मैच फिक्सिंग
वर्ष 2000 के मैच फिक्सिंग कांड के बाद क्या यह वक्त भारतीय क्रिकेट का सबसे मुश्किल दौर है?

क्रिकेट की दुनिया में भारतीय क्रिकेट (Indian Cricket) का एक बहुत ही बड़ा स्थान है। इंडियन क्रिकेट का ओहदा कितना बड़ा है ये किसी से भी छुपा नहीं है।

विश्व क्रिकेट में भारतीय क्रिकेट की जो प्रतिष्ठा है, वो हर किसी के सामने है, लेकिन इसी भारतीय क्रिकेट में करीब दो दशक पहले यानी साल 2000 में मैच फिक्सिंग का ऐसा जिन्न बोतल से बाहर निकला था, जिसमें भारतीय क्रिकेट की जबरदस्त किरकिरी करवा दी थी। इस जिन्न ने भारतीय क्रिकेट के सम्मान को ही अपने आगोश में ले लिया और भारतीय क्रिकेट पूरी तरह से धरातल पर ला दिया था। यानी एक तरह से भारतीय क्रिकेट इतिहास का वो सबसे बुरा और कभी ना याद करने वाला दौर साबित हुआ।

जहां एक साथ कई खिलाड़ी मैच फिक्सिंग कांड में फंसे और इस कांड ने कप्तान, उपकप्तान सहित कई खिलाड़ियों पर प्रतिबंध लगवा दिया। यहां से भारतीय क्रिकेट का इतनी आसानी से खड़ा होना मुमकिन नहीं लग रहा था। इसके बाद भारतीय क्रिकेट को नया कप्तान मिला और फिर से नई शुरुआत की और देखते ही देखते कुछ ही सालों में भारत उस मैच फिक्सिंग कांड की यादों को पीछे छोड़ते हुए फिर से विश्व क्रिकेट में पावर हाउस बन गया।

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भारतीय क्रिकेट टीम ने पिछले 2 दशक में कई उतार-चढ़ाव देखे, लेकिन इस दौरान टीम ने एकजुटता के साथ, जो सफलता हासिल की आज भारतीय क्रिकेट को क्रिकेट जगत की सबसे मजबूत और संतुलित टीम के रूप में स्थापित कर दिया है। क्रिकेट के गलियारों में आज भारतीय क्रिकेट का सिक्का चलता है।

इन सबके बीच भारतीय क्रिकेट टीम को एक बार फिर से 2000 के मैच फिक्सिंग कांड जैसे बुरे दौर का सामना करना पड़ रहा है। मतलब इस बार कोई मैच फिक्सिंग या कोई ऐसी गलती तो नहीं हुई है, लेकिन जिस तरह से टीम इंडिया में पिछले कुछ सालों से चल रहा है वो अपने आप में इस बात का इशारा करता है कि भारतीय क्रिकेट में सबकुछ तो ठीक नहीं चल रहा है। पिछले कुछ सालों में बीसीसीआई से लेकर भारतीय टीम के खिलाड़ियों के बीच जबरदस्त टेंशन देखने को मिली है, जहां कई बार मीडिया में खबरें आती रही कि भारतीय क्रिकेट टीम में किसी ना किसी तरह से दो फाड़ होता नजर आ रहा है।

रिपोर्ट्स में कई बार दावा किया गया कि टीम इंडिया, जो इस समय अपने देश के लिए खेल रही है, उसमें गुटबाजी चल रही है, जहां दो खेमों में टीम को बंटता हुआ माना गया। विराट कोहली का एक अलग गुट तो एक रोहित शर्मा का अलग गुट है, इस तरह की खबरें लगातार मीडिया में सुर्खियों के रूप में काम कर रही है।

वहीं, इन तमाम खबरों के बीच बीसीसीआई के अध्यक्ष सौरव गांगुली और सचिव जय शाह बिल्कुल भी ध्यान नहीं दे पा रहे हैं। सौरव गांगुली और जय शाह ने, जब से बीसीसीआई की बागडौद संभाली है, उसके बाद से इनके काम से काफी विश्वास जगा, लेकिन टीम में अंदरूनी मामलों में गांगुली और जय शाह की जोड़ी पूरी तरह से नाकाम साबित हो रही है।

ऐसा तो नहीं हो सकता है मीडिया में टीम इंडिया में अंदरूनी कलह की खबरें हों और सौरव गांगुली को पता ही नहीं हो। दादा और बीसीसीआई को हर तरह की जानकारी जरूर होगी, लेकिन वो इस समय टीम में चल रही इस टेंशन को सुलझा नहीं पा रहे हैं। टीम इंडिया में वनडे फॉर्मेट से विराट कोहली की कप्तानी से छुट्टी, पूर्व कोच रवि शास्त्री का कार्यकाल खत्म होने के बाद एक से एक खुलासे, इस बात का जरूर संकेत दे रहे हैं कि टीम इंडिया भले ही सफलता हासिल करती जा रही है, लेकिन टीम में गुटबाजी ने कहीं ना कहीं अपने पांव ऐसे पसार दिए हैं कि अब ये कहा जा सकता है कि साल 2000 के मैच फिक्सिंग कांड के बाद भारतीय क्रिकेट इस समय अपने सबसे खराब दौर से गुजर रहा है।

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