आईपीएल की लोकप्रियता, कामयाबी और मुनाफा देखकर अन्य सभी क्रिकेट खेलने वाले बड़े देशों को लगा कि वे भी तो इसी तरह से टी-20 की लीग शुरू कर पैसा कमा सकते हैं। नतीजा – आस्ट्रेलिया में बिग बैश, इंग्लैंड में टी-20 ब्लास्ट और वेस्टइंडीज में करेबियन प्रीमियर लीग की शुरूआत हो गई एशियाई देश कहां पीछे रहे – श्रीलंका, बांग्लादेश और पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड ने भी टी-20 लीेग की शुरूआत कर दी।

इनकी देखा-देखी कई गैर मान्यता प्राप्त या घरेलू स्तर पर लीग शुरू हो गई – यूएई में 10 ओवर के मैचों की लीग ने अपनी जगह बनानी शुरू कर दी तो हॉग कॉग में बंद हो चुका उनका सिक्सेज टूर्नामेंट फिर शुरू हो गया।

असर अंतराष्ट्रीय क्रिकेट पर आने लगा और खिलाड़ी मौके का फायदा उठाकर अपने देश की घरेलू और अंतराष्ट्रीय क्रिकेट छोड़कर, पैसा कमाने के लिए इन लीग की तरफ भागने लगे। कम उम्र में अंतराष्ट्रीय क्रिकेट से संन्यास लेकर, पूरे साल इन लीग के लिए उपलब्ध रहने का सिलसिला शुरू हो गया। क्रिस गेल, सुनील नरैन, इवेन ब्रावो, शोएब मलिक और शाहिद अफरीदी जैसे क्रिकेटर, टी-20 लीग के बाजार के सबसे चर्चित नाम बन गए।

इतनी ही लीग संभल नहीं रही थी कि दक्षिण अफ्रीका ने टी-20 ग्लोबल लीग के आयोजन की शुरूआत कर दी। फ्रेंचाइज को टीम बेच दी, खिलाड़ी बेचने का पूल बन गया और तब बोर्ड को अहसास हुआ कि टूर्नामेंट बहुत बड़े घाटे का सौदा बनने वाला है। फिलहाल यह लीग ठंडे बस्ते में है।

इससे प्रभावित हुए बिना कनाडा अब ग्लोबल टी-20 कनाडा नाम से लीग शुरू कर रहा है। उधर अमिरात क्रिकेट बोर्ड ने इस बात की चिंता किए बिना कि उनके ही मैदानों में खेली जाने वाली पाकिस्तान सुपर लीग पर क्या असर आएगा अपनी नई टी-20 लीग की घोषण कर दी। चूंकि ये सभी लीग आईसीसी के सदस्य देश आयोजित कर रहे है, इसलिए आईसीसी ने भी इन्हें मान्यता दे दी।

इतनी सारी लीग इनके लिए खिलाड़ी कहां से आएंगे? हर देश खिलडियों को सबसे पहले अपनी क्रिकेट के लिए बचाना चाहता है। नतीजा है खिलाड़ियों के ऐसी लीग में खेलने का प्रतिबंध।

भारतीय क्रिकेट बोर्ड ने तो अपने खिलाडियों को शुरू से अन्य दूसरी लीग में नहीं खेलने दिया – यहां तक कि जिनके पास सेंट्रल कांट्रेक्ट नहीं। (जैसे कि यूसुफ पठान) ने भी एन ओ सी नहीं हासिल कर पाते पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड ने अब अधिकतम दो लीग की गिनती तय की है – इनमें से भी एक तो पाकिस्तान सुपर लीग होगी। बांग्लादेश सिर्फ दो विदेशी लीग में खेलने देते हैं। हाल फिलहाल आस्ट्रेलिया, इंग्लैंड, दक्षिण अफ्रीका और वेस्टइंडीज ने ऐसा कोई प्रतिबंध नहीं लगाया है।

दूसरा मुद्दा है इन लीग को मैच फिक्सिंग, स्पॉट फिक्सिंग और सट्टेबाजी के अभिशाप से बचाना। 2013 के स्केंडल के बावजूद आईपीएल तो संभल गई लेकिन हर लीग बेअसर नहीं है। श्रीलंका में बात इतनी बिगड़ी कि बोर्ड ने श्रीलंका प्रीमियर लीग का आयोजन बंद कर दिया। बांग्लादेश में तो टीम मालिकों पर ही मैचों के नतीजे पर असर डालने का आरोप लगा। आईसीसी खुद यूएई की अजमन ऑल स्टार्स लीग जिसमें कई अंतराष्ट्रीय क्रिकेटर खेल में भ्रष्टाचार की जांच कर रही है।

क्रिकेट को टी-20 की बदौलत ओलंपिक में जगह दिलाने के प्रोजेक्ट में आईसीसी टी-20 को बढ़ावा दे रही है पर अब समय आ गया है कि आईसीसी न सिर्फ लीग में बढ़ रहे भष्टïाचार को रोके – क्रिकेट के संतुलन पर भी ध्यान दें। टेस्ट मैच रद्द कर उनकी जगह टी-20 मैच खेले जा रहे हैं। ऐसे में टेस्ट क्रिकेट का क्या होगा?

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