Team India
विश्व कप 2007 में भी कुछ इसी तरह भारत पहले दौर में से बाहर हो गया था.

विश्व कप 2007 में जिस तरह भारत पहले दौर में से बाहर हो गया था, लगता है वही दौर फिर से लौट रहा है. हालांकि, तकनीकी रूप से भारत के पास अभी भी टी20 विश्व कप के सेमीफाइनल के लिए क्वालीफाई करने का मौका है. लेकिन, यह किसी चमत्कार से कम नहीं होगा, क्योंकि इसके लिए बहुत सी चीजों की जरूरत होगी. जिस तरह से भारतीय टीम पाकिस्तान और न्यूजीलैंड से हारी है, टीम इंडिया नॉकआउट में क्वालीफाई करने लायक नहीं है. टी20 विश्व कप में भारत के शर्मनाक प्रदर्शन के मद्देनजर, इस लेख में हम उन पांच कारणों के बारे में बात कर रहे हैं कि आखिर क्यों विराट कोहली और रवि शास्त्री की आलोचना की जानी चाहिए?

ओपनिंग स्लॉट में फेरबदल – ओपनिंग पोजीशन, टी20 क्रिकेट में सबसे महत्वपूर्ण स्पॉट हैं, लेकिन भारतीय टीम ने इस जगह को मजाक बना कर रख दिया है. भारत ने न्यूजीलैंड के खिलाफ रोहित शर्मा और केएल राहुल को अलग करने का एक बेहद गलत निर्णय लिया. हालांकि, दोनों सलामी बल्लेबाजों ने पाकिस्तान के खिलाफ निराशाजनक प्रदर्शन किया, लेकिन न्यूजीलैंड के खिलाफ इस जोड़ी के पास अच्छा प्रदर्शन करने का मौका था. ऐसे महत्वपूर्ण मैच में, इन दोनों खिलाड़ियों पर भरोसा न जता कर युवा ईशान किशन पर दांव खेलना टीम के लिए भारी पड़ गया. अनुभवी पुरुषों को काम करना चाहिए न कि जिम्मेदारी से बचना चाहिए. रोहित और तीन और विराट और चार जाने का रास्ता नहीं था.

हार्दिक पांड्या की असफलता – हार्दिक पांड्या का टीम में चयन भारतीय टीम के लिए पूरी क्रिकेट बिरादरी के सामने एक शर्मिंदगी का विषय बना है. पांड्या एक अच्छे आल-राउंडर हैं, इसमें कोई संदेह नहीं है, लेकिन वह कपिल देव नहीं हैं, वह गेंदबाजी नहीं कर रहे थे, फिर भी आप उनके लिए टीम में जगह बना रहे हैं. हार्दिक की गेंदबाजी को लेकर पूरे विश्व कप में संशय बना रहा और अगर वह गेंदबाजी नहीं करने जा रहे थे, तो उन्हें टीम में ही क्यों चुना गया? भारतीय फैंस को इसका जवाब दिया जाना चाहिए. हालांकि, हार्दिक ने न्यूजीलैंड के खिलाफ गेंदबाजी की लेकिन तब तक काफी देर हो चुकी थी.

अश्विन की टीम में जगह – कोई भी समझ सकता है कि वरुण चक्रवर्ती दुबई में पाकिस्तान के खिलाफ क्यों खेले. लेकिन, केवल एक-दो मैच के प्रदर्शन के आधार पर उसे आंकना अनुचित होगा. लेकिन तथ्य यह है कि एक बार जब वह शुरुआती मुकाबले में प्रभावी साबित नहीं हुए, तो भारत को न्यूजीलैंड के खिलाफ रविचंद्रन अश्विन को आजमाना चाहिए था. यह एक जरूरी मैच था और आपको ऐसे मैचों के लिए अनुभव की जरूरत होती है. जाहिर तौर पर उनके खेलने से भारत को जीत की गारंटी नहीं होती, लेकिन इससे उन्हें बेहतर मौका मिलता. अगर अश्विन मैच नहीं खेल सकते तो टीम में क्यों हैं? इंग्लैंड में भी ऐसा ही हुआ. क्या अश्विन टीम में बस एक “यात्री” के रूप में हैं?

जीत के इरादे की कमी – खराब निर्णय लेने के अलावा, भारत की बॉडी लैंग्वेज ने भी काफी कुछ जाहिर किया. माना कि उन्हें दोनों मैचों में बल्लेबाजी और गेंदबाजी करने के लिए कठिन परिस्थितियां मिलीं, लेकिन टीम बिल्कुल भी जीत के इरादे से मैदान पर नज़र नहीं आई. बल्लेबाजों ने टीम को नीचा दिखाया और ओस ने भी अपनी भूमिका निभाई. ऐसा लग रहा था कि भारत पहले ही यह मैच हार गया था.

इस्तीफा देने की जल्दबाज़ी – टी20 विश्व कप से पहले विराट कोहली का इस्तीफा देने की घोषणा ने भी टीम के मनोबल को थोड़ा गिरा दिया. ऐसा भी नही था कि बीसीसीआई उनकी जगह जल्द ही किसी को कप्तानी सौंपने जा रही थी और बोर्ड ने अभी तक ऐसा नहीं किया है. विराट कोहली अपने इस्तीफे का ऐलान अगर विश्व कप के बाद करते तो शायद टीम की स्थिति कुछ और होती.

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