इंदौर में पहले टेस्ट मैच के दौरान भारतीय खिलाड़ियों ने ‘पिंक’ गेंद से भी अभ्यास किया. कप्तान विराट कोहली से जब इंदौर टेस्ट से पहले ‘पिंक’ गेंद के अनुभव के बारे में पूछा गया तो उन्होंने कहा था, “मैंने ‘पिंक’ गेंद से कल पहली बार खेला और पाया कि ये लाल गेंद की तुलना में अधिक स्विंग करती है क्योंकि गेंद पर पेंट की एक्स्ट्रा परत चढ़ाई गई है. इस कारण से गेंद अधिक समय तक हार्ड रहती है और सीम भी अधिक समय तक उभरी रहती है. इससे तेज गेंदबाज अधिक समय तक मैच में बने रहेंगे.”

ऐसे कयास लगाए जा रहे हैं कि ईडन गार्डंस में तेज गेंदबाजों के लिए अधिक मदद होगी और स्पिनर्स के लिए इस पिच पर दिक्कतें हो सकती हैं. खबर है कि पिच पर अधिक घास है जिससे गेंद अधिक समय तक अपने आकार को बनाए रखे. पिच पर अधिक घास होने से तेज गेंदबाजों को फायदा मिलेगा.

अगर आंकड़ो को देखें तो पाएंगे कि 11 डे-नाइट टेस्ट में स्पिनर्स के नाम गिरने वाले कुल 366 विकेट में सिर्फ 96 हैं. अभी तक डे-नाइट टेस्ट में अधिकतर विकेट गेंदबाजों के ही नाम रहे हैं. लेकिन, इन आंकड़ो के आधार पर ही हमें निष्कर्ष नहीं निकाल लेना चाहिए.

अगर एशियाई परिथितियों में खेले गए डे-नाइट टेस्ट के आंकड़े देखे जाएं तो वह कुछ और ही कहानी कहते हैं. इन परिस्थितियों में स्पिनर्स ने मैच के परिणाम पर महत्वपूर्ण प्रभाव डाला है. 11 में से 2 टेस्ट एशिया में खेले गए हैं और इन दो मैच में स्पिन गेंदबाजों ने गिरने वाले कुल 73 विकेट में 46 अपने नाम किए हैं. यानि कि 63 प्रतिशत विकेट स्पिनर्स के नाम रहे हैं. ये दोनों ही मैच दुबई में खेले गए थे.

हालांकि, भारतीय टीम को इस चीज पर जरूर ध्यान देना चाहिए कि पाकिस्तान के लेग-स्पिनर यासिर शाह ने ‘पिंक’ गेंद से दो बार पारी में 5 विकेट झटके हैं, वहीं वेस्टइंडीज के लेग स्पिनर देवेंद्र बिशू ने एक पारी में 8 विकेट झटके थे. इससे मालूम चलता है कि एशियाई कंडीशन में ‘पिंक’ गेंद से लेग स्पिन गेंदबाज अधिक प्रभावी साबित होते हैं. इसलिए विराट कोहली और रवि शास्त्री को लेग स्पिनर कुलदीप यादव को टीम में शामिल करने पर ध्यान देना चाहिए, क्योंकि उनके पास ईडन गार्डंस को अच्छे से जानने का एडवांटेज भी है.

दिग्गज गेंदबाज हरभजन सिंह ने भी कुलदीप यादव को टीम में शामिल किए जाने की वकालत की है. कुलदीप का ‘पिंक’ गेंद से अच्छा रिकॉर्ड भी है. बता दे कि 2016 दिलीप ट्रॉफी के दौरान डे-नाइट टेस्ट में ‘पिंक’ गेंद का इस्तेमाल किया गया था. ‘पिंक’ गेंद से लाइट्स के नीचे खेले गए इस टूर्नामेंट में बाएं हाथ के लेग स्पिनर कुलदीप यादव ने 3 मैच में सर्वाधिक 17 विकेट चटकाए थे. एक पारी में उनका सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन 6/88 था, जबकि मैच में उन्होंने 120 रन देकर सर्वाधिक 9 विकेट चटाकाए थे.

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