भारतीय क्रिकेट टीम के विकेटकीपर बल्लेबाज दिनेश कार्तिक का करियर काफी उतार-चढ़ाव भरा रहा। दिनेश कार्तिक ने भारतीय टीम के लिए साल 2004 में डेब्यू किया जिसके बाद से वो लगातार सक्रिय तो रहे, लेकिन नेशनल टीम के लिए किश्तों में खेले। यानि उन्हें लगातार खेलने का मौका कभी ना मिल पाया। दिनेश कार्तिक ने जब डेब्यू क्या उस दौरान महेन्द्र सिंह धोनी जहां रणजी ट्रॉफी खेलते नजर आ रहे थे तो वहीं ऋषभ पंत तो महज 7 साल के थे। ऐसे में कार्तिक अनुभव के मामले में आगे तो हैं लेकिन इन दोनों ही विकेटकीपर ने कार्तिक के सामने मुश्किलें पैदा कीं।

जो भी हो लेकिन आखिरकार कार्तिक का अनुभव काम आया और यही वजह है कि उन्हें विश्व कप टीम में रिजर्व विकेटकीपर के तौर पर शामिल किया गया है। कार्तिक ने इस दौड़ में शामिल ऋषभ पंत को पीछे छोड़ते हुए उनका विश्व कप खेलने का सपना तोड़ दिया।

ऋषभ पंत के विश्व कप टीम में नहीं चुने जाने पर दिनेश कार्तिक ने भी उनके प्रति सहानुभूति दिखाई है। कार्तिक ने कहा कि “हमेशा कोई एक ऐसा व्यक्ति होगा जिसे चूकना होगा। ये इस खेल की नेचुरलिटी है। लेकिन हमने इस बारे में बात नहीं की। वो अपने अवसरों को जानते हैं इसलिए मैं भी उसी तरह था। जब वो चुने जाते तो मैं निराश होता और जब मुझे चुना गया तो मुझे यकिन है वो भी निराश हुए हैं।”

पंत की तारीफ करते हुए कार्तिक ने कहा,”पंत एक स्पेशल खिलाड़ी हैं। मुझे लगता है कि वो लंबे समय तक भारत के लिए खेलने जा रहे हैं। अगर मैं धोनी के साथ खेल सकता हूं तो हम दो भी विश्व कप के बाद ड्रेसिंग रूम को शेयर कर सकते हैं। एक तरह से दिनेश कार्तिक का इशारा महेंद्र सिंह धोनी के संन्यास लेने की ओर था।

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