8 ख़ास बातें, जो 'दादा' सौरव गांगुली को देती हैं अलग पहचान.

यूं तो बहुत कुछ ख़ास है सौरव गांगुली के क्रिकेट जीवन से जुड़ा हुआ, लेकिन ये 8 कम चर्चित और ख़ास बातें उन्हें अलग पहचान देती हैं :

  1. सौरव गांगुली मशहूर तो हैं खब्बू के तौर पर क्योंकि, वे बाएं हाथ से बल्लेबाजी करते हैं, लेकिन सच तो यह है कि वे तो दाएं हाथ के बल्लेबाज थे। खब्बू, इसलिए बने ताकि अपने बड़े भाई स्नेहशीष (जो लेफ्ट हैंडेड हैं) की क्रिकेट किट का इस्तेमाल कर सकें। सौरव दाएं हाथ से लिखते हैं, दाएं हाथ से गेंदबाजी करते हैं और वास्तव में दाहिने हाथ से हर काम करते हैं।

2. उनकी मां निरूपा नहीं चाहती थीं कि वह क्रिकेट खेलें, क्योंकि पढ़ाई पर असर पड़ रहा था, लेकिन बड़े भाई स्नेहाशीष की जिद के कारण सौरव को एक क्रिकेट एकेडमी में दाखिला मिला। दूसरी तरफ उनके पिता चंडीदास प्रिंटिंग व्यवसाय चलाते थे और शहर के सबसे धनी व्यक्तियों में से एक थे।

3. सौरव को क्रिकेट ने अमीर नहीं बनाया, उनका तो परिवार रईस था। दक्षिणी कोलकाता के बेहाला में सौरव जॉइंट फैमिली में एक घर में रहते हैं, जिसमें 45 से ज्यादा कमरे हैं। उनका घर क्रिकेट के पैसे के बिना आलीशान था। पिता चंडीदास के प्रिंटिंग व्यवसाय को एक समय पूरे एशिया में तीसरा सबसे बड़ा गिना जाता था।

4. इसी रईसी और शान शौकत की बदौलत पिता ने ‘महाराज’ का निकनेम दिया। उनका दूसरा मशहूर नाम प्रसिद्ध क्रिकेट कमेंटेटर ज्योफ बॉयकॉट ने दिया, ‘प्रिंस ऑफ कोलकाता’। इंटरनेशनल करियर की शुरुआत 1992 में हुई, लेकिन कहा गया कि ‘महाराजा’ का रुतबा उन पर हावी है और वे घमंडी हैं। कहते हैं कि उन्होंने एक सीनियर क्रिकेटर के लिए मैदान पर ड्रिंक्स ले जाने से मना कर दिया था। सौरव आज तक कहते आ रहे हैं कि ये खबर गलत थी।

5. सौरव ने बंगाल के लिए 1989/90 सीज़न में फर्स्ट क्लास क्रिकेट में खेलना शुरू किया और रणजी ट्रॉफी टीम में अपने बड़े भाई स्नेहाशीष की जगह ली। इसी तरह टेस्ट डेब्यू के लिए 1996 में इंग्लैंड के विरुद्ध लॉर्ड्स में दूसरे टेस्ट में मौका तब मिला, जब नवजोत सिंह सिद्धू अपने कप्तान मोहम्मद अजहरुद्दीन से बहस के बाद टूरिंग टीम को छोड़कर भारत वापस आ गए थे।

6. क्रिकेट करियर की सबसे ख़ास बात यह है कि टेस्ट औसत 42.17 है और इसमें रिकॉर्ड ये है कि टेस्ट औसत, पूरे टेस्ट करियर के दौरान कभी भी 40 से नीचे नहीं गिरा। इसी तरह लगातार चार वन डे मैन ऑफ द मैच अवार्ड जीतने वाले एकमात्र क्रिकेटर हैं, 14 सितंबर से 21 सितंबर 1997 के बीच।

7. इंडियन प्रीमियर लीग के इतिहास में पहली गेंद किसने खेली थी, उनके नाम ये अनूठा रिकॉर्ड है। 2008 में उद्घाटन आईपीएल मैच में गांगुली ने प्रवीण कुमार की गेंद खेली थी।

8. उन कुछ गिने चुने क्रिकेटरों में से एक, जिनके नाम पर शहर में एक सड़क है। इसे ‘सौरव गांगुली एवेन्यू’ कहा जाता है, राजारहाट में 1.5 किमी लंबी सड़क, पश्चिम बंगाल के उत्तर 24 परगना जिले में। इसी तरह, जिस एक ओर सम्मान की कम चर्चा होती है वह 20 मई 2013 को मिला, पश्चिम बंगाल सरकार की ओर से बंग विभूषण।

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