भारतीय टीम के पूर्व विकेटकीपर बल्लेबाज फारुख इंजीनियर ने इस पर प्रतिक्रिया दी है।

इंग्लैंड के तेज गेंदबाज ओली रॉबिन्सन को उनके 8 साल पुराने नस्लवाद के ट्वीट के लिए इंग्लैंड एंड वेल्स क्रिकेट बोर्ड ने उन्हें अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट से निलंबित कर दिया, जिसके बाद क्रिकेट जगत में इसको लेकर चर्चा फिर से शुरू हो गई है। इसी बीच भारतीय टीम के पूर्व विकेटकीपर बल्लेबाज फारुख इंजीनियर ने इस पर प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा है कि इंग्लैंड एंड वेल्स क्रिकेट बोर्ड का यह फैसला बिलकुल सही है। रॉबिन्सन ने गलती की, जिसकी उन्हें सजा मिली और यह दूसरे खिलाड़ियों के लिए एक अच्छा उदाहरण बन सकता है।

83 साल के पूर्व भारतीय क्रिकेटर ने द इंडियन एक्सप्रेस को दिए इंटरव्यू में नस्लवाद को लेकर अपने अनुभव के बारे में बात करते हुए कहा, “जब मैं पहली बार काउंटी क्रिकेट खेलने यहां आया तो लोगों ने मुझे अलग नज़र से देखते हुए कहा था कि ये तो भारत से आया है। मैंने एक दो बार लैंकशर की तरफ से खेलते हुए नस्लीय टिप्पणियों का सामना किया था। हालांकि, टिप्पणियां व्यक्तिगत नहीं होती थी। मुझे सिर्फ इसलिए निशाना बनाया जाता था, क्योंकि मैं भारत से आया था और मेरे बोलने का दंग उनसे अलग था।”

फारुख इंजीनियर ने आगे कहा, “मुझे लगता है कि मेरी अंग्रेजी वास्तव में अधिकतर अंग्रेजों से बेहतर है, इसलिए जल्द ही उन्हें इस बात का एहसास हुआ कि आप फारुख इंजीनियर के साथ खिलवाड़ नहीं करते हैं। उन्हें मैसेज मिल गया था। मैंने उन्हें जोरदार जवाब दिया था। इतना ही नहीं मैंने खुद को बल्ले और विकेटकीपिंग से साबित किया। मुझे बस गर्व था कि मैंने भारत के एक नुमाइंदे के तौर पर खुद को रखा औऱ देश की साख बढ़ाने का काम किया।”

हाल ही में इंजीनियर ने कॉमेडियन साइरस ब्रोचा के साथ एक पॉडकास्ट में बातचीत करते हुए खुलासा किया था कि कैसे भारतीय खिलाड़ियों को अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट में नस्लवाद का सामना करना पड़ता है। उन्होंने कहा कि इंग्लैंड के पूर्व कप्तान ज्योफ बॉयकॉट ने कमेंट्री के दौरान ब्लडी इंडियंस’ जैसे शब्दों का उपयोग किया था। हालांकि, आईपीएल ने सब कुछ बदल दिया है। अब इंग्लैंड के खिलाड़ी ऐसा करने की गलती नहीं करते हैं।

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