मेलबर्न क्रिकेट ग्राउंड में जारी मैच
क्या क्रिकेट की लोकप्रियता सच में कम हो रही है?

मंगलवार को क्रिकेट के दो सबसे बड़े चिर प्रतिद्वंदी ऑस्ट्रेलिया (Australia) और इंग्लैंड (England) के बीच तीन एकदिवसीय मुकाबलों की सीरीज का आखिरी मैच खेला गया। इस मैच में खिलाड़ियों ने कई बड़े रिकॉर्ड स्थापित किए, तो कई रिकॉर्ड तोड़े। मगर इन सबको देखने के लिए स्टेडियम में फैंस मौजूद नहीं थे। इस मैच के दौरान मेलबर्न क्रिकेट ग्राउंड (Melbourne Cricket Ground) की एक लाख से अधिक सीटें खाली नजर आई। स्टैंड्स में कुछ सुरक्षाकर्मियों और मैच आयोजकों के अलावा महज कुछ एक फैंस टहलते हुए दिखाई दिए। ऐसे में क्रिकेट के भविष्य पर एक बड़ा प्रश्नवाचक चिन्ह लग जाता है। क्या क्रिकेट का भविष्य सच में संकट में हैं?

द न्यूयॉर्क टाइम्स की एक रिपोर्ट के मुताबिक, क्रिकेट विश्व का दूसरा सबसे लोकप्रिय खेल है। लोकप्रियता को परिभाषित करने का पैमाना इसके प्रशंसकों की संख्या या उन देशों की संख्या हो सकती है, जहां यह खेल पसंद किया जाता है। क्रिकेट भारत, पाकिस्तान और बांग्लादेश जैसे दक्षिण एशियाई देशों में लोकप्रिय है, जहां दुनिया की आबादी का एक बड़ा हिस्सा है। मगर, जब आप क्रिकेट की वैश्विक जागरूकता पर बात करें, तो इसका उत्तर आपको निराश कर सकता है।

उदाहरण के लिए आप नीदरलैंड्स को ले लीजिए। कुछ समय पहले भारत और नीदरलैंड्स के बीच मुकाबले के प्री-शो के दौरान स्थानीय निवासियों पर हुए सर्वे के बारे में बताया गया था। आश्चर्यजनक रूप से वहां का स्थानीय खेल तथाकथित विश्व के दूसरे सबसे लोकप्रिय खेल की तुलना में अधिक पसंद किया गया था। यह हाल तब है, जब नीदरलैंड काउंटी-क्रिकेट खेलने वाले इंग्लैंड का पड़ोसी है और यह देश आईसीसी के कई बड़े आयोजनों में भी खेल चुका है। ऐसे ही कुछ संकेत हैं, जो बताते हैं कि क्रिकेट का खेल फीका पड़ रहा है, खासकर टेस्ट और एकदिवसीय प्रारूप।

हार्दिक ने रोहित की कप्तानी का भांडा फोड़ा – VIDEO

पिछले कुछ समय में तो खुद पूर्व क्रिकटर ने भी माना है कि वनडे प्रारूप काफी बोरिंग हो चुका है और अब इसे निरस्त कर देना चाहिए। इसके पीछे कारण टी20 फॉर्मेट को बताया गया, जोकि आज कि भागदौड़ भरी जिंदगी में क्रिकेट फैंस को कम समय में भरपूर आनंद दे रहा है।

इसके अलावा फैंस अब लंबे मैच देखने में रूचि नहीं दिखा रहे हैं। 90 और 21वीं सदी के पहले दशक में क्रिकेट को एक त्यौहार की तरह सेलिब्रेट किया जाता था, क्योंकि लोग सचिन, गिलक्रिस्ट, गांगुली, वार्न, संगकारा, ब्रेट ली, मलिंगा, सहवाग, द्रविड़, युवराज जैसे खेल के दिग्गजों को देखकर ही बड़े हुए थे। एक के बाद एक वे रिटायर होने लगे और लोग नए खिलाड़ियों के साथ उतना जुड़ नहीं पाए, जितना वे इन दिग्गजों के साथ स्वयं को जुड़ा हुआ महसूस करते थे।

हाल के समय में क्रिकेट मैचों की संख्या तेजी से बढ़ी है। एक के बाद एक श्रृंखला खेली जाती है। आपके पास कई टूर्नामेंट हैं, जो एक साथ चलते हैं। यहां तक कि कई खिलाड़ी भी अपने वर्कलोड को लेकर शिकायत करते नजर आए हैं। यह लगभग वैसा ही है जैसे बहुत अधिक क्रिकेट बिल्कुल भी क्रिकेट नहीं होने के बराबर है। पहले सीमित संख्या में मैच होते थे। लोग हर मुकाबले का बेसब्री से इंतजार करते थे, जिससे खेल के प्रति उनका लगाव और अधिक बढ़ता था।

साथ ही अब लोगों के पास पूरा मैच देखने के लिए समय की कमी है। वे चलते-फिरते मोबाइल ऐप्स पर स्कोर जानना पसंद करते हैं। तकनीकी सुविधाओं ने बढ़ने से लोगों के पास मनोरंजन के संसाधनों में भी तेजी से इजाफा हुआ है। नेटफ्लिक्स, अमेज़ॅन प्राइम, यूट्यूब जैसे वीडियो प्लेटफॉर्म पर भरपूर मात्रा में मनोरंजक सामग्री है, जो महज एक क्लिक दूर है। इन सब कारणों के चलते पहले से वैश्विक स्तर पर कम लोकप्रिय क्रिकेट की हालत और खस्ता हो गई है।

Q. भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड की स्थापना कब हुई थी?

A. 1928 में।

Leave a comment

Cancel reply