kohli pujara leeds test crictoday

इन दिनों खेली जा रही पटौदी ट्रॉफी के पहले 3 टेस्ट के बाद :

  • चेतेश्वर पुजारा ने 6 पारी में 162 रन बनाए – इसमें से हेडिंग्ले के 91 निकाल दें तो क्या बचता है?
  • विराट कोहली ने 5 पारी में 124 रन बनाए – इसमें से हेडिंग्ले के 55 निकाल दें तो क्या बचता है?
  • अजिंक्य रहाणे ने 5 पारी में 195 रन बनाए – इसमें से हेडिंग्ले के 61 निकाल दें तो क्या बचता है?

अगर एक टॉप टीम का मिडिल ऑर्डर, ऐसी बल्लेबाज़ी करेगा तो टीम कहां से जीतेगी? पिछले 14 टेस्ट (जनवरी 2020 से) में भारत का प्रदर्शन, जब भी खराब रहा तो उसके पीछे कॉमन फैक्टर मिडिल ऑर्डर की नाकामयाबी भी है।

बहुत लिखा जा रहा है कि आखिरी 5 बल्लेबाजी में बिलकुल बेकार हैं। उन्हें क्यों दोष दें? रन बनाना सबसे पहले टॉप बल्लेबाज़ की ड्यूटी है। मिडिल ऑर्डर रन नहीं बना रहा तो वे जिम्मेदार नहीं। कोहली/पुजारा/रहाणे ने डेब्यू से दिसंबर 2019 तक 370 पारी में 17054 रन बनाए 50.01 औसत से – 56 सेंचुरी, 68 स्कोर 50 वाले (औसत : कोहली – 54.98, पुजारा – 49.48 और रहाणे – 43.74)। वहीं, जनवरी 2020 से इन तीनों ने मिलकर 70 पारी में 1788 रन बनाए हैं 26.29 औसत से, सिर्फ एक सेंचुरी, सिर्फ 12 स्कोर 50 वाले (औसत : कोहली – 24.68, पुजारा – 27.56 और रहाणे -26.25)। ये टीम का दुर्भाग्य है कि तीनों एक साथ जूझ रहे हैं।

इस तरह मशहूर मिडिल ऑर्डर का स्कोरिंग ग्राफ 2020-21 से लगातार गिर रहा है और 14 टेस्ट की गिनती कोई कम नहीं होती ये बताने के लिए कि मिडिल ऑर्डर अपनी भूमिका सही तरह से नहीं निभा रहा। इंग्लैंड टूर से पहले जिन मुद्दों पर टीम इंडिया को बेहतर माना गया, उनमें से एक ये मिडिल ऑर्डर था। चेतेश्वर पुजारा, विराट कोहली और अजिंक्य रहाणे कोई साधारण नाम नहीं हैं हर एक ने 75 से ज्यादा टेस्ट खेले हैं। पिछले डेढ़ साल से ज्यादा में इनसे वापसी इतनी कम रही कि अब टीम पर भारी पड़ रही है।

रोहित शर्मा (औसत 45.18), जो तीन साल पहले तक ये नहीं जानते थे कि उनका टेस्ट करियर क्या होगा, राहुल (42.00), पंत (36.80), गिल (31.85) और जडेजा (30.44) इस दौर में इनसे बेहतर औसत दर्ज़ कर गए। इस दौरान पुजारा का औसत 27.56, कोहली का 24.68 और रहाणे का 26.25 का औसत है। वे 2020 से पहले कहां थे, पुजारा का औसत 50 के करीब, कोहली का 54.97 और रहाणे का 43.74 था। ऐसा नहीं सिर्फ कोहली जूझ रहे हैं, बाकी दोनों की हालत भी वैसी ही है। कोहली तो फिर भी कुछ अच्छी पारी खेल गए एडिलेड टेस्ट (74), इंग्लैंड के विरुद्ध चेन्नई में (72 और 62) और न्यूजीलैंड के विरुद्ध वर्ल्ड टेस्ट चैंपियनशिप फाइनल (44) में। लॉर्ड्स में भी, वह 42 के स्कोर तक बहुत अच्छी तरह से बैटिंग कर रहे थे।

इस मिडिल ऑर्डर की तुलना सचिन तेंदुलकर (औसत 54.31) और राहुल द्रविड़ (68.80) के इंग्लैंड में रिकॉर्ड से कीजिए, यहां तक कि सौरव गांगुली का औसत भी यहां 65 है तो साफ़ पता चलता है कि ड्यूक गेंद का सामना करने में मौजूदा मिडिल ऑर्डर बड़ा कमज़ोर साबित हुआ।

जो हालत हैं- चिंताजनक है। सीरीज दांव पर लगी है।

Leave a comment

Cancel reply