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क्या विराट कोहली टीम इंडिया पर बोझ बन गए हैं?

हर टेस्ट, हर सीरीज के साथ लगता है उस ‘बल्लेबाज’ विराट कोहली की वापसी होगी, जिसे पूरी क्रिकेट की दुनिया जानती है पर ऐसा हो नहीं रहा। वापसी के लिए एजबेस्टन टेस्ट से बेहतर मैच और कोई नहीं हो सकता था। सीरीज के पिछले 4 टेस्ट में विराट कोहली की कप्तानी में टीम 2-1 से आगे थी और अगर सीरीज जीतते तो उनसे ज्यादा खुशी किसी और को न होती। इस बार भले ही वे कागज़ पर कप्तान नहीं थे पर ग्राउंड पर जो कुछ हो रहा था उसमें वे किसी ‘कप्तान’ से कम नहीं थे। तब भी हुआ क्या?

दो पारी में सिर्फ 31 रन- हनुमा विहारी ने भी 31 रन बनाए और हर कोई उन्हें टीम से निकालने की बात कर रहा है। तो विराट कोहली को क्यों नहीं? इसका जवाब ये है कि तुलना में विराट कोहली का कद बहुत बड़ा है और एजबेस्टन टेस्ट ने फिर से साबित किया कि वे बॉक्स ऑफिस पर हिट हैं और क्रिकेट को चाहने वाले अभी भी उनके बैट को देखने के लिए महंगी टिकट खरीदते हैं।

भारतीय टीम के सबसे शानदार बल्लेबाज में से एक लेकिन खुद की परछाई की तरह लग रहे थे विराट कोहली। इसमें कोई शक नहीं कि उनकी किस्मत भी लंबे समय से उनके साथ नहीं पर अब उनकी खराब फॉर्म चिंता बनती जा रही है। सब मानते हैं कि इतनी टेलेंट है कि ये रन-मशीन वापसी से ज्यादा दूर नहीं पर सवाल ये है कि कब?

इंटरनेशनल क्रिकेट में विराट कोहली का खराब प्रदर्शन इंग्लैंड के विरुद्ध भी जारी रहा हालांकि प्रैक्टिस मैच में शानदार 50 बनाया था। पहली पारी में, मैथ्यू पॉट्स की जिस गेंद पर बोल्ड हुए, उसके सामने वे किस सोच में थे? दूसरी पारी में, बेन स्टोक्स की गेंद पर 20 रन पर आउट होने से पहले वे अच्छे टच में दिख रहे थे। अभी भी टीम में जगह पक्की, उनकी एनर्जी और फ़िटनेस पर कोई शक नहीं, दूसरी टीम के खिलाड़ियों से पंगा लेने के लिए अभी भी तैयार और टीम को लीड करने का दम, ये सब इस बात का सबूत हैं कि उन्होंने खुद, रन न बनाने के बावजूद हिम्मत नहीं हारी है। टीम हडल में खिलाड़ियों को, बुमराह की मौजूदगी के बावजूद, पैप टॉक वे दे रहे थे। सब ठीक, बस रन नहीं बन रहे उनके बैट से।

मुश्किल ये है कि अब मंच पर पकड़ कम हो रही है और 2019 के बाद से किसी भी तरह की इंटरनेशनल क्रिकेट में शतक नहीं बनाया है। पिछले दिनों, अपने सबसे खराब आईपीएल सीजन को खेला। हिम्मत भी कम हो रही है अन्यथा टीम जिस मुकाम पर थी, रोहित शर्मा के बाहर होते ही खुद कप्तान की जिम्मेदारी संभालने का ऑफर देना चाहिए था। सुपर वी, उनके नाम की एनिमेटेड डिज़नी चैनल सीरीज, एक ही सीजन के बाद चुपचाप रोक दी गई। ये सब चेतावनी के संकेत ही तो हैं?

ये मानने वाले कम नहीं कि विराट कोहली ने एजबेस्टन टेस्ट में, जिस-जिस इंग्लिश क्रिकेटर से फिजूल में पंगा लिया, उसी ने रन बनाकर उन्हें जवाब दिया और नुक्सान टीम का हुआ। इंग्लैंड की ओपनर जोड़ी का टेस्ट करियर ‘बचाने’ का बहुत कुछ श्रेय, ब्रिटिश मीडिया विराट कोहली को दे रहा है। आप जॉनी बेयरस्टो, जैसे खिलाड़ी को पंगा ले कर ‘आउट’ नहीं कर सकते।

विराट कोहली का बल्लेबाजी का औसत लगातार गिर रहा है और नई आईसीसी टेस्ट रैंकिंग में वे टॉप 10 से भी बाहर हो गए हैं। तब भी लगता है भारतीय टीम की वे पहचान हैं। न सिर्फ भारत के युवा बल्लेबाज, विदेशी भी उनकी बल्लेबाजी की वीडियो देखते हैं। दूसरी तरफ, बांग्लादेश के विरुद्ध नवंबर 2019 के टेस्ट शतक के बाद से, कोहली 8 टेस्ट मैचों में सिर्फ तीन 50 ही बना पाए हैं। इस दौर में 14 पारियों में 24.64 टेस्ट औसत उनके करियर औसत 52.04 से काफी नीचे है। ‘आराम’ देने की बात में भी ज्यादा दम नहीं रहा क्योंकि अब वन डे और टी 20 सीरीज में लगातार खेलते नहीं। इसलिए अब फोकस टेस्ट क्रिकेट की फार्म है, उसमें रन बने तो बाकी का काम अपने आप हो जाएगा। तब ही वे टीम पर ‘बोझ’ नजर नहीं आएंगे। उनके रन उनकी टीम में जगह बनाएं, न कि पिछली मशहूरी।

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