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इयोन मोर्गन- ऐसे कप्तान, जिसने सफ़ेद गेंद वाले क्रिकेट में इंग्लैंड के खेलने के अंदाज को बदल दिया! 

अटकलें सही निकलीं और इंग्लैंड के लिमिटेड ओवर क्रिकेट के कप्तान इयोन मोर्गन ने अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट से संन्यास ले लिया। सात साल से ज्यादा इस ड्यूटी पर रहे। यूं तो उनकी कप्तानी में इंग्लैंड ने कई रिकॉर्ड बनाए, लेकिन उनके नाम तीन सबसे बड़े वन डे टीम स्कोर का ख़ास तौर पर जिक्र होगा, अभी पिछले दिनों नीदरलैंड में वन डे के विश्व रिकॉर्ड को 498-4 तक पहुंचा दिया था। गड़बड़ ये हुई कि जब टीम ने इस 3 मैच की सीरीज में गजब की क्रिकेट खेली तो वे खुद पहले दो मैचों में 0 पर आउट हुए और ग्रोइन की तकलीफ के चलते तीसरे में खेले नहीं।

घरेलू क्रिकेट में पिछले कई महीने से वे सही फार्म की तलाश में थे और रिकॉर्ड देखें तो पिछले डेढ़ साल में, इंटरनेशनल और घरेलू टी 20 तथा वन डे में 48 पारियों में सिर्फ एक 50 बनाया था। सफेद गेंद क्रिकेट में अपनी पिछली 28 अंतरराष्ट्रीय पारियों में से सिर्फ दो 50 बनाए।

यहां तक कि उनकी गैर-मौजूदगी में कप्तान की ड्यूटी निभाने वाले जोस बटलर और मोईन अली ने उनके बचाव में बयान दिए और कहा कि मोर्गन के अभी भी कप्तान बने रहने से बेहतर इंग्लैंड के लिए और कुछ नहीं हो सकता पर उन्हें अहसास हो गया था कि उम्र (35 साल) साथ नहीं दे रही और इस फार्म पर किसी युवा खिलाड़ी का रास्ता रोकना सही नहीं होगा। मोईन ने टीम की सोच को बदलने के साथ-साथ एक महान कप्तान बताया। तो कप्तानी छोड़ने की जल्दी क्या थी, इस साल के आखिर में ऑस्ट्रेलिया में टी 20 विश्व कप है और 2023 में भारत में 50 ओवर के खिताब का बचाव करना है। इन्हीं दोनों टूर्नामेंट को ध्यान में रखते हुए वे नए कप्तान को अपने अंदाज में टीम तैयार करने का पूरा समय देना चाहते हैं। टीम पहले और दिखा दिया कि कितने निःस्वार्थ से खेलते हैं।

उन्हें इस बात की तसल्ली है कि कप्तान के तौर पर इंग्लैंड को एक बिखरी-टूटी टीम से चैंपियन टीम के स्तर तक पहुंचाया। 2015 विश्व कप में इंग्लैंड की निराशाजनक क्रिकेट से टीम को 2019 विश्व कप में अपने पहले 50 ओवर टाइटल और वन डे एवं टी 20 में नंबर 1 रैंकिंग दिलाई। टीम के खेलने के तरीके को बदल दिया- दब कर नहीं, तेज तर्रार क्रिकेट खेलने का जोश दिया। इस तरीके और सोच को इंग्लिश क्रिकेट के लिए उनके सबसे बड़े योगदान के तौर पर याद रखा जाएगा। 2010 में टी 20 में जब इंग्लैंड ने अपना पहला खिताब जीता तो वे टीम में थे और 2016 में फाइनल में खेली टीम के कप्तान थे। उनके नाम इंग्लिश रिकॉर्ड हैं- सबसे ज्यादा वन डे (225) और टी 20 (115) और इन दोनों तरह की क्रिकेट में सबसे ज्यादा रन।

ऐसा नहीं कि ये सब अचानक हुआ। इंग्लैंड के विश्व कप विजेता कप्तान मोर्गन, सही फॉर्म और फिटनेस की तलाश में लगातार अपने करियर के बारे में सोच रहे थे। नीदरलैंड के विरुद्ध मैचों ने उन्हें फैसला लेने में मदद की। इंग्लैंड उन्हें ऐसे कप्तान के तौर पर याद रखेगा, जिसने पिछले सात सालों में इंग्लैंड की सफेद गेंद क्रिकेट में क्रांति ला दी- 2019 में लॉर्ड्स में 50 ओवर के विश्व कप में जीत इसमें सबसे ख़ास है। वे हटे पर इंग्लैंड को किसी कप्तानी की मुश्किल में छोड़ कर नहीं, जोस बटलर (2015 से उप-कप्तान और 13 बार कप्तान) और मोईन अली (वे भी गैर मौजूदगी में कप्तान रहे) दावेदार हैं।

मूलतः आयरलैंड के क्रिकेटर- 2009 में,अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट खेलने के ज्यादा मौकों की तलाश में, आयरलैंड क्रिकेट के मुकाबले इंग्लिश क्रिकेट को चुना। जब ऑस्ट्रेलिया में 2015 विश्व कप की पूर्व संध्या पर एलिस्टेयर कुक से वन डे टीम की कप्तानी ली तो हालांकि वहां तो इंग्लैंड ने कुछ ख़ास नहीं किया पर पिछले चीफ कोच ट्रेवर बेलिस के साथ मिलकर टीम के खेलने का तरीका बदलने में देर नहीं लगाई। इंग्लिश क्रिकेट में कई बार ये जिक्र हुआ कि अगर इतने ही अच्छे खिलाड़ी-कप्तान हैं तो टेस्ट क्रिकेट में उनका जिक्र क्यों नहीं होता- 2010 और 2012 के बीच 16 टेस्ट कैप जिसमें दो शतक बनाए।

इंग्लैंड के नए कप्तान के लिए पहली चुनौती सामने ही है, भारत के विरुद्ध तीन टी 20 और तीन वन डे मैच 7 जुलाई से एजेस बाउल में शुरू हैं। दक्षिण अफ्रीका के विरुद्ध इसके बाद 6 मैच खेलने हैं। 2019 में लॉर्ड्स में जब इंग्लैंड को जीत मिली तो इसमें उनके संयम और सोच का पूरा योगदान था। क्रिकेट खेले अपने अंदाज में और अपनी शर्तों पर।

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