एक ठीक ठाक क्रिकेट की समझ रखने वाला भी आसानी से भारत की विश्व कप के लिए वन डे टीम के 11 पक्के खिलाड़ी चुन लेगा। इसलिए चयनकर्ताओं के पास अपने प्रयोग और दिमाग लगाने के लिए चार ही जगह बचती हैं। इसमें से एक जगह आलराउंडर के लिए है और उसमें मुकाबला विजय शंकर और रविंद्र जडेजा के बीच है – फर्क ये है कि शंकर मीडियम पेस ऑलराउंडर हैं और जडेजा स्पिन ऑलराउंडर। इसी मुकाबले की वजह से ऑस्ट्रेलिया के विरूद्ध इन दिनों की वन डे सीरीज में दोनों को खिलाया।

जो मौजूदा हालात हैं उन्हें देखते हुए विश्व कप टीम में किसने जगह पक्की की? सिर्फ पहले दो वन डे को देखकर यह तय करना गलत होगा कि कौन बेहतर है पर चयनकर्ता मौजूदा फॉर्म को नजरअंदाज भी तो नहीं कर सकते। जडेजा ने हैदराबाद वन डे में बल्लेबाजी नहीं की और 10 ओवर में आंकड़े 0-33 रहे। इकानमी रेट के हिसाब से सबसे किफायती गेंदबाज थे उस पारी में पर विकेट नहीं मिला। नागपुर में 40 गेंद में 21 रन उस समय बनाए, जबकि टीम को तेजी से स्कोर बढ़ाने की सख्त जरूरत थी। बाद में 10 ओवर में 1-48 की गेंदबाजी की?

इसकी तुलना में हैदराबाद में विजय शंकर ने 3 ओवर में बिना विकेट लिए 22 रन दिए, जबकि नागपुर में 41 गेंद में 46 रन के साथ स्कोर बढ़ाने में विराट कोहली का साथ दिया और बाद में 1.3 ओवर में 2-15 के आंकड़े दर्ज किए। जीत के लिए ऑस्ट्रेलिया को आखिरी ओवर में 11 रन की जरूरत थी और 2 विकेट बचे थे। होना तो यह चाहिए था कि विराट कोहली आखिरी ओवर के लिए बुमराह जैसे किसी गेंदबाज को संभालकर रखते पर बचे रहे शंकर और केदार जाधव। इससे पहले के 49 ओवर में से केदार ने 8 फैंके थे 1-33 के प्रदर्शन के साथ और शंकर ने 1 ओवर फैंका था 0-13 के प्रदर्शन के साथ।

कोई भी यह कह देगा कि इस हिसाब से आखिरी ओवर केदार को डालना चाहिए था – डाला शंकर ने और पहली 3 गेंद में ही 2 विकेट लेकर भारत को मैच में जीत दिला दी। आखिरी ओवर का दबाव किसी भी अनुभवी गेंदबाज की गेंदबाजी की लय बिगाड़ देता है और यहां तो आखिरी ओवर डाल रहे थे अपना सिर्फ 6वां वन डे खेल रहे विजय शंकर। मार्कस स्टोइनिस का एक बड़ा शॉट समीकरण बदल देता पर विजय ने पहली ही गेंद पर उन्हें आउट कर नजारा बदल दिया। नागपुर में जीत में जितना खास था विराट कोहली का शतक – उतना खास था विजय शंकर का आलराउंड प्रदर्शन। कोहली के साथ साझेदारी में 81 रन जोड़कर भी वे अपनी खराब किस्मत से आउट हुए थे न कि खराब स्ट्रोक से। आगे क्या होगा यह तो कह पाना मुश्किल है पर हाल के दिनों में जिन क्रिकेटरों ने अच्छे प्रदर्शन के साथ अपना कद बढ़ाया उनमें से एक नाम विजय शंकर का है। निदाहास ट्रॉफी के फाइनल में जो कमी रह गई थी उसे विजय ने नागपुर में पूरा कर दिया।

इसमें कोई शक नहीं कि गेंद के साथ विजय शंकर के पास न तो जसप्रीत बुमराह जैसे यॉर्कर हैं और न ही मौहम्मद शमी जैसी गेंद की तेजी। उनकी गेंदबाजी को विशेषज्ञ ‘दोस्ताना मीडियम पेस’ का नाम दे रहे हैं लेकिन स्टंप्स से स्टंप्स की लाइन में उनकी गेंद डालने की यही योग्यता विराट कोहली को पसंद है। कप्तान का यही भरोसा विजय शंकर के काम आ रहा है।

घरेलू क्रिकेट में लगातार मेहनत के बाद विजय को इंडिया कैप मिली और वे उसे सस्ते में छोड़ने के लिए तैयार नहीं है। मौके कम, उम्र बढ़ रही और उस पर खराब फिटनैस के साथ लगभग दो महीने नेशनल क्रिकेट एकेडमी में। इसके बावजूद विजय ने वापसी की और ट्वंटी-20 एवं वनडे दोनों में मिले मौके का पूरा फायदा उठाया।

अब तक (नागपुर वन डे तक) 6 वन डे में विजय शंकर ने 91 रन बनाए और 2 विकेट लिए। क्या चयनकर्ता ऐसे ‘नए’ ऑलराउंडर के साथ विश्व कप में खेलने का जोखिम उठाएंगे? यह सवाल अगर किसी चयनकर्ता ने उठा दिया तो विजय बैकफुट पर होंगे – पर जहां तक बड़े मैच के टेंपरामेंट का सवाल है उसमें कोई कमी नहीं है।

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