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मिलिए IPL टीम मालिकों से: कॉरपोरेट दुनिया के दो धुरंधर दिल्ली कैपिटल्स का रिकॉर्ड बदलने के लिए मैदान में

2008 में बीसीसीआई से दिल्ली की, जो टीम खरीदी उसे नाम दिया था- दिल्ली डेयरडेविल्स। दिसंबर 2018 में नाम दिल्ली कैपिटल्स में बदल दिया- ठीक उस वक्त जब, टीम मालिक के तौर पर, एक कारपोरेट ग्रुप के साथ दूसरा ग्रुप जुड़ा। तब तक हर कोशिश के बावजूद दिल्ली डेयरडेविल्स का आईपीएल जीतने का सपना अधूरा था। सवाल था- क्या दिल्ली कैपिटल्स नाम टाइटल लाएगा? 2008 में टीम खरीदी थी प्रॉपर्टी डेवलपर कंपनी GMR ग्रुप ने 84 मिलियन डॉलर में। कम से कम इतना फायदा तो हुआ कि जब लगभग 10 साल बाद टीम की 50% हिस्सेदारी JSW स्पोर्ट्स को बेची तो 550 करोड़ रुपये (84.5 मिलियन डॉलर) मिले। इस सौदे के समय डेयरडेविल्स फ्रैंचाइज़ी की वैल्यू 1100 करोड़ रुपये (लगभग 169 मिलियन अमरीकी डालर) लगाई थी- 2008 में खर्ची कीमत से लगभग दोगुना।

नाम बदलने की वजह पर, एक ग्रुप ने तर्क दिया- ‘दिल्ली देश का शक्ति केंद्र है, राजधानी है, इसलिए इसकी टीम का नाम दिल्ली कैपिटल्स है।’ दूसरे ग्रुप ने कहा- ‘नया नाम दिल्ली की पहचान का प्रतीक है और शहर की तरह ही, हम आगे बढ़ने वाले सभी कामों का केंद्र बनने का लक्ष्य बना रहे हैं।’ टाइटल तो अभी तक नहीं आया है पर इस सच्चाई से इंकार नहीं किया जा सकता कि टीम कम से कम टाइटल जीतने की दावेदार तो दिखाई दी है।

आईपीएल 2020 फाइनल में मुंबई इंडियंस से हार गए। उस सीजन में क्वालिफायर 2 में सनराइजर्स हैदराबाद पर जीत ने उन्हें आईपीएल के इतिहास में पहली बार फाइनल में पहुंचने में मदद की। 2021 में भी, टूर्नामेंट बीच में रुकने पर दिल्ली कैपिटल्स पॉइंट टेबल में सबसे ऊपर थी- 8 मैचों में से 6 जीते थे। रिकी पोंटिंग इस समय कोच हैं और रिकॉर्ड बदलने के लिए तैयार।

टीम का होम ग्राउंड- अरुण जेटली फिरोज शाह कोटला स्टेडियम। उनके पास आधुनिक शहीद वीर नारायण सिंह अंतर्राष्ट्रीय स्टेडियम, रायपुर भी है। अलग अलग दौर में ‘खेलो फ्रंट फुट पे’ और ‘मुंडे दिल्ली के’ टीम एंथम रहे हैं- मुंडे वाले गीत को जसप्रीत जैज़ ने गाया और यूट्यूब पर अरिजीत दत्ता और मीकू पटेल ने संगीतबद्ध किया। 2016 सीज़न के लिए ‘धुआंदार दिल्ली’ को यूट्यूब पर रिलीज किया- इसे सुखविंदर सिंह ने गाया। 2018 में, ‘दिल दिल्ली है, अब धड़केगा’ रिलीज किया और 2019 सीज़न का थीम गीत ‘शोर मचा’ था जिसे अमित त्रिवेदी ने गाया।

दिल्ली के अपने क्रिकेटर वीरेंद्र सहवाग को टीम के आइकन खिलाड़ी का दर्जा दिया- वह पहले दो सीजन में कप्तान भी थे। उन्होंने इस्तीफा दिया और 2010 सीज़न से गौतम गंभीर आ गए। जब वे कोलकाता नाइट राइडर्स चले गए तो एक बार फिर सहवाग को कप्तानी की जिम्मेदारी दे दी।

दिल्ली से अलग न होना- इस टीम की शुरू के सालों की मुश्किलों के लिए जिम्मेदार था। दूसरी तरफ कुछ अजीब फैसले लेते रहे। उदहारण के लिए जब 2008 में बिल्कुल सस्ते में अंडर 19 क्रिकेटर विराट कोहली, थाली में परोस कर, मिल रहे थे तो टीम के थिंक टैंक ने उन्हें नहीं, प्रदीप सांगवान को ले लिया। कोहली उसके बाद से किसी नीलाम में लिस्ट में कभी थे ही नहीं।
इसी तरह 2013 आईपीएल के लिए न जाने क्या सोचकर महंगे, सर विवियन रिचर्ड्स को ब्रैंड एंबेसडर बना दिया। 2016 आईपीएल के लिए युवराज सिंह को 16 करोड़ रुपये में खरीद
लिया- तब तक उनका बेहतरीन दौर निकल चुका था।

नई मैनेजमेंट सनसनीखेज और हिम्मत वाले फैसले लेने वाली निकली। आईपीएल में दो सबसे लाजवाब ट्रेडिंग इसी टीम के नाम हैं- आर अश्विन और अजिंक्य रहाणे को उनकी टीम से ले आए। ये दोनों सनसनीखेज ट्रांसफर सौरव गांगुली की मेहनत का नतीजा थीं जो बोर्ड अध्यक्ष बनने से पहले इस टीम के साथ मेंटर के तौर पर जुड़े हुए थे।

मास्टर स्ट्रोक रहा ऋषभ पंत को लेना- भविष्य की तैयारी थी। यहां तक कि जब नियमित कप्तान श्रेयस अय्यर फिट होकर वापस लौटे तो भी उन्हें वापस कप्तान बनाया ही नहीं। धीरज मल्होत्रा को दिल्ली कैपिटल्स का सीईओ बनाया- वे आईसीसी के इवेंट मैनेजर रह चुके हैं। बस अब रॉयल चैलेंजर्स बैंगलोर की तरह टाइटल की भूख बची है।

टीम मालिक कौन हैं?

जैसा कि ऊपर पढ़ा- जीएमआर ग्रुप ने टीम खरीदी। 2018 सीजन से से पहले, मुंबई की स्टील कंपनी जिंदल साउथ वेस्ट स्पोर्ट्स के साथ 50-50 की साझेदारी की। इस तरह अब दिल्ली कैपिटल्स इन दोनों ग्रुप की टीम है।

जीएमआर ग्रुप (ग्रांधी मल्लिकार्जुन राव) और जेएसडब्ल्यू ग्रुप (जिंदल साउथ वेस्ट) की दिल्ली कैपिटल्स में बराबर हिस्सेदारी है। जेएसडब्ल्यू स्पोर्ट्स के डायरेक्टर, पार्थ जिंदल, फ्रैंचाइज़ी के डायरेक्टर हैं। दोनों ग्रुप की बराबर-बराबर हिस्सेदारी तो टीम कौन चलाएगा? इस सवाल को सोच कर ही ये भी पहले ही तय कर लिया कि हर दो साल में टीम मैनेजमेंट की अदला-बदली होगी- ये एग्रीमेंट आईपीएल 2019 सीज़न से लागू हुआ- 2019 और 2020 में, दिल्ली कैपिटल्स की मैनेजमेंट पार्थ जिंदल ने की और 2021 एवं 2022 के लिए ये जिम्मेदारी दूसरे ग्रुप के किरण कुमार के पास है।

आईपीएल में ऐसा पहली बार हुआ कि किसी फ्रैंचाइज़ी ने अपनी हिस्सेदारी का एक बड़ा हिस्सा बेचा। बाजार में लंबे समय से ये खबर थी कि जेएसडब्ल्यू स्पोर्ट्स, आईपीएल में आने के लिए एक सौदे की तलाश में हैं।एक ख़ास डेवलपमेंट ने इस सौदे में बड़ी भूमिका निभाई- उससे पिछले साल ही रिकॉर्ड तोड़ने वाला आईपीएल मीडिया-अधिकार कॉन्ट्रैक्ट हुआ था। स्टार इंडिया ने पांच साल के कॉन्ट्रैक्ट (2018-2022) के लिए 16,347.5 करोड़ रुपये (2.55 बिलियन अमरीकी डालर) खर्चे और ये क्रिकेट में तब तक का सबसे महंगा मीडिया-अधिकार सौदा था।

इसका मतलब यह भी था कि आगे चलकर, हर आईपीएल फ्रैंचाइज़ी को सेंट्रल पूल से 150 करोड़ रुपये (23.4 मिलियन डालर) सालाना मिलेंगे- ये रकम पहले 10 सीज़न में मिली रकम से दोगुनी थी। इससे एकदम मुनाफा होने की उम्मीद बन गई थी। दोनों ग्रुप यहीं नहीं रुके रहे।

जीएमआर ग्रुप : फरवरी 2022 में यूएई टी 20 लीग में एक टीम खरीद ली। दिल्ली कैपिटल्स के मालिक होने के अलावा, यूपी योद्धा के भी मालिक- ये कबड्डी टीम प्रो कबड्डी लीग में खेलती है।

जेएसडब्ल्यू ग्रुप : अब तीन पेशेवर टीमों के मालिक- इंडिया सुपर लीग में बेंगलुरु एफसी, कबड्डी प्रीमियर लीग में हरियाणा स्टीलर्स और इंडियन प्रीमियर लीग में दिल्ली कैपिटल। वे विजयनगर में इंस्पायर इंस्टीट्यूट ऑफ स्पोर्ट- भारत का पहला प्राइवेट फंड हाई ट्रेनिंग सेंटर भी चलाते हैं। उन्हें उम्मीद है- क्रिकेट से जो कमाएंगे, वह दूसरे खेलों का खर्चा निकाल देगा। इस तरह क्रिकेटरों का इस्तेमाल ओलंपिक खेलों को आगे बढ़ाने के लिए भी कर रहे हैं। निकहत जरीन, बजरंग पुनिया, साक्षी मलिक और नीरज चोपड़ा ने इसी इंस्टीट्यूट में ट्रेनिंग ली।
ग्रुप ने पीएम केयर्स फंड में 100 करोड़ रुपये भी दिए- कोरोनावायरस संकट के खिलाफ लड़ाई में सरकार की मदद के लिए।

पार्थ जिंदल

30 साल के पार्थ जिंदल आईपीएल में सबसे कम उम्र के फ्रेंचाइजी मालिकों में से एक। उनका एक अनुभव ध्यान देने वाला है- 2018 में, आईपीएल में दिल्ली डेयरडेविल्स के कोटला में मैचों में जब सीएसके के विरुद्ध खेले तो आधा स्टेडियम सीएसके का समर्थन कर रहा था और इसी तरह जब विराट कोहली आए, तो आधा स्टेडियम आरसीबी का समर्थन कर रहा था। उन्हें समझ आ गया कि ये सब धोनी और कोहली की बदौलत है। उन्हें अब दिल्ली की टीम के लिए ऐसा स्टार चाहिए था जिसकी बदौलत पूरा स्टेडियम उनका हो- ऋषभ पंत इसी सोच का नतीजा हैं।

पार्थ जिंदल की कुल संपत्ति 1 से 5 मिलियन अमरीकी डालर के बीच होने का अनुमान है। फिटनेस को लेकर जुनूनी जिंदल अभी भी जिम जाने के लिए समय निकाल ही लेते हैं और हर साल एक माउंटेन ट्रेक करने का मन बना लेते हैं। अब अर्जेंटीना में एक चोटी पर चढ़ने की स्कीम बना रहे हैं।

जन्म 19 मई 1990- भारतीय व्यवसायी और जिंदल ग्रुप की कई कंपनी में बोर्ड में। सज्जन जिंदल और संगीता जिंदल के तीन बच्चों में वे सबसे छोटे हैं। 2016 में हार्वर्ड बिजनेस स्कूल से एमबीए और 2012 में ब्राउन यूनिवर्सिटी से इकोनॉमिक्स और पॉलिटिकल साइंस में बीए किया। मुंबई के कैथेड्रल और जॉन कॉनन स्कूल और इंग्लैंड के सेवनोक्स स्कूल में भी पढ़े हैं। और देखिए :

  • 2018 में, जेएसडब्ल्यू स्पोर्ट्स को खेल को बढ़ावा देने वाली सर्वश्रेष्ठ कंपनी की श्रेणी में FICCI इंडिया स्पोर्ट्स अवार्ड।
  • भारत में खेल के प्रति योगदान के लिए भारत सरकार से राष्ट्रीय खेल प्रोत्साहन पुरस्कार से सम्मानित।
  • विजयनगर में इंस्पायर इंस्टीट्यूट ऑफ स्पोर्ट के फाउंडर। 42 एकड़ में है ये इंस्टीट्यूट। इसे स्पोर्ट्स अथॉरिटी ऑफ़ इंडिया की मुक्केबाजी और कुश्ती के लिए खेलो इंडिया विकास केंद्र के रूप में मान्यता।
  • पार्थ की पत्नी अनुश्री जिंदल एक माइक्रो-फाइनेंस वेंचर, स्वामान फाइनेंशियल सर्विसेज चलाती हैं- ये इन दोनों का ही है।
  • अप्रैल 2019 में उनकी बेटी आई इस दुनिया में।
  • पालघर जिले में फाउंडेशन के कुपोषण को कम करने के काम से प्रेरित होकर, पार्थ ने 6 साल से कम उम्र के बच्चों के विकास संकेतकों की निगरानी के लिए एक एंड्रॉइड-आधारित ऐप बनाया- हिंदू पौराणिक कथाओं की एक महिला चरित्र से प्रेरित ‘यशोदास’ नाम दिया। इसकी मदद से पालघर के तीन तालुकों में कुपोषण में भारी गिरावट आई है। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस इस तकनीक को पूरे महाराष्ट्र में लागू कर रहे हैं।
  • 2018 में GQ के 50 सबसे प्रभावशाली भारतीयों में से एक चुना गया ।
  • भारत के उपराष्ट्रपति ने 2018 में जश्न ए यंगिस्तान अवार्ड में समाज में उनके योगदान और विश्व स्तर पर एक अमिट छाप बनाने में राष्ट्र की मदद करने के लिए सम्मानित किया।
  • कहा- अगर कभी उन्हें, डीसी खिलाड़ियों में से किसी की मूर्ति दिल्ली के किसी स्टेडियम के बाहर लगाने का मौका मिले तो वे अमित मिश्रा को चुनेंगे।
  • अपनी एक बात से, आईपीएल चलाने वाले बीसीसीआई को सोच में डाल दिया है- वे कहते हैं, नीलामी प्रक्रिया पुरानी हो चुकी है और इसमें कई कमियां हैं। उन्हें लगता है टीम बनाने और युवाओं को तैयार करने के लिए फ्रैंचाइज़ी को क्या मिलता है- खिलाड़ी तैयार करो और जब वह बेहतर खेलने लगे तो ज्यादा पैसे के चक्कर में फौरन टीम छोड़ देता है।

किरण कुमार

किरण कुमार गांधी जीएमआर ग्रुप के डायरेक्टर और कॉर्पोरेट प्रेसीडेंट हैं। वे ही ग्रुप के लिए टीम लाने के लिए जिम्मेदार थे। वे दिल्ली कैपिटल्स की तरफ से नीलामी में जरूर मौजूद रहते हैं। इस बार तो उनके व्यापारी दिमाग और क्रिकेट के लिए सोच की सभी ने तारीफ़ की। वह बेतरतीब ढंग से खिलाड़ियों के लिए बोली लगाकर उनकी कीमत बढ़ाते रहे जिससे दूसरी टीमों का खर्च बढ़ गया। खुद सस्ते में खरीदे। डेविड वॉर्नर को सिर्फ 6.25 करोड़ रुपये में खरीद लिया और इस तरह पृथ्वी शॉ के साथ ओपनिंग पार्टनर मिल गया।

वह एसोसिएटेड चैंबर्स ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री ऑफ इंडिया में उपाध्यक्ष, यंग प्रेसिडेंट्स ऑर्गनाइजेशन (इंडिया) के सदस्य और 16 अन्य कंपनियों के बोर्ड में भी हैं। उस्मानिया यूनिवर्सिटी से ग्रेजुएट हैं।

ब्रैंड वैल्यू

दिल्ली कैपिटल्स की आईपीएल 2019 के बाद ब्रैंड वैल्यू लगभग 49 मिलियन डॉलर (₹374 करोड़) थी। आईपीएल 2020 में ब्रैंड वैल्यू नीचे चली गई- 370 करोड़ रुपये। डफ एंड फेल्प्स की एक रिपोर्ट के अनुसार, दिल्ली कैपिटल्स को 2020 में महामारी के बाद सभी आईपीएल टीमों में से ब्रैंड वैल्यू में सबसे कम गिरावट (लगभग 1%) का सामना करना पड़ा। 2021 में दिल्ली फ्रेंचाइजी को किसी भी अन्य टीम से ज्यादा स्पॉन्सरशिप मिली और 25 स्पांसर कॉन्ट्रैक्ट किए। इस समय ब्रैंड वैल्यू 56.1 मिलियन डॉलर है।

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