lala marnath ghulam ahmed
साल 1959 में वेस्टइंडीज के खिलाफ टेस्ट सीरीज के दौरान टीम इंडिया ने 5 कप्तान बदल दिए थे

एजबेस्टन टेस्ट में जसप्रीत बुमराह कप्तान। इस तरह 2022 में इंटरनेशनल क्रिकेट में टीम इंडिया के कप्तान की गिनती 6 हो गई, एक कैलेंडर इयर में कप्तान की गिनती में टीम इंडिया का रिकॉर्ड, जब से राहुल द्रविड़ ने श्रीलंका में कोच की ड्यूटी की वे 5 टेस्ट कप्तान (रहाणे, कोहली, केएल राहुल, रोहित, बुमराह), 3 वन डे कप्तान (धवन, रोहित, केएल राहुल) और 3 टी 20 कप्तान (धवन, रोहित, पंत) के साथ काम कर चुके हैं।

अब तो टेस्ट, वन डे और टी 20 खेलते हैं, यहां तक कि लगभग एक साथ खेलने वाली दो अलग-अलग टीम बनीं। इससे भी कप्तान बढ़े पर इतिहास में झांकें तो पता चलता है कि भारत ने 1959 में टेस्ट क्रिकेट में ही 5 कप्तान बना दिए थे। क्या नजारा रहा होगा तब? इसीलिए कहा गया कि ‘म्यूजिकल चेयर’ का खेल खेला कप्तानी के नाम पर, तब वेस्टइंडीज की टीम 1958-59 की सीरीज के लिए भारत आई थी। देखिए क्या हुआ:

पहला टेस्ट नवंबर 28 दिसंबर 3,1958 मुंबई में : सेलेक्शन कमेटी के चेयरमैन लाला अमरनाथ की पसंद थे गुलाम अहमद और जिद्द में गुलाम को कप्तान बना दिया। दूसरी तरफ गुलाम खुद मुंबई में खेलना नहीं चाहते थे, इसलिए इंकार कर दिया। अब मजबूरी में पॉली उमरीगर को कप्तान बना दिया। टेस्ट ड्रा रहा।

दूसरा टेस्ट दिसंबर 12-17,1958 कानपुर में : गुलाम अहमद ने कप्तान की ड्यूटी संभाल ली और उमरीगर हट गए। टेस्ट हार गए।

तीसरा टेस्ट 31 दिसंबर, 1958 से 4 जनवरी, 1959 कोलकाता में : वेस्टइंडीज ने बुरी तरह से हराया. एक पारी और 336 रनों से, जो उस समय हार का सबसे बड़ा अंतर था। गुलाम का हौसला एकदम पस्त हो गया और टेस्ट के बाद कप्तानी छोड़ दी।

चौथा टेस्ट 21-26 जनवरी, 1959 मद्रास में: गुलाम पर इस्तीफा वापस लेने के लिए दबाव डाला गया तो वे राजी हो गए, हालांकि अनिच्छा से। सेलेक्टर उनकी मदद के लिए वीनू मांकड़ को वापस लाने पर भी राजी हो गए। टेस्ट शुरू होने से ठीक चार दिन पहले अचानक ही गुलाम ने टेस्ट क्रिकेट से रिटायर होने की घोषणा कर सभी को चौंका दिया। अब सेलेक्टर फिर से फंस गए। जिम्मेदारी लेने से बचने के लिए विजय मांजरेकर ने खुद को अनफिट घोषित कर दिया।

अमरनाथ अब उमरीगर को कप्तान बनाना चाहते थे पर साथ ही स्पिनर के तौर पर जसू पटेल उनकी पसंद थे। पटेल को चुनने की खबर पर उमरीगर ने कप्तानी से इनकार कर दिया। इस झगड़े को टालने के लिए अपूर्व सेनगुप्ता को ले आए पर अब बोर्ड अध्यक्ष अड़ गए कि जसू पटेल ही खेलेंगे। टेस्ट की पूर्व संध्या पर, उमरीगर ने एक फंक्शन में कप्तान के तौर पर भाषण दिया पर वापस होटल लौटते ही इस्तीफा दे दिया। टेस्ट शुरू होने से सिर्फ 15 मिनट पहले वीनू मांकड़ को राजी किया गया कि कप्तान बन जाएं। तब वे टॉस करने गए। भारत 295 रन से हारा।

पांचवां टेस्ट 6-11 जनवरी,1959 दिल्ली में: हंगामा चलता रहा। चौथे टेस्ट के दौरान, मांकड़ की ग्राउंड से गैरमौजूदगी में गुलाबराय रामचंद ने थोड़े समय कप्तानी की। इससे प्रभावित होकर सेलेक्टर ने मांकड़ को हटा कर रामचंद को जिम्मेदारी देने का फैसला किया, जब तक रामचंद को बताते, वे मुंबई लौटने के लिए होटल से निकल गए थे। ऐसे में हेमू अधिकारी को कप्तान बनाने का फैसला किया, जो रामचंद कप्तान बनने वाले थे, उन्हें टीम में भी नहीं लिया। टेस्ट ड्रा।

नाटक यहीं नहीं रुका। इंग्लैंड के अगले दौरे के लिए, 6 टेस्ट के अनुभवी दत्ता गायकवाड़ को कप्तान बना दिया यानि कि भारत के 6 टेस्ट में 5 कप्तान हो गए! मजे की बात ये है कि जब सीरीज के दौरान, गायकवाड़ ब्रोंकाइटिस के कारण नहीं खेले तो पंकज रॉय को लॉर्ड्स में दूसरे टेस्ट में कप्तान बनना पड़ा, जिससे 7 टेस्ट में 6 कप्तान बन गए!

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