ipl media trophy
BCCI पर IPL टीवी और डिजिटल मीडिया अधिकार ने उम्मीद से भी ज्यादा पैसे बरसाए

पिछले कुछ महीने में, भारतीय क्रिकेट में जिस सवाल की सबसे ज्यादा चर्चा हो रही थी उसका नतीजा सामने आ चुका है। आईपीएल मीडिया अधिकार 2023-27 के सालों के लिए बिक गए और उम्मीद से भी ज्यादा पैसा बरसा बीसीसीआई के खजाने पर। दो सबसे बड़े पैकेज कुल 44,075 करोड़ रुपये में बिकने के साथ ही ये अंदाजा हो गया था कि बाजार का रुख किस तरफ है और ई-ऑक्शन के तीसरे दिन भी रिकॉर्ड बनने का सिलसिला जारी रहा।

बिक्री अधिकार की कीमत का ग्राफ किस तरफ जाने वाला है, इसका संकेत पहले ही मिलना शुरू हो गया था। तभी तो टेंडर डॉक्यूमेंट की बिक्री शुरू करने के बाद भी, बीसीसीआई ने 5 सीजन में कुल मैच की गिनती 370 से बढ़ाकर 410 कर दी यानि कि आईपीएल में टीम की गिनती बढ़ाने की भूमिका तैयार है। पांच सालों में 410 मैचों का ब्रेक-अप :

2023 और 2024 में से हर साल 74 मैच।
2025 और 2026 में हर साल 84 मैच।
2027 में 94 मैच।

5 साल के लिए कुल मैच 410 मैच के हिसाब से देखिए कैसे बिके अधिकार:

पैकेज ए : भारतीय उपमहाद्वीप के लिए टेलीविजन अधिकार- निम्नतम तय कीमत थी 49 करोड़ रुपये प्रति मैच (टेंडर डॉक्यूमेंट बेचते समय 5 साल में कुल 370 मैच के हिसाब से रकम बनी 18,130 करोड़ रुपये)। अधिकार बिके- पांच सीजन में 410 मैच के 23,575 करोड़ रुपये में यानि कि 57.50 करोड़ रुपये प्रति मैच। अधिकार विजेता : डिजनी- स्टार स्पोर्ट्स।

पैकेज बी : भारतीय उपमहाद्वीप के लिए डिजिटल अधिकार- निम्नतम तय कीमत थी 33 करोड़ रुपये प्रति मैच (टेंडर डॉक्यूमेंट बेचते समय 5 साल में कुल 370 मैच के हिसाब से रकम बनी 12,210 करोड़ रुपये)। अधिकार बिके- पांच सीजन में 410 मैच के 20,500 करोड़ रुपये में यानि कि 50 करोड़ रुपये प्रति मैच। अधिकार विजेता : रिलायंस ग्रुप की वायकॉम 18 (उदय शंकर और जेम्स मर्डोक के लुपा सिस्टम्स के साथ कंसोर्शियम बनाकर)।

पैकेज सी : 18 नॉन-एक्सक्लूसिव मैच- जैसे उद्घाटन मैच, चार प्ले-ऑफ और डबल हेडर के रात के मैच (सिर्फ ओटीटी के लिए रिजर्व)- निम्नतम तय कीमत थी 16 करोड़ रुपये प्रति मैच (टेंडर डॉक्यूमेंट बेचते समय 5 साल में कुल 90 मैच के हिसाब से रकम बनी 1440 करोड़ रुपये)। अधिकार बिके- पांच सीजन में 98 मैच (पहले दो सीजन में 18-18 और अगले दो सीजन में 20-20 और आख़िरी सीजन में 24) के 3257.5 करोड़ रुपये में यानि कि 33.24 करोड़ रुपये प्रति मैच। अधिकार विजेता : वायकॉम 18।

पैकेज डी : बाकी विश्व अधिकार (भारतीय उपमहाद्वीप के बाहर के बाजार के लिए) टीवी और डिजिटल दोनों- निम्नतम तय कीमत थी 3 करोड़ रुपये प्रति मैच (टेंडर डॉक्यूमेंट बेचते समय 5 साल में कुल 370 मैच के हिसाब से रकम बनी 1110 करोड़ रुपये)। अधिकार बिके- 1058 करोड़ रुपये में यानि कि 2.58 करोड़ रुपये प्रति मैच।अधिकार विजेता : वायकॉम 18।

इस तरह 2023 से 2027 तक पांच सीजन की कम से कम कीमत 48,390.5 करोड़ रुपये बनी। ये रकम, स्टार इंडिया ने 2017-22 के मीडिया अधिकार के लिए जो 16347.5 करोड़ दिए उससे लगभग 2.96 गुना है। तो इस तरह कुल मीडिया अधिकार बिके उस रिकॉर्ड कीमत पर जिसने दुनिया को हैरान कर दिया। हां, ये जरूर है कि कुल रकम 50,000 करोड़ की जादुई गिनती पर नहीं पहुंची।

मीडिया अधिकार की इस बिक्री ने आईपीएल को एक ऐसी ‘प्रॉपर्टी’ बना दिया है कि क्रिकेट की कोई टी 20 लीग तो उसके मुकाबले पर कहीं ठहरती ही नहीं, इस बढ़ोतरी ने आईपीएल को एनएफएल (NFL) और इंग्लिश प्रीमियर लीग (EPL) के साथ कीमत की होड़ में पहुंचा दिया है। अगर प्रति मैच कीमत की बात करें तो सिर्फ एनएफएल ऊपर है आईपीएल से।

लंबे इंतज़ार के बाद, ई-नीलामी 12 जून को मुंबई में शुरू हुई और भारतीय बाजार के बड़े ब्रॉडकास्ट दिग्गजों- डिजनी-स्टार, सोनी, ज़ी और वायकॉम ने सबसे ज्यादा चर्चा वाले पैकेज ए और बी के लिए मुकाबला किया। अमेजन के बिलकुल आख़िरी मुकाम पर मुकाबले में हिस्सा न लेने के फैसले से रोमांच में कमी जरूर आई पर इसका कीमत पर कोई ख़ास असर आया, ऐसा नहीं लगता।

ब्रॉडकास्ट अधिकार की कीमत में बढ़ोतरी किस कदर हुई है- इसका अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि स्टार ने 2018-22 के सालों के लिए सभी ब्रॉडकास्ट अधिकार 16347.5 करोड़ में ही खरीद लिए थे- तब यही बहुत बड़ी रकम लग रही थी। ये तब क्रिकेट में सबसे बड़ा ब्रॉडकास्ट सौदा था। अब तो यह उससे कई गुना बढ़ गया है। कुल मिलाकर भी देखें तो आईपीएल के अधिकार की कीमत का ग्राफ लगातार ऊपर ही जा रहा है-

  • 2008 में, सोनी ने 10 साल के लिए 8,200 करोड़ रुपये खर्चे थे।
  • 2017 में, 5 साल के लिए स्टार ने 16,347. 5 करोड़ रुपये का कॉन्ट्रैक्ट किया (जो अब 20 हजार करोड़ रुपये हो गया है) यानि कि 2008 की वैल्यू का लगभग चार गुना।

ऐसे में इस बार अगर 45,000/50,000 करोड़ रुपये से ज्यादा की बिक्री का अनुमान था तो इसमें गलत क्या है? अकेले पैकेज ए और बी ने ही स्टार के कुल पैकेज से ढाई गुना से भी ज्यादा पैसा दे दिया।

नीलामी तब तक चली जब तक चारों पैकेज की बोलियां रुक नहीं गईं। डिज़नी स्टार ने 23,575 करोड़ रुपये में टीवी अधिकार खरीदकर भारतीय टेलीविजन पर आईपीएल को अपने कब्जे में बनाए रखा और सोनी की कोशिश को कामयाब नहीं होने दिया। वायकॉम 18 को 20,500 करोड़ रुपये में डिजिटल अधिकार मिले- उनकी एंट्री आगे के सालों का साफ़ इशारा है। मीडिया अधिकार की बिक्री के इस राउंड से बीसीसीआई खेलों की दुनिया में सबसे अमीर बोर्ड/एसोसिएशन में से एक बन गया है।

अगर सोनी पैकेज ए को हासिल करने के जोरदार दावेदार थे तो उनके नए पार्टनर ज़ी मीडिया डी पैकेज जीत सकते थे। लग रहा था कि ज़ी-सोनी पार्टनरशिप एक नई शुरुआत करेगी पर ऐसा हुआ नहीं।

अगर प्रति मैच कीमत की बात करें तो सिर्फ भारतीय उप महाद्वीप में टीवी और डिजिटल स्ट्रीमिंग से मिलाकर प्रति मैच 107.5 करोड़ रुपये मिलेंगे। एक ख़ास बात और- इस बार की नीलामी के साथ, आईपीएल में एक ब्रॉडकास्टर का एकाधिकार ख़त्म हो गया। वायकॉम 18 और टाइम्स इंटरनेट की एंट्री आगे के मुकाबले को और रोचक बनाएगी। स्टार ने पिछले राउंड (2018-2022) के दौरान ब्रॉडकास्ट अधिकारों के लिए 16347.50 करोड़ रुपये खर्च किए थे- उस रकम के हिसाब से प्रति मैच कीमत 54.5 करोड़ रुपये बनी थी। इस गिनती में, सिर्फ एनएफएल से प्रति मैच ज्यादा पैसा मिलता है :

एनएफएल : प्रति मैच ब्रॉडकास्ट अधिकार 132 करोड़ रुपये।
आईपीएल : प्रति मैच ब्रॉडकास्ट अधिकार 107.5 करोड़ रुपये।
ईपीएल : प्रति मैच ब्रॉडकास्ट अधिकार 85 करोड़ रुपये।
एमएलबी : प्रति मैच ब्रॉडकास्ट अधिकार 85 करोड़ रुपये।
एनबीए : प्रति मैच ब्रॉडकास्ट अधिकार 15 करोड़ रुपये।

एक और ध्यान देने वाली बात ये है कि भारतीय उप महाद्वीप के लिए अगर टीवी अधिकार प्रति मैच 57.5 करोड़ रुपये के हिसाब से बिके तो इसी बाजार के लिए डिजिटल अधिकार वायकॉम18 ने प्रति मैच 50 करोड़ रुपये के हिसाब से खरीदकर टीवी और डिजिटल स्ट्रीमिंग के बीच का फर्क बड़ा कम कर दिया है। देश में क्रिकेट को कहां और किस तरह से देखना है- इसकी पसंद लगातार बदल रही है। साथ ही टीवी के लिए ये आगे की चुनौती का साफ़ इशारा है। एक तुलना और : पांच साल पहले, फेसबुक ने 3,900 करोड़ रुपये के साथ सबसे बड़ी डिजिटल अधिकार बोली लगाई थी यानि कि प्रति मैच लगभग 13 करोड़ रुपये का प्रस्ताव था। उस समय, ये भी बड़ी प्रभावशाली बोली थी। तब से समय बड़ा बदल गया है- डिजिटल स्ट्रीमिंग से मैच देखने वालों की गिनती तेजी से बढ़ी है। इसे देखते हुए बीसीसीआई का टीवी और डिजिटल अधिकार अलग-अलग बेचने का फैसला एक चतुर चाल साबित हुआ है।

इस तरह आईपीएल में मैचों की गिनती में बढ़ोतरी के साथ, बीसीसीआई के लिए कमाई में जबरदस्त बढ़ोतरी हुई है। मीडिया अधिकार, बोर्ड के लिए आमदनी के प्रमुख स्रोतों में से हैं।आईपीएल ने सभी टी 20 लीग को तो खैर बहुत पीछे छोड़ ही दिया है।

Leave a comment

Cancel reply