले ही ओवर से दिखाया कि कैसे खेलना है। उस समय भारत के क्रिकेटर वास्तव में टी 20 में खेलने के गुर सीख रहे थे। 2007 टी 20 वर्ल्ड कप और 2011 वन डे वर्ल्ड कप जीत ने एम एस धोनी को जो जगह दिलाई उसका कोई जवाब नहीं है, पर कौन याद रखता है कि धोनी खुश किस्मत थे कि उनके पास युसूफ थे, जिस दिन युसूफ ने अपना आख़िरी टी20 आई खेला (30 मार्च 2012), उनके नाम 236 रन और 13 विकेट थे और अगर कम से कम 200 रन एवं 10 विकेट का योग्यता स्तर तय कर दें तो उस दिन तक सिर्फ 21 खिलाड़ी इस रिकॉर्ड के क्लब के लिए क्वालीफाई करते थे और इनमें से अकेले भारतीय यूसुफ़ पठान ही थे। मिडिल आर्डर में तेज रन बनाने की जरूरत में यूसुफ़ ने अपने रिकॉर्ड की कभी चिंता नहीं की।  

हर खिलाड़ी के दिन आते हैं और बीत भी जाते हैं। आईपीएल 2020 नीलामी में किसी ने नहीं खरीदा। इस साल बड़ौदा ने सैयद मुश्ताक अली ट्रॉफी टीम में जगह नहीं दी। इसलिए उन्हें एहसास हो गया था कि करियर के बारे में फैसला लेना है। वे चैंपियन मेटेरियल थे और टीमों को चैंपियन बनाया। 

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