शाह और गांगुली के भविष्य पर कल होगी सुनवाई, 2020 में खत्म हो चुका है कार्यकाल

बुधवार को भारत की सर्वोच्च अदालत ने बीसीसीआई (BCCI) से सम्बंधित एक सुनवाई को गुरुवार तक टाल दिया है। यह सुनवाई भारतीय क्रिकेट बोर्ड द्वारा दाखिल की गई एक याचिका पर चल रही थी। इस याचिका के तहत बीसीसीआई के संविधान में बदलाव कर बोर्ड के वर्तमान अध्यक्ष सौरव गांगुली (Sourav Ganguly) और सचिव जय शाह (Jay Shah) का कार्यकाल बढ़ाने की मांग की गई है।

इससे पहले न्यायमूर्ति आरएम लोढा की अगुआई वाली समिति ने बीसीसीआई में सुधार करने के लिए कई नियम बनाए थे। भारतीय क्रिकेट बोर्ड ने इन्ही नियम में बदलाव करने के लिए 2020 में सुप्रीम कोर्ट में याचिक दायर की थी। मगर उस समय कोरोना की वजह से सुनवाई एक हफ्ते बाद ही रोकनी पड़ी।

मौजूदा नियम के अनुसार, कोई भी व्यक्ति जो बीसीसीआई या राज्य क्रिकेट संघ में पदाधिकारी रहा है, उसे अधिकतम छह साल के कार्यकाल के बाद तीन साल के लिए “कूलिंग ऑफ पीरियड” से गुजरना पड़ता है। यानि, इस दौरान वह अधिकारी किसी भी राज्य संघ या बीसीसीआई में कोई पद धारण नहीं कर सकता।

2019 में बीसीसीआई अध्यक्ष बनने से पहले गांगुली 2014 से बंगाल क्रिकेट एसोसिएशन (सीएबी) के अध्यक्ष थे, जबकि जय शाह 2013 से गुजरात क्रिकेट एसोसिएशन के पदाधिकारी रह चुके हैं। ऐसे में दोनों के कार्यकाल को 6 साल से अधिक समय हो चुका है और फ़िलहाल इनका कार्यकाल तकनीकी रूप से विस्तार के तहत चल रहा है।

मुख्य न्यायाधीश एनवी रमण, न्यायमूर्ति कृष्ण मुरारी और न्यायमूर्ति हिमा कोहली की पीठ अगर बोर्ड को अपने बीसीसीआई के संविधान में बदलाव की अनुमति नहीं देती है तो इन दोनों अधिकारियों को अपना-अपना पद छोड़ना पड़ेगा।

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