भारत की महिला क्रिकेट टीम भी ग्राउंड में लौट आई। अपनी ही पिचों पर सीरीज खेली दक्षिण अफ्रीका से पर हारे – वन डे में 4-1 से और टी20 में 2-1 से, जब वन डे सीरीज में एक के बाद एक मैच हार रहे थे तो ये सवाल हर किसी ने पूछा- टीम में शेफाली क्यों नहीं है? शेफाली ने बहरहाल टी20 सीरीज खेली और उसमें भारत ने, जो एकमात्र मैच जीता उसकी स्टार यही शफाली थी। शेफाली ने सीरीज में 23,47 और 60 के स्कोर बनाए, जो 60 बनाए वे कोई मामूली नहीं थे, सिर्फ 26 गेंद में अपने तीसरे टी20 आई में 50 पूरे किए और ये किसी भी भारतीय महिला बल्लेबाज का तीसरा सबसे तेज 50 है। 60 रन बनाकर, जब वह आउट हुई तो सिर्फ 30 गेंद खेलीं थीं. तब भारत का स्कोर 9 ओवर में 99/1 था और मंधाना जैसी बल्लेबाज़ 35* पर थी।

दक्षिण अफ़्रीकी कप्तान सुन लूज हैरान रह गईं उसके स्ट्रोक देखकर और बोलीं, “उसे रोक पाना बड़ा मुश्किल है। मुझे पूरा भरोसा है ये लड़की इस खेल की एक लेजेंड बनेगी।” इतना ही नहीं इसी सीरीज के दौरान शफाली ICC T20 रैंकिंग में टॉप बल्लेबाज़ बन गई – ऑस्ट्रेलिया की बेथ मूने को पीछे छोड़कर। प्लेयर ऑफ़ सीरीज भी वही थीं।

इतना सब कुछ और अभी उम्र 18 साल भी नहीं- 22 टी 20 आई में 617 रन बनाए हैं 148.31 SR से। देखिए :

  • अगर कम से कम 600 रन बनाने वालों का रिकॉर्ड देखें तो वे अकेली हैं जिनका SR 140+ है। दूसरे नंबर पर दक्षिण अफ्रीका की ट्रायन (139.67) हैं।
  • अगर कम से कम 22 मैच खेलने वालों का रिकॉर्ड देखें तो सिर्फ भारत की राजेश्वरी गायकवाड़ का SR उनसे बेहतर (150) है।
  • करियर के पहले 22 मैच में सिर्फ इंग्लैंड की चेरलट एडवर्ड्स के नाम उनसे ज्यादा रन (676) हैं।

क्या ये तीनों रिकॉर्ड यह नहीं बता देते की जो दक्षिण अफ्रीकी कप्तान ने कहा वह होना बहुत मुश्किल नहीं है, जो भारत की महिला क्रिकेट को नज़दीक से देखते हैं वे उन्हें ‘वीरेंद्र सहवाग’ कहते हैं। अटैकिंग बल्लेबाजी तो मानो उनके लिए एक आम बात है, “मैं हमेशा पॉवर-हिटिंग करती हूं और अपनी बल्लेबाजी पर कड़ी मेहनत करती हूं, जब से मैंने बैट पकड़ना शुरू किया है, मुझे अटैकिंग खेलना ही पसंद है.” जब वह सिर्फ 15 साल की थी और क्रिकेट में उनके नाम की चर्चा शुरू हुई थी तो उनके पिता संजीव वर्मा ने तब ही कह दिया था- “ बहुत हैं जो 100 गेंद मैं 50,70 और 80 मारेंगे।अगर एक लाख लड़कियां खेलती हैं क्रिकेट तो उसमें से नब्बे हज़ार ऐसे होंगे।अगर उनसे आगे निकलना है तो अच्छे स्ट्राइक रेट से ढेरों रन बनाने पड़ेंगे।’

शेफाली ने अपने पिता की ये बात पल्लू से बांध ली। लड़कों के साथ खेलते हुए अगर सर से हेलमेट उड़ा तो डरी नहीं और अगर इंटरनेशनल मैचों में सामने टॉप तेज गेंदबाज़ थी तो भी नहीं डरी। ये भी उनकी हिम्मत का ही सबूत है कि सिर्फ 2019 में इंटरनेशनल क्रिकेट में आने के बावजूद ये कह दिया है कि लड़कियों को पुरुष क्रिकेटरों के बराबर मैच फीस क्यों नहीं मिलती ? इसीलिए टीम उन्हें ‘टॉम बॉय’ स्टार कहती है।

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