5 दिग्गज खिलाड़ी, जो अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट में सबसे ज्यादा बार शून्य पर आउट हुए हैं.

क्रिकेट के खेल में टेस्ट प्रारूप का दर्जा सबसे बड़ा है. लाल गेंद से पांच दिनों तक खेला जाने वाला यह फोर्मेट किसी भी खिलाड़ी के लिए ‘इम्तेहान’ के समान होता है. टेस्ट में खेलने वाले हर प्लेयर के लिए खुद को साबित करना बड़ी चुनौती होती है. वहीं, एकदिवसीय क्रिकेट में खिलाड़ियों को खुद को साबित करने का सिर्फ एक ही दिन मिलता है. यह अलग बात है कि उसे दूसरे मैच में मौका मिल जाए, क्योंकि 100 ओवर के इस मैच की समयावधि 1 दिन की ही होती है.

अगर क्रिकेट के फटाफट प्रारूप यानी टी20 की बात की जाए तो यह सबसे छोटा फोर्मेट है. इसमें बल्लेबाज ज्यादा से ज्यादा रन बटोरने की तलाश में रहते हैं. इस प्रारूप ने बल्लेबाजी की भाषा को बिलकुल बदलकर रख दिया है. कभी-कभी गेंदबाज भी बल्लेबाज पर हावी हो जाते हैं.

विश्व क्रिकेट में ऐसे कई खिलाड़ी हुए हैं, जिन्होंने अपने शानदार खेल की बदौलत दुनिया के सबसे महान खिलाड़ियों की लिस्ट में अपना नाम शुमार कराया है. कभी-कभी प्लेयर्स द्वारा बनाए गए रिकॉर्ड ‘शर्मनाक’ वाली श्रेणी में भी आ जाते हैं. कोई खिलाड़ी अपने क्रिकेट करियर में ऐसे अनचाहे रिकॉर्ड्स को हासिल नहीं करना चाहेगा.

आज हम ऐसे ही 5 दिग्गज खिलाड़ियों की बात करेंगे, जो अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट में सर्वाधिक बार शून्य पर आउट हुए हैं. कौन-कौन हैं इस लिस्ट में शामिल, आइये नज़र डालते हैं:

मुथैया मुरलीधरन

59 बार डक पर आउट हुए.

श्रीलंकाई क्रिकेट टीम के पूर्व दिग्गज ऑफ स्पिनर मुथैया मुरलीधरन का नाम इस लिस्ट में पहले स्थान पर है. उन्होंने 1992 से 2011 तक श्रीलंका का प्रतिनिधित्व किया. इस दौरान वे 495 अंतर्राष्ट्रीय मैच खेलते हुए 59 बार डक पर आउट हुए, जोकि किसी भी खिलाड़ी द्वारा सर्वाधिक बार है. मुरलीधरन ने अपने इंटरनेशनल करियर में 1936 रन बनाए. हालांकि, टेस्ट में उनके नाम सबसे ज्यादा विकेट लेने का रिकॉर्ड दर्ज है. उन्होंने 800 विकेट झटके हैं. मुरलीधरन की गेंदों को पढ़ना किसी भी बल्लेबाज के लिए बहुत कठिन होता था.

कर्टनी वॉल्श

54 बार शून्य पर आउट हुए.

वेस्टइंडीज के पूर्व दिग्गज तेज गेंदबाज कर्टनी वॉल्श को तूफानी गेंदबाजी के लिए जाना जाता है. हालांकि, वे इस लिस्ट में दूसरे स्थान पर हैं. वॉल्श ने 1984 से 2001 तक वेस्टइंडीज क्रिकेट टीम का प्रतिनिधित्व किया. इस दौरान उन्होंने 337 अंतर्राष्ट्रीय मैच खेले और 54 बार शून्य पर आउट हुए. वॉल्श ने अपने इंटरनेशनल करियर में 1257 रन बनाए. उन्होंने अपनी घातक गेंदबाजी के बूते विंडीज को कई मुकाबलों में अकेले दम पर जीत दिलाई.

सनथ जयसूर्या

53 बार शून्य पर अपना विकेट गंवाया.

श्रीलंकाई क्रिकेट टीम के पूर्व दिग्गज सलामी बल्लेबाज सनथ जयसूर्या इस लिस्ट में तीसरे नंबर पर हैं. उनका नाम इस फेहरिस्त में शामिल होना वाकई में हैरानी वाली बात है. जयसूर्या ने साल 1989 से 2011 तक श्रीलंका का प्रतिनिधित्व किया. बाएं हाथ के इस विस्फोटक बल्लेबाज ने 586 अंतर्राष्ट्रीय मुकाबलों में 53 बार शून्य पर अपना विकेट गंवाया. जयसूर्या ने इंटरनेशनल क्रिकेट में 21032 रन बनाए, जिसमें उन्होंने 42 शतक और 103 अर्धशतक जड़े हैं.

ग्लेन मैकग्रा

49 बार शून्य पर आउट हुए.

ऑस्ट्रेलियाई क्रिकेट टीम के पूर्व दिग्गज तेज गेंदबाज ग्लेन मैकग्रा इस लिस्ट में चौथे नंबर पर हैं. उन्होंने साल 1993 से 2007 तक कंगारू टीम का प्रतिनिधित्व किया. मैकग्रा 376 अंतर्राष्ट्रीय मुकाबलों में 49 बार शून्य पर आउट हुए. उन्होंने 761 रन बटोरे. हालांकि, मैकग्रा को अपने समय के सबसे घातक गेंदबाजों में शामिल किया जाता है. वे सटीक लाइन और लेंथ से गेंदबाजी किया करते थे. उनके खिलाफ रन बनाना किसी भी बल्लेबाज के लिए आसान नहीं होता था.

स्टुअर्ट ब्रॉड

47 बार शून्य पर अपना विकेट गंवाया है.

इंग्लैंड के दिग्गज तेज गेंदबाज स्टुअर्ट ब्रॉड गेंद के अलावा बल्ले से भी रन बनाने के लिए जाने जाते हैं. ब्रॉड साल 2006 से इंग्लिश टीम को अपनी सेवाएं दे रहे हैं. उन्होंने अभी तक 310 अंतर्राष्ट्रीय मैचों में 47 बार शून्य पर अपना विकेट गंवाया है. ब्रॉड ने इंटरनेशनल करियर में 4013 रन बनाए हैं. ब्रॉड ने 1 शतक और 13 अर्धशतक भी जड़े हैं. वे इंग्लैंड के सबसे सफल क्रिकेटर्स में शामिल हैं.

Leave a comment