बांग्लादेश क्रिकेट टीम के कप्तान व वनडे क्रिकेट के नंबर-1 ऑलराउंडर शाकिब अल हसन पर इंटरनेशनल क्रिकेट काउंसिल (ICC) ने मंगलवार को दो साल का प्रतिबंध लगा दिया. शाकिब पर ये प्रतिबंध ‘भ्रष्ट आचरण के लिए की गई पेशकश’ की जानकारी ICC को नहीं देने पर लगाया गया है. प्रतिबंध लगने के बाद शाकिब ने खेल के नियम बनाने वाली एमसीसी की विश्व क्रिकेट समिति (MCC World Cricket Committee) से हटने का फैसला किया.

32 साल के हरफनमौला खिलाड़ी शाकिब ने अपने ऊपर लगे आरोपों को माना है और प्रतिबंध को स्वीकार किया है. शाकिब ने माना है कि उन्होंने भारतीय बुकी दीपक अग्रवाल द्वारा फिक्सिंग के लिए किए गए संपर्क की जानकारी एंटी करप्शन यूनिट (ACU) या किसी अन्य एंटी करप्शन अथॉरिटी को नहीं दी थी. बता दें कि बुकी दीपक ने शाकिब से दो बार संपर्क किया था, पहले तो बांग्लादेश, श्रीलंका और जिम्बाब्वे के बीच जनवरी 2018 में हुई त्रिकोणीय सीरीज के दौरान और दूसरी बार आईपीएल 2018 में.

शाकिब का एक साल का प्रतिबंध सस्पेंड कर दिया गया है और अब उन्हें 29 अक्टूबर 2019 से 29 अक्टूबर 2020 तक एक साल का प्रतिबंध पूरा करना है. इसका मतलब है कि वह अब अगले साल होने वाले आईपीएल और टी20 वर्ल्ड कप में हिस्सा नहीं ले पाएंगे.

मेरिलबोन क्रिकेट क्लब (MCC) की प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, “मेरिलबोन क्रिकेट क्लब आज इस बात की पुष्टि करता है कि शाकिब अल हसन एमसीसी विश्व क्रिकेट समिति से हट गए हैं.” शाकिब अक्टूबर 2017 में MCC विश्व क्रिकेट समिति में शामिल हुए थे. वह सिडनी और बेंगलुरु में हुई बैठकों में हिस्सा भी ले चुके हैं. MCC विश्व क्रिकेट समिति में दुनिया भर के मौजूदा और पूर्व अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेटर्स और अंपायर शामिल हैं. ये समिति खेल में प्रचलित मुद्दों पर बात करने के लिए सालाना दो बार मिलती है. अगली बैठक मार्च 2020 में श्रीलंका में होनी है.

विश्व क्रिकेट समिति के चेयरमैन माइक गेटिंग ने कहा, “हमें समिति से शाकिब को खोने का अफसोस है, उन्होंने पिछले दो सालों में काफी योगदान दिया था.

हमें दुख है कि समिति में शाकिब नहीं होंगे जिसमें उन्होंने पिछले दो वर्षों में काफी योगदान दिया है. क्रिकेट भावना के सरंक्षक होने के नाते हम उनके इस्तीफे का समर्थन करते हैं और मानते हैं कि यह निर्णय सही है.”

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