इस विश्व कप में कुछ बड़ी टीमों का सफर आगे नहीं बढ़ पाया.

हर मैच में एक टीम की जीत तो दूसरी टीम की हार और स्पष्ट है कि हारने वाली टीम की तरफ से कोई न कोई बड़ी गलती तो हुई। ऐसे ही कोई न कोई ख़ास वजह तो रही कि कुछ टीमों का सफर आगे नहीं बढ़ पाया। कुछ ख़ास गलतियों/ कमियों पर नज़र डालते हैं :

विलियमसन की मेहनत बेकार गई

केन विलियमसन

फाइनल में अपनी टॉप गियर बल्लेबाजी से भले ही विलियमसन ने 48 गेंद में 85 रन बनाए, और टीम का 172/4 का स्कोर भी बनाने में कामयाब रही हो, लेकिन आखिर में साबित हो गया कि टीम के बाकी के बल्लेबाज़ कुछ कमाल नहीं कर पाए। जरा सोचिए कि कप्तान के 177+ स्ट्राइक रेट के प्रयास के साथ में बाकी बल्लेबाज़ ने मिलकर 73 गेंद में सिर्फ 78 रन बनाए। पारी में एक मुकाम ऐसा भी आया जब 32 गेंदों में एक भी बॉउंड्री शॉट नहीं आया। ऑस्ट्रेलिया ने इसका पूरा फायदा उठाया।

सेमीफाइनल में पाकिस्तान की हार

पाकिस्तान बनाम ऑस्ट्रेलिया

मैक्सवेल के आउट होते ही पाकिस्तान टीम ने आंखें मूंद लीं और उसी में कुछ बड़ी गलतियां कर गए। देखिए :

  • बाउंड्री फील्डर हमेशा लाइन पर रहना चाहिए न कि कुछ मीटर अंदर- स्टोइनिस का जो छक्का फखर के ऊपर से गया, अगर वह बॉउंड्री पर होते तो आसान कैच बन जाता – तब स्कोर 100 के आसपास ही था।
  • हसन को उस मिडविकेट बाउंड्री पर होना ही नहीं चाहिए था- मालूम था कि वेड उधर हिट कर रहे हैं। अपने सबसे बेहतर फील्डर को हॉट स्पॉट पर रखना बुनियादी फील्ड प्लेसमेंट है। पिछले खराब ओवर के बाद तो वैसे भी हसन का हौसला टूटा हुआ था।
  • शाहिद अफरीदी कहते हैं, हसन के कैच छोड़ने से मैच नहीं निकला- शाहीन शाह अफरीदी ने अपनी तेजी का “समझदारी से” इस्तेमाल नहीं किया और वेड ने शाहीन के ओवर में तीन छक्के लगाए।

दक्षिण अफ्रीका की नजर नेट रन रेट से हटी और दुर्घटना घटी

दक्षिण अफ्रीका नेट रन रेट में मात खा गए।

सुपर 12 में पांच मैच में से चार जीते पर सेमीफाइनल में नहीं पहुंचे- क्योंकि वें इंग्लैंड और ऑस्ट्रेलिया से नेट रन रेट में मात खा गए। मैच जीतना और नेट रन रेट सुधारना दोनों जरूरी हैं।

इंग्लैंड का सफर सेमीफाइनल में रुका

इंग्लैंड टीम सेमीफाइनल में हो गई थी बाहर।

टीम में मोईन अली जैसा गेंदबाज़ होने के बावजूद इयोन मोर्गन ने उन्हें एक भी ओवर नहीं दिया- वह भी तब जबकि मोईन इस मैच से पहले 4 पारी में 7 विकेट ले चुके थे 6 से भी कम इकॉनमी रेट से। मोर्गन ने गलती ये की कि वे मोईन को पांचवां गेंदबाज़ गिनते रह गए। इंग्लैंड ने 17वें (जोर्डन), 18वें (राशिद) और 19वें (वोक्स) ओवर में क्रमशः 23, 14 और फिर 20 रन दिए- मोर्गन ने इन्हें न बदलने की गलती की। वे मोईन की तुलना लिविंगस्टोन से करते रहे और जब उन्होंने अपने चार ओवरों में सिर्फ 22 रन दिए तो कप्तान ने मोईन को भुला ही दिया।

भारत सुपर 12 में ही रुक गया

टीम इंडिया सुपर 12 राउंड से ही हुई बाहर

दिग्गज जानकार ढेरों कमियों का जिक्र कर चुके है जैसे कि आईपीएल को तवज्जो देना, खिलाड़ियों की थकान, लगातार बायो बबल में रहने से डिप्रेशन, विराट कोहली का टूर्नामेंट से ठीक पहले कप्तानी छोड़ने का एलान और पूरी तरह फिट न होने के बावजूद हार्दिक पांड्या और भुवनेश्वर को चुनना पर दो बहुत बड़ी गलती बीसीसीआई ने भी की :

  • टीम ने पाकिस्तान और न्यूजीलैंड के विरुद्ध दोनों हाई वोल्टेज मैच एक साथ और शुरू में ही खेल लिए। अगर एक मैच हारने के बाद अन्य किसी टीम के विरुद्ध जीत लेते तो टीम का मिजाज ही बदल जाता। दीवाली का फायदा उठाने के लिए ब्रॉडकास्टर ने शेड्यूल बनाया और टीम इंडिया बोल्ड हो गई।
  • पाकिस्तान से 24 अक्टूबर को खेले गए मैच के बाद और अगला मैच 31 अक्टूबर को न्यूजीलैंड के विरुद्ध खेला। पाकिस्तान से हार का तनाव लगातार हावी रहा और बहुत लंबा चला गया।

वेस्टइंडीज ने टी20 में रिन्यूअल की जरूरत पर ध्यान नहीं दिया

वेस्टइंडीज

जो 2006 में स्टैनफोर्ड टी20 खेले उन पर अभी तक भरोसा चल रहा है। वेस्टइंडीज को युवा खिलाड़ियों के विकास में तेजी की जरूरत है और पोलार्ड पहले ही कैरेबियन प्रीमियर लीग के साथ एक रीजनल टी 20 टूर्नामेंट खेलने का सुझाव दे चुके हैं। ब्रावो, गेल, रसेल और नरेन जैसे कब तक चलेंगे?

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