जब ब्रायन लारा ने अपनी एतिहासिक पारी में 500वां रन बनाया था तो विश्वास नहीं हुआ था कि कोई बल्लेबाज एक पारी में 500 रन बना सकता है। इसी तरह इस रिकॉर्ड पर भी आसानी से विश्वास नहीं होता कि वेस्टइंडीज के कायरोन पोलार्ड ने 500 मैच खेल लिए हैं टी-20 वाले। 4 मार्च को श्रीलंका के विरूद्ध पालेकेले में पहला टी-20 अंतर्राष्ट्रीय खेला तो वे 500 मैच की गिनती पर पहुंचे और ये रिकॉर्ड बनाने वाले पहले क्रिकेटर बने।

500 ऐसे मैच खेलने वाले पहले क्रिकेटर जरूर बने हैं पर इस क्लब में ज्यादा दिन अकेले नहीं रहेंगे। ड्वेन ब्रावो 454, क्रिस गेल 404 और शोएब मलिक 382 मैच खेल चुके हैं और जिस तरह मशीन बनकर ये क्रिकेटर दुनिया की कई अलग-अलग लीग में खेलते नजर आते हैं, इनके लिए भी इस गिनती पर पहुंचना कोई असंभव नहीं है।

वैसे कोई मजाक नहीं है पोलार्ड का टी 20 में 500 मैच खेलना और जिस तरह अभी वे लगातार खेल रहे हैं तो जब अन्य दूसरे 500 मैच पर पहुंचेंगे, ये 600 मैच के रिकॉर्ड के दावेदार होंगे। ये कैसे संभव हुआ कि वे 500 मैच खेल गए? कैसे मिल गया उन्हें इतने मैच खेलने का मौका?

असल में इसके लिए वे खुद तारीफ के हकदार या यूं कह लीजिए कि जिम्मेदार हैं। पोलार्ड ने जो सोचा, वह उस समय तक किसी ने नहीं सोचा था। उन हालात में पोलार्ड की सोच के पीछे कोई बहुत बेहतर माहौल भी नहीं था।

अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट की दुनिया को पोलार्ड का परिचय मिला वनडे में 10 अप्रैल 2007 और टी 20 में 20 जून 2008 को। एक क्रिकेटर के तौर पर करियर 25 जुलाई 2006 को शुरू हो गया था स्टेनफोर्ड टूर्नामेंट में। वहीं से ये नजर आ गया था कि वे तो सफेद गेंद की क्रिकेट में हिटर हैं और क्रिकेट में टी 20 की बदौलत आ रही क्रांति में उन क्रिकेटरों में से एक जो इसे कामयाब और लोकप्रिय बनाएंगे। उनके चौके-छक्के देखने भीड़ जुटने लगी। अगर उनके वेस्टइंडीज करियर को भी देख लें तो यही पता लगता है। 2007 में वन डे और 2008 में टी 20 में खेलना शुरू कर दिया था पर वेस्टइंडीज ने उन्हें आज तक एक भी टेस्ट में नहीं खिलाया है।

पोलार्ड पर टी 20 और वनडे क्रिकेटर का ऐसा लेबल लगा कि उन्हें भी अहसास हो गया कि इसी में उनका करियर है। धीरे धीरे टी 20 की पेशेवर लीग बढ़ने लगी। इन्हीं में से एक आईपीएल है। हर लीग में खेलने के लिए, वेस्टइंडीज के सेंट्रल कॉन्ट्रैक्ट से बंधे होने के कारण, वेस्टइंडीज बोर्ड से एनओसी लेना जरूरी था। इतना ही नहीं वेस्टइंडीज टीम का प्रोग्राम भी मनमर्जी से खेलने से रोकता था। तंग पोलार्ड ने वह फैसला लिया जो उनसे पहले किसी ने नहीं लिया था।

खुद को पेशेवर क्रिकेटर घोषित किया और वेस्टइंडीज बोर्ड के सेंट्रल कॉन्ट्रैक्ट को बाय-बाय कर दिया। तब ढेरों लीग नहीं थीं पर पोलार्ड को इसी में अपना आने वाला कल दिखाई दिया। आज जो खिलाड़ी सेंट्रल कॉन्ट्रैक्ट छोड़कर ‘आजाद’ हो रहे हैं, उस परंपरा की शुरूआत पोलार्ड ने ही की थी। वे वेस्टइंडीज के लिए कॉन्ट्रैक्ट छोड़कर भी उपलब्ध थे पर अब ‘बंधुआ’ की तरह से नहीं।

वे इसी वजह से 17 टीम के लिए खेल पाए। वेस्टइंडीज के लिए अंतर्राष्ट्रीय मैच खेलने के अतिरिक्त कैरेबियन में बारबेडास ट्राइडेंट्स, सेंट लूशिया, स्टेनफोर्ड सुपरस्टार्स, त्रिनबेगो नाइट राइडर्स तथा त्रिनिदाद एवं टोबेगो, ऑस्ट्रेलिया में एडिलेड स्ट्राइकर्स, मेलबर्न रेनेगेड्स तथा दक्षिण ऑस्ट्रेलिया, दक्षिण अफ्रीका में केप कोबराज, बांग्लादेश में ढाका डाइनेमाइट्स तथा ढाका ग्लेडिएटर्स, पाकिस्तान सुपर लीग में कराची किंग्स, मुलतान सुल्तांस तथा पेशावर ज़ाल्मी, इंग्लैंड में समरसैट और आईपीएल में मुंबई इंडियंस के लिए खेल चुके हैं।

उनके आईपीएल करियर से ही पता लग जाएगा कि टी 20 में उनकी जगह क्या है? 2010 के नीलाम में चार टीम उनके लिए अधिकतम 7.50 लाख डॉलर की बोली तक पहुंच गई थीं। हर किसी को उनकी जरूरत थी। ट्राई ब्रेकर में मुंबई इंडियंस वाले उन्हें ले गए और तब से छोड़ा नहीं है।

इन 500 टी 20 मैच में पोलार्ड के 10 हजार रन (ये रिकॉर्ड बनाने वाले सिर्फ दूसरे क्रिकेटर), साथ में 279 विकेट, 652 छक्के (इससे ज्यादा – क्रिस गेल 978) और 647 चौके अपने आप में खास हैं। पिच पर बैट हाथ में पकड़े पोलार्ड की मौजूदगी किसी दर्जे के गेंदबाज को यह सोचने पर मजबूर कर देगी कि अब पता नहीं क्या होने वाला है?

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