rahul dravid
द्रविड़ की कोचिंग के 8 महीनों में बन चुके हैं इतने कप्तान, तो कैसे मिलेगा टीम को सही कॉम्बिनेशन?

भारतीय (India) क्रिकेट टीम में पिछले कई सालों से महान बल्लेबाज रहे राहुल द्रविड़ को कोच बनाए जाने की मांग उठती रही थी। भारत के जूनियर खिलाड़ियों की प्रतिभा की पहचान करने वाले राहुल द्रविड़ को सीनियर टीम के मुख्य कोच पर स्थापित करने की चर्चा होती रही। आखिरकार तमाम मांग और चर्चा के बीच राहुल द्रविड़ को पिछले साल भारतीय टीम के मुख्य कोच के रूप में नियुक्त किया गया।

‘दीवार’ के नाम से विख्यात रहे राहुल द्रविड़ के टीम इंडिया के कोच बनने के बाद माना जाने लगा था कि अब टीम सही व्यक्ति के हाथ में है, जहां टीम को आने वाले टी20 विश्व कप, वनडे विश्व कप के साथ ही टेस्ट चैंपियनशिप के लिए सही कॉम्बिनेशन मिल जाएगा।

राहुल द्रविड़ के कोच बनने के बाद बहुत ही उम्मीद की जा रही थी, लेकिन उनके कोचिंग कार्यकाल के केवल 8 महीनों में टीम इंडिया का प्रदर्शन वैसा नहीं रहा है, जैसा हर किसी ने सोचा था, उनके मार्गदर्शन में अब तक टीम का मिला-जुला प्रदर्शन ही रहा है।

कुछ ही महीनों के बाद टी20 विश्व कप खेला जाना है, तो अगले साल वनडे विश्व कप भी आने वाला है, लेकिन भारतीय टीम राहुल द्रविड़ की कोचिंग में कप्तानी को लेकर इतनी ज्यादा उलझी हुई है कि एक सही कॉम्बिनेशन को भी हासिल नहीं कर पा रही है साथ ही एक अच्छी रणनीति भी नहीं बन पा रही है।

द्रविड़ ने पिछले साल टी20 विश्व कप के बाद कोच के रूप में टीम की बागडौर संभाली, इसके बाद से टीम में कप्तानी को लेकर जो बदलाव देखने को मिले हैं, उसे किसी ने सपने में भी नहीं सोचा था। भारत के इस दिग्गज खिलाड़ी के कोचिंग कार्यकाल के 8 महीनों में ही टीम ने 8 कप्तानों को देख लिया है। द्रविड़ के कोचिंग कार्यकाल में रोहित शर्मा के साथ शुरुआत की, जिसके बाद टेस्ट फॉर्मेट में विराट कोहली के साथ काम किया। विराट कोहली के टेस्ट फॉर्मेट में भी कप्तानी से इस्तीफा देने के बाद उन्हें रोहित शर्मा की गैरहाजिरी में अजिंक्य रहाणे के साथ खेलना पड़ा।

भारत ने इसी साल कई कप्तान बदल डाले हैं। वैसे रोहित शर्मा टीम के लिए तीनों ही फॉर्मेट में रेगुलर कप्तान नियुक्त किए गए हैं, लेकिन रोहित शर्मा के फिटनेस समस्या या आराम देने के चलते मुख्य कोच को अलग-अलग कप्तानों के साथ खेलना पड़ रहा है। जिसमें केएल राहुल, ऋषभ पंत, कप्तान बने। इसके बाद आयरलैंड के दौरे पर हार्दिक पंड्या को कप्तान बना दिया गया, हालांकि उस दौरे पर द्रविड़ नहीं बल्कि वीवीएस लक्ष्मण कार्यवाहक कोच रहे, लेकिन हार्दिक पंड्या की कप्तानी को भी द्रविड़ के कोचिंग कार्यकाल का ही हिस्सा माना जाएगा।

भारत को इंग्लैंड के खिलाफ रिशेड्यूल टेस्ट सीरीज में फिर से कप्तानी में बदलाव करना पड़ा, जहां कप्तान रोहित शर्मा के कोरोना होने के चलते तेज गेंदबाज जसप्रीत बुमराह कप्तान बने। इसके बाद बुधवार को वेस्टइंडीज दौरे के लिए टीम का चयन किया गया, जहां इन तमाम खिलाड़ियों को आराम देने के कारण शिखर धवन को कप्तान बना दिया गया है।

इस तरह से द्रविड़ के एक छोटे से कोचिंग कार्यकाल में 8 अलग-अलग कप्तान बन चुके हैं। कप्तानी बदलने से इसे एक पॉजिटिव रूप में देखा जाए तो ये कहा जा सकता है कि भारत के लिए भविष्य के कप्तान तैयार हो रहे हैं, लेकिन सही मायनों में इससे भारी नुकसान हो रहा है, क्योंकि आगामी महीनों में भारत को कुछ बड़े टूर्नामेंट्स खेलने हैं, ऐसे में एक कोच के साथ एक ही कप्तान होने से रणनीति बनाने में काफी आसानी हो जाती है, लेकिन द्रविड़ को 8 महीनों के भीतर ही 7 कप्तानों से रणनीति तैयार करनी पड़ी है, और अब 8वें कप्तान के रूप में शिखर धवन तैयार हैं।

इस तरह कहा जा सकता है कि राहुल द्रविड़ को अलग-अलग कप्तानों के साथ खेलना पड़ रहा है, जिससे टीम के प्रदर्शन पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है, लिहाजा बीसीसीआई को कप्तान बदलने का ट्रेंड थामना होगा। जिससे द्रविड़ को सही कॉम्बिनेशन और रणनीति बनाने के लिए समय मिल सके।

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