लॉकडाउन के दिनों में, फुरसत का फायदा उठाकर, विशेषज्ञ और क्रिकेटर तरह-तरह की चर्चाओं में लगे रहे और इन्हीं में से एक मजेदार चर्चा थी दादा गांगुली और विराट कोहली की टीम की तुलना। उसी चर्चा ने फिर अलग भूमिका के क्रिकेटरों की आपसी तुलना की शक्ल ले ली। इस बात पर सभी सहमत हैं कि जिस तरह से दादा की टीम में बल्लेबाज़ी का पिलर तेंदुलकर थे, वैसे ही अब कोहली बल्लेबाज़ी का पिलर हैं और उन्हें 'आज के तेंदुलकर' का टाइटल देने का विरोध कोई नहीं करेगा। वे तेंदुलकर हो गए तो द्रविड़ और गांगुली जैसी बड़ी भूमिका निभाने वाले क्रिकेटर कौन से हैं आज? ये बात तय है कि ऐसी चर्चा में सिर्फ टेस्ट क्रिकेट को ही आधार बनाना होगा।

गांगुली की टीम की बल्लेबाज़ी में मजबूती इस बात में थी कि मिडिल ऑर्डर में एक साथ तेंदुलकर, द्रविड़, गांगुली और लक्ष्मण जैसे बल्लेबाज़ थे। कोहली की टीम में अगर कोई द्रविड़ जैसी मजबूती और टीम को आधार देने वाला बल्लेबाज़ नज़र आया तो वे चेतेश्वर पुजारा हैं और उन्हें ही मौजूदा टीम का 'द वॉल ' क्रिकेटर कहा जा सकता है. हालांकि, पुजारा को खुद भी मालूम होगा कि अभी कितना लंबा सफर तय करना है। द्रविड़ ने 164 टेस्ट में 13288 रन बनाए 36 स्कोर 100 वाले बनाकर। पुजारा इसकी तुलना में अभी 77  टेस्ट खेले हैं, जिनमें 5840 रन बनाए 100 वाले 18 स्कोर के साथ, जब द्रविड़ ने पुजारा के बराबर 77 टेस्ट खेले थे तो उनका रिकॉर्ड 6585 रन था 16 शतक के साथ। शतक की गिनती में पुजारा आगे और रन की गिनती में द्रविड़ आगे। इतना तय है कि दोनों टीम को संकट से निकालने की उम्मीद वाले बल्लेबाज़। द्रविड़ साथ में 344 वन डे इंटरनेशनल खेल गए, जबकि पुजारा पर तो लाल गेंद वाली क्रिकेट के क्रिकेटर का ऐसा लेबल लगा कि वे तो सिर्फ 5 वन डे इंटरनेशनल खेल पाए। टी20 का तो जिक्र ही बेकार है।

आज मिडिल ऑर्डर में भरोसे के लिए टीम अजिंक्य रहाणे की तरफ देखती है। मजे की बात है कि एक बेहतरीन बल्लेबाज़ होते हुए जिस तरह गांगुली की बल्लेबाज़ी को सबसे कम चर्चा मिली, वही बात रहाणे के साथ है और उन्हें तो उपकप्तान होने के बावजूद टीम से निकाला भी गया। वे आज के गांगुली हैं। गांगुली ने 113 टेस्ट में 7212 रन बनाए 16 स्कोर 100 वाले बनाकर। रहाणे ने तुलना में 65  टेस्ट में 4203 रन बनाए हैं 11 स्कोर 100 वाले बनाकर, जब गांगुली ने रहाणे के बराबर 65 टेस्ट खेले थे तो उनका रिकॉर्ड 4071 रन था 9 शतक के साथ यानी कि रन और शतक दोनों की गिनती में रहाणे का रिकॉर्ड उनसे बेहतर। साथ में वन डे इंटरनेशनल में गांगुली  जहां एक ख़ास नाम थे. वहीँ, 90 वन डे इंटरनेशनल खेलने के बावजूद रहाणे इस तरह की क्रिकेट में अपनी पहचान की लड़ाई लड़ रहे हैं।

टीम में योगदान को एक अलग तरह से देखिए। अपने लंबे करियर में द्रविड़ और गांगुली 113 टेस्ट में साथ-साथ खेले और इनमें टीम के बल्लेबाज़ों के बैट से बने कुल 57402 रन में से द्रविड़ और गांगुली का मिलाकर योगदान 16354 रन था यानि कि 35.10 प्रतिशत और ये कमाल का योगदान है। आपको ये जानकर हैरानी होगी कि पुजारा-रहाणे योगदान भी किसी भी तरह से कम नहीं है। ये दोनों 59 टेस्ट साथ-साथ खेले और उनमें टीम के बल्लेबाज़ों के कुल 30311 रन में इन दोनों के बैट से 8310 रन बने यानी कि 36.48 प्रतिशत रन। इससे अपने आप पता लग जाता है कि ये बल्लेबाज़ टीम के लिए क्या भूमिका निभाते रहे।

इसलिए आज की टीम में द्रविड़ और गांगुली जैसी भूमिका निभाने वाले क्रिकेटर चेतेश्वर पुजारा और अजिंक्य रहाणे ही हैं और संयोग ये कि द्रविड़ और गांगुली के बेहतरीन दौर में टी 20 क्रिकेट थी नहीं और चेतेश्वर पुजारा एवं अजिंक्य रहाणे इस तरह की क्रिकेट में अपनी पहचान की लड़ाई लड़ते आ रहे हैं।
 

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