Ajinkya Rahane - Cheteshwar Pujara
IPL के दिनों में किस खिलाड़ी के टेस्ट के लिए टीम इंडिया में लौटने की बात हो रही है और क्यों ?

आईपीएल के दिनों में तो बात हो रही है उन खिलाड़ियों की जो लिमिटेड ओवर क्रिकेट या टी 20 वर्ल्ड कप के लिए टीम में इंडिया में जगह के दावेदार बने हैं पर एक खिलाड़ी ऐसा है जिसने मजबूर कर दिया है कि टेस्ट टीम की बात करें। असल में तो दो खिलाड़ियों के बारे में बात होनी चाहिए थी पर इनमें से एक अपने ‘लालच’ में न इधर का रहा और न उधर का।

पिछले कुछ महीनों में, भारत के टेस्ट सेट-अप में चेतेश्वर पुजारा और अजिंक्य रहाणे की साधारण फार्म और फिर इन्हें टीम से निकालने पर इतना कुछ लिखा जा चुका है कि संभवतः कोई चर्चा बचती ही नहीं। क्रिकेट में एक पुरानी कहावत है कि जब इंटरनेशनल क्रिकेट में अचानक ही बैट रूठ जाए तो फार्म की तलाश में घरेलू क्रिकेट, जैसे भारत में रणजी ट्रॉफी, में लौटो। सुनील गावस्कर जैसे टॉप बल्लेबाज ने भी अपने करियर में एक मुकाम पर ऐसा ही किया था।

श्रीलंका के विरुद्ध इस साल टेस्ट सीरीज की टीम से निकाले जाने के बाद, न तो 95 टेस्ट खेल चुके चेतेश्वर पुजारा ने अपने इंटरनेशनल करियर पर आख़िरी लाइन खींची और न ही 82 टेस्ट खेल चुके अजिंक्य रहाणे ने। दोनों रणजी ट्रॉफी में लौटे। पुजारा ने सौराष्ट्र के लिए 5 पारी में 191 रन बनाए जबकि रहाणे ने मुंबई के लिए 4 पारी में 185 रन- स्पष्ट है कि दोनों के बैट ने कुछ ऐसा नहीं किया कि चयनकर्ताओं के दरवाजे पर जोरदार दस्तक की आवाज आई हो।

टीम इंडिया के टेस्ट शुरू होने में अभी भी दिन बचे थे और रास्ता भी था- पुजारा ने काउंटी चैंपियनशिप में ससेक्स के लिए खेलने को चुना और रहाणे ने आईपीएल को। कहा जा सकता है कि चूंकि पुजारा को आईपीएल के लिए कोई खरीदता नहीं- इसलिए पुजारा के पास और कोई रास्ता ही नहीं बचा था पर सच ये है कि पुजारा लगातार इंग्लिश क्रिकेट में खेलने जा रहे हैं। इस साल तो वैसे भी इंग्लिश क्रिकेट सीजन के शुरू में इंग्लैंड में खेलने का महत्व ज्यादा है क्योंकि पिछले साल वाली सीरीज का बचा भारत-इंग्लैंड पांचवां टेस्ट, इस साल खेलना है। इस टूर के लिए टीम इंडिया के चुने जाने से पहले, इंग्लैंड में चैंपियनशिप मैचों में बनाए रन के महत्व से कोई इंकार नहीं कर सकता।

पुजारा ने चुना इंग्लैंड में खेलना। नतीजा- ससेक्स के लिए 4 मैच में लगातार चार शतक जिनमें से दो स्कोर 200 वाले। पुजारा ने डर्बीशायर, वूरस्टरशायर, डरहम और मिडलसेक्स के विरुद्ध 201, 109, 203 और 170 के स्कोर के साथ, शानदार फॉर्म में दिखा दी है और इसी वजह से आईपीएल के दिनों में, उनकी टेस्ट टीम में वापसी की चर्चा शुरु हो गई।

रहाणे ने चुना आईपीएल में खेलना- ये जानते हुए भी कि इस समय वे टी 20 के ऐसे बल्लेबाज कतई नहीं जो आईपीएल में नए रिकॉर्ड बना दे। सिर्फ मोटे चैक के अतिरिक्त उनके करियर में कुछ हासिल होने की उम्मीद नहीं थी। वही हुआ- केकेआर ने 7 पारी में 133 रन के रिकॉर्ड के बाद बेंच पर बैठा दिया और वहीं बैठे हैं।

इसीलिए टेस्ट टीम में वापसी की चर्चा में पुजारा का नाम है- रहाणे का नहीं। एजबेस्टन में जुलाई में टेस्ट है और पुजारा को इंग्लिश परिस्थितियों में बल्लेबाजी करने की आदत होने का फायदा टीम इंडिया के लिए एक बड़ा बढ़ावा साबित हो सकता है। सुनील गावस्कर भी मानते हैं कि चूंकि पुजारा को टेस्ट टीम से बाहर हुए ज्यादा समय नहीं हुआ है, इसलिए उनके लिए प्लेइंग इलेवन में वापसी करना मुश्किल नहीं होगा।

एक ख़ास बात ये कि काउंटी क्रिकेट में पुजारा का स्ट्राइक रेट अच्छा है हालांकि टीम इंडिया को पुजारा की सबसे ज्यादा जरूरत एक एंकर के तौर पर होगी। इसमें कोई शक नहीं कि जिस अटैक पर पुजारा ने अब तक के इस सीजन के 4 शतक बनाए हैं- उसमें और टेस्ट अटैक में बड़ा फर्क होगा पर उनके सबसे ज्यादा काम आएगी इंग्लिश परिस्थितियों में खेलने की आदत। पिछले साल वर्ल्ड टेस्ट चैंपियनशिप के फाइनल में यही तो सबसे बड़ा फेक्टर था जो टीम इंडिया की हार की वजह बना- न्यूजीलैंड ने उस फाइनल से पहले, इंग्लैंड में दो टेस्ट मैच खेल लिए थे और जब उन्हें साउथेम्प्टन में डब्ल्यूटीसी फाइनल के लिए समान स्थितियां मिलीं तो वे फ्रंट फुट पर थे। बारिश हो रही थी। वे पिच पर इसके असर को जानते थे। चेतेश्वर पुजारा के साथ यही हो रहा है। उन्हें इंग्लिश परिस्थितियों में, उनके गेंदबाजों के विरुद्ध बल्लेबाजी करने की आदत का फायदा मिलेगा।

इसीलिए उनके अविश्वसनीय प्रदर्शन ने कई क्रिकेट पंडितों को यह सोचने के लिए राजी कर लिया है कि वह भारतीय टेस्ट टीम में वापस आने के लिए तैयार हैं।

“हां, इसे ध्यान में रखा जाना चाहिए (इंग्लैंड में भारत के टेस्ट मैच के लिए)। अभी पिछले साल हमने देखा कि वर्ल्ड टेस्ट चैंपियनशिप के फाइनल से पहले न्यूजीलैंड ने इंग्लैंड में दो टेस्ट मैच खेले। उसके कारण, वे वहां की परिस्थितियों के अनुकूल हो गए और जब उन्हें साउथेम्प्टन में डब्ल्यूटीसी फाइनल के लिए समान स्थितियां मिलीं।
बारिश हो रही थी। वे शर्त के अभ्यस्त थे। चेतेश्वर पुजारा के साथ यही हो रहा है। उन्हें अंग्रेजी परिस्थितियों में उनके गेंदबाजों के खिलाफ बल्लेबाजी करने की आदत हो गई है।

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