हरमनप्रीत कौर - बिना देरी रन बनाओ!

भारत की महिला क्रिकेट टीम इंग्लैंड में सीरीज खेल रही है। एकमात्र टेस्ट: युवा खिलाड़ियों की बदौलत टेस्ट ड्रा किया- हरमनप्रीत के स्कोर 4 और 8 रन, जबकि अनुभवी क्रिकेटर के नाते उन्हें तो मिसाल बनना था। अब तक के दोनों वन डे इंटरनेशनल: भारत की दोनों मैच में हार- हरमनप्रीत के स्कोर क्रमशः 7 गेंद में 1 रन और 39 गेंद में 19 रन 48.71 स्ट्राइक रेट से।

अब ये बताने की जरूरत नहीं कि भारत की ये टॉप बल्लेबाज़ आलोचना के निशाने पर है और अगर टॉप बल्लेबाज़ रन नहीं बनाएंगी तो कौन रन बनाएगा? दोनों वन डे में टीम की क्रिकेट की सबसे बड़ी कमी रही स्ट्राइक रोटेट न करना और रन नहीं बन रहे तब भी खुद ठुक ठुक करते रहना। सीनियर और भारत की टॉप हिटर गिनी जाने वाली हरमनप्रीत इस मामले में भी दोषी है।

जब एक ऐसी टॉप क्रिकेटर, जिसने 3 टेस्ट,106 वन डे और 114 टी 20 खेले हों, रन न बनाए तो टीम पर असर आएगा ही। हरमन की इस फार्म पर चिंता सिर्फ भारत में नहीं है, उन टीम को भी है जो भारत की पहली पेशेवर क्रिकेटर के तौर पर हरमन को द हंड्रेड और बिग बैश लीग में खेलने के लिए बुला रही हैं। भारत के नज़रिए से देखें तो पहले दोनों वन डे में भारत की हार में हरमन के रन न बनाने का बहुत बड़ा योगदान रहा।

वह 20 जुलाई 2017 का दिन था जब हरमन ने ऑस्ट्रेलिया के विरुद्ध 171* का रिकॉर्ड स्कोर बनाया था। उसके बाद से 29 वन डे में 23 पारी में 578 रन 30.42 औसत और 69.06 SR से। इस अवधि में महिला वन डे इंटरनेशनल क्रिकेट में जिन 27 बल्लेबाज़ ने 500 रन बनाए, उनमें से SR के हिसाब से आख़िरी 7 में 4 बल्लेबाज़ भारत की हैं – पूनम रौत (61.23), मिताली राज (62.08) और दीप्ति शर्मा (64.69) का SR कम होना तो समझ में आता है पर हरमन की एक अटैकिंग बल्लेबाज़ के तौर पर प्रतिष्ठा इन सबसे कहीं ज्यादा है। उनका अचानक फार्म खोना टीम के लिए बड़े नुक्सान वाला साबित हो रहा है। महिला क्रिकेट में अब 100 का SR कोई अनोखी बात नहीं है, भारत की बल्लेबाज़ कहां हैं?

इस साल हरमनप्रीत दक्षिण अफ्रीका के विरुद्ध सीरीज में शानदार बल्लेबाजी करते हुए दिखीं, मार्च 2021 में लखनऊ में वन डे मैचों में 40 (41), 36 (46), 54 (35), 30* (55) बनाए पर भारत ने इनमें से कोई मैच नहीं जीता। सीरीज में भारत ने सिर्फ एक वह वन डे जीता (दूसरा), जिसमें उन्होंने बल्लेबाजी नहीं की थी।

जब वे टी 20 इंटरनेशनल में भी ऐसे ही रन नहीं बना रही थीं तो यह लगा कि शायद कप्तानी का दबाव उनकी बैटिंग पर असर डाल रहा है। उस समय जानकारों की राय थी कि टीम को हरमन की एक टॉप बल्लेबाज़ के तौर पर ज्यादा जरूरत है और उन्हें कप्तानी से हटा दो। सेलेक्टर्स ने बहरहाल ऐसा नहीं किया।

ऐसा नहीं है कि हरमनप्रीत से पहले कोई बल्लेबाज़ ‘आउट ऑफ़ फार्म’ नहीं हुआ पर हरमन के मामले में सच ये है कि टीम की वे टॉप बल्लेबाज़ हैं, इसलिए ये महंगा सौदा बनता जा रहा है। इंग्लैंड में झूलन गोस्वामी ने बिलकुल ठीक कहा, “बस हरमन के बैट से एक बड़े स्कोर का इंतज़ार है, उसके बाद वे पुराने रंग में खेलेंगी। वह स्कोर ही तो नहीं बन रहा, अगर कप्तान के तौर पर आगे की टी 20 सीरीज में भी रन न बनाए तो क्या होगा?

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