इंग्लैंड के विरुद्ध अहमदाबाद में चौथे टेस्ट के पहले दिन का खेल खत्म होने पर भारत की बल्लेबाज़ी के नज़रिए से एक ख़ास बात ये थी कि लगातार पांचवीं पारी में शुभमन नाकामयाब हुए और इन 5 पारी में दो बार तो वे अपना खाता भी नहीं खोल पाए। इंग्लैंड के विरुद्ध सीरीज में अब तक के उनके स्कोर 29, 50 0, 14, 11, 15* और 0 हैं। हो सकता है ये उनके टेस्ट क्रिकेट में खेलने का महज 'ख़राब पैच' हो पर गड़बड़ ये है कि ये ख़राब पैच करियर में इतनी जल्दी आ गया कि उसके कारण बैचेनी बढ़ रही है। आखिरकार ऐसा क्यों हुआ कि जिस शुभमन ने ऑस्ट्रेलिया टूर पर गज़ब की उम्मीद जगा दी थी और यूं लगा था कि वे ओपनर के तौर पर लंबी रेस में हैं, अब उन्हीं की तकनीक में ग़लतियां नज़र आ रही हैं और सबसे ख़ास बात तो ये कि उनके ओपनर बनने पर भी सवाल उठाए जा रहे हैं। 

सुनील गावस्कर ने शुभमन गिल के अहमदाबाद में चौथे टेस्ट में अपना खाता खोलने में नाकामयाब रहने के बाद टेस्ट सीरीज में उनके बैट से रनों की कमी पर चिंता जताई। गावस्कर के हिसाब से गिल ऑस्ट्रेलिया में डेब्यू सीरीज़ के ठीक बाद उम्मीदों के दबाव में आ गए लगते हैं. गावस्कर बहरहाल इसे ज्यादा भाव देने के लिए तैयार नहीं और वे कहते हैं कि इस दौर से कोई भी गुजर सकता है। 

गावस्कर ने ये भी कहा कि उन्हें पारी की शुरुआत करते हुए अपनी बैटिंग में थोड़ी एडजस्टमेंट करनी होगी। लगभग यही बात वीवीएस लक्ष्मण ने कह दी. उनके हिसाब से विशेषज्ञ ओपनर मयंक अग्रवाल को बुलाने का समय आ गया है. यहां तक कि मौजूदा हालत में वे केएल राहुल को भी बेहतर विकल्प मानते हैं। 

अहमदाबाद में चौथे टेस्ट में पहली पारी तक शुभमन का रिकॉर्ड 7 वें टेस्ट में 13 पारी में 34.36 औसत से 378 रन है, जिसमें तीन स्कोर 50 के हैं। ये कुल रिकॉर्ड अभी भी बड़ा अच्छा है. गड़बड़ है उनका आखिरी 5 पारी में सिर्फ 40 रन बनाना। कहीं वास्तव में ऐसा तो नहीं कि शुभमन को मिडिल आर्डर से ओपनर पर ले जाने का प्रयोग अब रिवर्स गियर में आ गया है? पिछले सीजन में उनकी आईपीएल टीम कोलकाता नाईट राइडर्स ने भी तो यही किया था – उन्हें मिडिल ऑर्डर से ओपनर बनाया और पहले मैच की नाकामयाबी के बाद कोच मैकुलम ने उन्हें स्टान्स बदलने के लिए कहा था। 

संयोग से इस समय टीम इंडिया के दोनों ओपनर, विशेषज्ञ ओपनर नहीं हैं – रोहित शर्मा और शुभमन दोनों ही मिडिल ऑर्डर से ओपनर बने। इंडिया ए के लिए, जिस दोहरे शतक (204*) ने शुभमन को एकदम चर्चा दिलाई थी (इंडिया ए – वेस्टइंडीज ए, अगस्त 2019) – उसमें वे मिडिल ऑर्डर में खेले थे, न कि ओपनर के तौर पर। यह ठीक है कि शुभमन गिल में टेलेंट है और इस नज़रिए से भारतीय क्रिकेट में बड़ी उम्मीद हैं। उन्हें इंटरनेशनल क्रिकेट में सबसे प्रतिभाशाली युवा में से एक माना जाता है। बहरहाल, अभी तो रन नहीं बन रहे और भारत की बेंच स्ट्रेंथ  इतनी बेहतर है कि और बहुत से ओपनर उनकी जगह लेने के लिए लाइन में खड़े हैं। 

बात साफ़ है कि गिल के पास वास्तव में ज्यादा समय नहीं? अगर भारत वर्ल्ड चैंपियनशिप का फाइनल खेला तो गिल का ओपनिंग करना कोई गारंटी नहीं। भारत के सेलेक्टर बहुत ज्यादा मौके नहीं देते। अगर गिल दूसरी पारी में भी नाकामयाब हो जाते हैं, तो निश्चित रूप से टीम में उनकी जगह पर सवाल उठने लगेंगे। मयंक अग्रवाल सबसे बड़ी चुनौती हैं। केएल राहुल भी लाइन में हैं। केएल राहुल और मयंक अग्रवाल इसी मौके के इंतजार में हैं। 

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