क्रिकेट के कानूनों की संरक्षक संस्था मेरिलबॉन क्रिकेट क्लब (MCC) ने क्रिकेट के नियमों में कभी कई संशोधन किए, तो कभी कई नए रूल्स बनाए. क्रिकेट के प्रचंड पंडितों के मुताबिक़, क्रिकेट के खेल का इतिहास 16वीं शताब्दी से आज तक अत्यन्त विस्तृत रूप में विद्यमान है. अंतर्राष्ट्रीय मैच 1844 के बाद खेला गया था. हालांकि, आधिकारिक रूप से अंतर्राष्ट्रीय टेस्ट क्रिकेट 1877 से प्रारम्भ हुआ. इंग्लैंड को क्रिकेट खेल का जन्मदाता कहा जाता है, लेकिन इसकी बढ़ती लोकप्रियता को देखते हुए वर्तमान समय में यह दुनिया के लगभग 100 से अधिक देशो में खेला जा रहा है. कई देशो की टीमें दूसरे देशो का दौरा कर वहां इस खेल को खेलने भी जाती हैं. दूसरी ओर, समय के साथ-साथ क्रिकेट के नियमों में भी बदलाव होते रहे हैं. आज के आधुनिक युग में क्रिकेट के खेल की पूरी तरह से परिभाषा बदल चुकी है.

बहरहाल, आज हम क्रिकेट के खेल से जुड़े उन पांच नियमों के बारे में जानेंगे, जो वाकई में काफी अनोखे हैं. हालांकि, इन रूल्स के बारे में कम ही लोग जानते हैं. आइये नज़र डालते हैं, कौन-कौन से नियम शामिल हैं इस लिस्ट में.

डेड बॉल का नियम

अगर खेल के दौरान मैदान में किसी व्यक्ति, जानवर (कुत्ते आदि…..) या अन्य वस्तु के द्वारा रुकावट आती है या पिच को नुकसान होता है तो अंपायर फैसला लेते हुए डेड बॉल करार देंगे. हालांकि, पुराने नियम के मुताबिक, अंपायर ऐसा नहीं करते थे.

खिलाड़ियों का रिप्लेसमेंट

यह एक नया नियम है. इस रूल को लेकर लॉ 1.3 बनाया गया है. इसके मुताबिक, जिस खिलाड़ी को रिप्लेस किया जा रहा है, वह उसके रूप में रिप्लेसमेंट होना चाहिए. अगर खिलाड़ी बल्लेबाजी कर चुका है, तो रिप्लेस किया गया खिलाड़ी उस इनिंग में बल्लेबाजी नहीं कर सकता. अगर प्लेयर पर कोई पेनल्टी या वॉर्निंग लागू है, तो आने वाले खिलाड़ी पर भी ये सब संबद्ध होंगे.

गेंद खोने की स्थिति में रूल

अगर बल्लेबाज द्वारा लगे शॉट से गेंद खो जाती है, तो फील्डिंग टीम के अपील करने के बाद गेंद को डेड घोषित किया जाता है. इस दौरान दौड़कर या बाउंड्री से मिलने वाले रनों को बल्लेबाज के खाते में जोड़ दिया जाता है. आगे का खेल तब ही शुरू होता है, जब उतने ही ओवर पुरानी गेंद मैदान में लाई जाती है.

मांकडिंग नियम

पुराने नियम के मुताबिक, मांकडिंग लॉ-41 (अनफेयर प्ले) के अधीन आता था. अब इसे लॉ-38 (रन-आउट) में मूव कर दिया गया है. इसे अनफेयर प्ले नहीं माना जाएगा, जिसकी वजह से इसपर होने वाला विवाद भी लगभग समाप्त हो जाएगा. बता दें कि जब गेंदबाज को लगेगा कि नॉन-स्ट्राइकर एंड का बल्लेबाज बॉल के डिलीवर होने से पहले ही अपनी क्रीज से बहुत पहले बाहर निकल रहा है, तो गेंदबाज नॉन-स्ट्राइकर छोर पर बल्लेबाज को रन आउट कर सकता है. इसमें गेंद रिकॉर्ड नहीं होती है लेकिन बैटर आउट हो जाता है.

इस शब्द के अविष्कार का श्रेय ऑस्ट्रेलियन प्रेस को जाता है. 1947 में भारत के ऑस्ट्रेलिया दौरे के दौरान, वीनू मांकड़ ने बिल ब्राउन को एक बार नहीं, बल्कि दो बार क्रीज से बाहर होने पर बेल्स हटाकर आउट किया था. इनमें से एक बार तो टेस्ट में. बड़ा शोर मचा और तब से शोर और वीनू मांकड़ का नाम इस तरीके से जुड़ गया.

बिना अपील आउट नहीं दिया जा सकता है!

बल्लेबाज को अंपायर तब तक आउट (एलबीडब्लू, ओब्सट्रकटिंग द फील्ड, आदि) नहीं देता, जब तक फील्डिंग करने वाली टीम अपील न करे. अगर क्रिकेट के 27वें नियम की बात करें तो, ऐसा किया जाता है. बल्लेबाज वापस पवेलियन जाता है, तो अंपायर उसे रोक कर कह सकता है कि आप आउट नहीं हुए हैं. माना जाता है कि गेंदबाजी करने वाली टीम बोलर के रन-अप तक जाने पर भी अपील कर सकती है.

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Q. क्रिकेट के नियम बनाने वाली संस्था कौन सी है?

A. मेरिलबॉन क्रिकेट क्लब

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