वीरेंद्र सहवाग ने टीम इंडिया में फिटनेस के स्तर के पीछे एक मजेदार किस्सा बताया है।

भारतीय टीम में फिटनेस का स्तर पिछले कुछ सालों से बढ़ गया है। टीम इंडिया में प्रवेश करने के लिए खिलाड़ियों को बल्ले और गेंद साथ-साथ फिटनेस के मापदंड भी हासिल करने की जरूरत हो गई है। अगर फिटनेस टेस्ट में कोई भी खिलाड़ी असफल हो जाता है तो उसे भारतीय टीम में जगह नहीं मिलती है। इसका ताजा उदाहरण स्पिनर वरुण चक्रवर्ती हैं, जिन्होंने आईपीएल में शानदार प्रदर्शन किया था, लेकिन वे फिटनेस टेस्ट पास नहीं कर पाए और टीम से बाहर हो गए।

अब भारत के पूर्व दिग्गज सलामी बल्लेबाज वीरेंद्र सहवाग ने टीम इंडिया में फिटनेस के स्तर के पीछे एक मजेदार किस्सा बताया है। सहवाग ने क्रिकबज को दिए इंटरव्यू में कहा, ”मैंने आखिरी बार 2011-12 में इंग्लैंड में दो टेस्ट मुकाबले खेले थे। मैंने एक मुकाबला ‘द ओवल’ में खेला और दूसरा ‘बर्मिंघम’ में खेला था। सभी काउंटी टीम्स जो वहां हैं, उनके ड्रेसिंग रूम में एक चार्ट है, जो फिटनेस के मानकों को प्रदर्शित करता है। मुझे लगता है कि इस मौजूदा भारतीय टीम के फिटनेस मानकों को वहां से उठाया गया है।”

42 साल के पूर्व क्रिकेटर ने आगे कहा, ”मैं यह इसलिए कह रहा हूं, क्योंकि तब भी हम इससे प्रभावित थे। यह वजन, गतिशीलता, लचीलापन और कुछ इसी तरह के टेस्ट के बारे में था, जब हमने इसे करने की कोशिश की तो 2011-12 में हमारी आधी से ज्यादा टीम उन टेस्ट में विफल हो गई थी।”

वीरेंद्र सहवाग ने कहा, ”इसलिए मुझे लगता है कि विराट कोहली ने यही चुना है। अगर इंग्लैंड में फिटनेस में वह मानक था, तो हमें भी होना चाहिए। जब से उन्होंने कप्तान के रूप में पदभार संभाला है, उन्होंने फिटनेस पर पर्याप्त जोर दिया है कि कुछ टेस्ट को पास करने होंगे और उसके बाद ही हम सर्वश्रेष्ठ प्रतिस्पर्धा कर सकते हैं।”

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